संस्करण: 29सितम्बर-2008

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT

खैरलांजी : किलेवनमनी की छायाएं ?

खैरलांजी हत्याकाण्ड को लेकर आए अदालती फैसले को लेकर क्या किसी ने मुल्क की सामाजिक न्याय मंत्री सुश्री मीराकुमार की प्रतिक्रिया देखी है ? अपने तीखे बयान में उन्होंने न केवल सीबीआई से मांग की है कि वह भण्डारा की अतिरिक्त सत्र अदालत के इस निर्णय को चुनौती दे >सुभाष गाताड़े


आतंकवादी सिर्फ़ आतंकवादी होते हैं
क्या सारे हिंदू बजरंग दली हैं और मुसलमानों का नरसंहार करते, ईसाइयों के चर्चों में आग लगाते, मिशनरियों की हत्या करते, झांकियों के नाम पर चन्दा वसूलते, व जानवर ले जाने वाले ट्रकों से चौथ वसूलने वाले होते हैं?जाहिर है कि वे नहीं होते,   >वीरेन्द्र जैन


आतंक का भगवा चेहरा

9/11 की घटना के बाद से ही पूरे विश्व में 'इस्लामी आतंकवाद' की जो सर्वव्यापी, सर्वग्राही छवि बनाई गयी है भारत उससे कतई अछूता नहीं है। इस छवि में वास्तविकता के चतुर्दिक एक भयावह आभासी आवरण बुनकर इसे विराट दैत्याकार स्वरूप दे दिया >अशोक कुमार पाण्डेय


  

सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायधीशों की राय में पोटा की आवश्यकता नहीं

आज सारे देश में इस बात पर बहस जारी है कि आतंकवाद पर नियंत्रण पाने के लिए और ज्यादा कड़े कानून की आवश्यकता है या नहीं। कानून की मांग मुख्य रुप से भारतीय जनता पार्टी की ओर से उठाई जा रही है, परंतु जनमत का एक बहुत बड़ा हिस्स इस मांग का विरोधी है। इस तरह के  >एल.एस.हरदेनिया


संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट ने किया खुलासा

राज्यों की अरूचि से भारत में गरीबी हटाने के प्रयासों की रफ्तार धीमी

 

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ओर से जारी रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया है कि भारत में गरीबी के प्रतिशत को घटाने के प्रयासों में बढ़ती जनसंख्या सबसे बड़ी बाधक सिध्द हो रही है। रिपोर्ट में यह माना गया है कि भारत के कतिपय  >राजेन्द्र जोशी


उड़ीसा, कर्नाटक में बिगड़ते हालात पर

सख्त हुई केन्द्र सरकार

 

गुजिश्ता एक महीने से उड़ीसा और अब कर्नाटक में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों पर हो रहे लगातार हमले के बाद आखिरकार केन्द्र सरकार की तंद्रा टूटी है। सरकार ने इन दोनों सूबों में जारी साम्प्रदायिक हिंसा को गम्भीरता >ज़ाहिद खान


कुपोषण की गिरफ्त में मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत निरंतर बद से बदतर होती जा रही है। खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र में तीन माह में कुपोषण से 53 बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। खरगौन और झाबुआ जिलों में भी कुपोषण ने पैर पसार रखे हैं। इन जिलों के ग्रामीण अंचलों में कुपोषण की भयावहता का अंदाज़ इसी से लगाया जा सकता ह  > महेश बाग़ी


उपलब्धियों का ढिंढोरा और कुपोषण का कहर

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान आजकल जन आशीर्वाद यात्रा के बहाने अपनी कथित उपलब्धियों का ढिंढ़ोरा पूरे प्रदेश में पीटने में लगे हैं। उनकी उपलब्धियों में स्वास्थ्य, शिक्षा, खेती, किसान और कर्मचारियों को आर्थिक  >प्रमोद भार्गव


म.प्र. में उच्च शिक्षा के निजीकरण की साजिश

अभी हाल ही में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने म.प्र. के मेडिकल कालेजों के स्नातकोत्तर पाठयक्रमों की मान्यता समाप्त करने का फैसला किया है। कारण वही पुराने हैं फेकल्टी एवं इंफ्रास्ट्रकचर की कमी जिनसे ये कालेज वर्षों  >डॉ. सुनील शर्मा


वाई-फाई सुरक्षा के लिए कुछ उपाय

अभी पिछले दिनों भारत के कुछ बडे शहरों में आतंकवादियों ने बम ब्लास्ट किए और सैकडों मासूमों की जानें लीं. इस घिनौने कार्य को अंजाम देने में उन्होंने नवीनतम तकनीक और इंटरनेट का भरपूर उपयोग> रविशंकर श्रीवास्तव


अब फिक्र को धुएँ में उड़ाना नहीं आसान

अब केन्द्र सरकार धूम्रपान निषेध हेतु क़ानून लागू करने जा रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अम्बुमणि रामदासजी के अनुसार-'2 अक्तूबर गांधी जयंती के दिन से 'वर्क प्लेस स्मोकिंग फ्री पॉलिसी' अस्तित्व में आ जाएगी।'  इसके तहत  >डॉ.गीता गुप्त


ग्रामीण विकास एवं स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां

''पहला सुख निरोगी काया'' भारतीय मनीषियों का यह वाक्य इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि अच्छे स्वास्थ्य के बिना अन्य सुखों का कोई महत्व नहीं। आज जब भारत तरक्की के मार्ग पर बढ़ता चला आ रहा है तब सबके जहन  >स्वाति शर्मा


 
29सितम्बर2008

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved