संस्करण: 29दिसम्बर-2008

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सुरक्षा की चिंता के समानान्तर
कुछ नागरिक कर्तव्य

श्री लाल शुक्ल ने राग दरबारी में लिखा है कि '' भारतीय शिक्षा व्यवस्था तो रास्ते में पड़ी हुयी वह कुतिया है जिसे जब जिसका जी चाहे वह दो लातें लगाता हुआ चला जाता है'' असल में लोकतंत्र का भी ऐसा ही हाल है कि सारे अनुशासनहीन, अवैध कार्यों में लिप्त, अज्ञानी, हरामखोर >वीरेन्द्र जैन


लोकतंत्र की बेहतरी के लिए

चुनाव सुधार आवश्यक
यदि लोकतंत्र को आम आदमी की समस्याओं के निदान का हथियार बनाना है तो वर्तमान व्यवस्था में बुनियादी परिवर्तन करने होंगे। हमारे देश के साथ-साथ, एशिया, अफ्रीका और कुछ हद तक अमरीकी महाद्वीपों के नव आजाद देशों के नागरिकों की बुनियादी समस्याओं को हल करने में >एल.एस.हरदेनिया


फिर चूक गए चौहान

यह मान लेने में कोई हर्ज़ नहीं है कि टिकट वितरण में शिवराज की जगह भाजपा संगठन और संघ की ही चली होगी, इसी कारण कुछ बदनाम मंत्री फिर से टिकट पाने और धन बल पर जीत जाने में कामयाब हो गए। यह भी माना जा सकता है कि शिवराज ने इन बदनुमा चेहरों को टिकट देने का विरोध भी किा,  >महेश बाग़ी


विदर्भ की राह पर बुंदेलखण्ड

खेती की बदहाली और किसान की त्रासद मनस्थिति की जो भयवहता विदर्भ में पसरी है उसका विस्तार अब बुंदेलखण्ड में पसर रहा है। कृषि ऋण माफी और ऋण राहत योजनाओं के तमाम राहत पैकेजों की व्यवस्था के बावजूद अक्टूबर 2008 में पॉच किसानों ने खेती के अभिशाप से मुक्ति के लिए मौत का फंदा गले में डालकर स्थायी राहत पाई। >प्रमोद भार्गव


राजनीति के रणक्षेत्र में
शब्दबाणों का युध्द-कौशल

युग परिवर्तन के साथ ही युध्द-तकनीकों में भी समय-समय पर बदलाव आते जा रहे हैं। महाभारत और राम-रावण युध्द के समय दोनों दलों की सेनाओं की लड़ाई में जिस तरह का युध्द कौशल वर्णित है,उसमें सेनायें आमने-सामने होकर अपने-अपने वीरों की कलाओं का प्रदर्शन >राजेन्द्र जोशी


अंधविश्वास की कुरीतियों की बलिवेदी पर
स्त्री की आहुति कब तक ?

इक्कीसवीं सदी में क़दम रखने और भूमण्डलीकरण से प्रभावित होने के बावजूद भारतीय समाज में प्राचीन काल से चले आ रहे अंधाविश्वास और रूढ़ियां आज भी व्याप्त हैं। दु:ख की बात यह है कि इन तमाम अंधविश्वासों और कुरीतियों का दुष्परिणाम स्त्री जाति को भुगतना पड़ रहा है। >डॉ. गीता गुप्त


अभियान और पोलियो की सार्थकता

हाल ही में उजागर हुए ताज़ा आंकड़े पल्स पोलियो अभियान के क्रियान्वयन को देश के कई राज्यों में यथानुसार बनाए रखने को मज़बूर करते हैं जबकि योजना के हिसाब से इस अभियान को वर्ष 2000 में समाप्त हो जाना था। ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार देश के राज्य उत्तरप्रदेश सहित >शब्बीर कादरी


''मधुमेह-अगले दशक में महामारी बनने की आशंका''

अनेक नई खोजों ने मधुमेह या डाइबिटीज के इलाज को बेहतर बना दिया है, लेकिन इसके बावजूद भी दुनिया में मधुमेह के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। बच्चे, जवान, प्रौढ़, बूढ़े, स्त्री व पुरुष सभी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह रोग जिस तेजी से फैल रहा है, उससे लगता है >स्वाति शर्मा


बाजार पर नियंत्रण से पहुंचेगी आम आदमी तक रोट

इस वर्ष सितम्बर माह में मंहगाई की दर सर्वाधिक ऊँचाई पर थी। फिर केंद्र सरकार के प्रयासों एवं उत्पादन वृध्दि तथा वैश्विक स्थितियों के हिसाब से इसमें गिरावट आना प्रारंभ हुआ और वर्तमान में यह लगभग 7 फीसदी के स्तर पर आ गई है जो कि सितंबर माह के स्तर से >डॉ. सुनील शर्मा


मनाते चलो
रिटायरमेंट डे आयोजन

हम भारतवासी भी कितने मस्त लोग हैं। रोजाना कोई न कोई डे मनाते ही रहते हैं। हमारे यहां जन्मदिन या पुण्यतिथि मनाने की बड़ी पुरानी परंपरा है। रामनवमी और जन्माष्टमी तो हमारे पूज्य भगवान राम तथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म दिनों के रूप में सारे भारत में बड़ी धूमधाम >डॉ. देवप्रकाश खन्ना


29दिसम्बर2008

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