संस्करण: 28  मई-2012

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मनमोहन सरकार के

आठ वर्ष और मुसलमान

           ज यूपीए सरकार के सत्तारूढ़ होने की तीसरी वर्षगांठ है अर्थात मनमोहन सिंह सरकार की सत्ता के दूसरे कार्यकाल ने तीन वर्ष पूर्ण कर लिये हैं। यदि टीवी और समाचार पत्रों की दृष्टि से सरकार के इन तीन वर्षों की कार्यप्रणाली पर दृष्टिपात करें तो इस सरकार ने भ्रष्टाचार के अतिरिक्त कुछ किया ही नहीं क्योंकि यूपीए सरकार को सत्ता ने दूसरा वर्ष बीता ही था कि कामनवेल्थ गेम्स के विरूध्द शोर मचा और सुरेश कलमाडी जेल पहुँच गए। इसके साथ टू जी स्पेक्ट्रम नीलामी में भ्रष्टाचार का शोर मचा और ए राजा जैसे मंत्री और डीएमके के अध्यक्ष करूणानिधि की बेटी कनिमोझी सलाखों के पीछे नजर आए।

  ? हम समवेत


सत्यमेव जयते

सम्वेदनात्मक ज्ञान की भेदक क्षमता और

मीडिया के सदुपयोग का उदाहरण

        यप्रकाश आन्दोलन और इमरजैंसी के दौरान अपनी गजलों के माधयम से पूरे समाज को झकझोर देने वाले शायर दुष्यंत कुमार का एक शेर है-

वे मुतमईन हैं पत्थर पिघल नहीं सकता

मैं बेकरार हूं आवाज में असर के लिए

               आमिर खान द्वारा तैयार कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' ने एक बार फिर दूरदर्शन को, बुनियाद,हमलोग, महाभारत, भारत एक खोज, तमस, आदि सीरियलों के उस दौर में पहुँचा दिया है जहाँ सम्वेदना के साथ ज्ञान का समन्वय करके देश के बड़े मध्यम वर्ग तक समाज को सार्थक दिशा में बदलने का सन्देश दिया जाता रहा है।

? वीरेन्द्र जैन


एसआईटी रिपोर्ट और इंसाफ की हत्या

    गुजरात 2002 में हुए मुस्लिम विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी टीम की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट के एमिकस क्यूरे (न्यायालय के मित्र)राजू राम चन्द्रन की टिप्पणियों के बाद नरेन्द्र मोदी पर कानून का शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। लेकिन इस पूरे प्रकरण से जिस तरह एसआईटी की निष्पक्षता और उसके मोदी प्रेम पर सवाल उठे हैं उससे न्यायिक प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठ गए हैं। जिसके चलते इन दंगों में मोदी की भूमिका के बजाय खुद एसआईटी और उसके मुखिया पूर्व सीबीआई प्रमुख आरके राघवन विवादों में फंस गए हैं।

? राजीव कुमार यादव


भाजपा राज में फैलता

भ्रष्टाचार

          ध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार अमरबेल की तरह फैलता जा रहा है। आयकर विभाग और लोकायुक्त के छापों में सरकारी कारिंदों से करोड़ों की अवैध कमाई बरामद हो रही है। इससे यह साफ हो गया है कि सरकारी अमला सरकार की ही योजनाओं को पलीता लगाने में जुटा है, जिनके आगे सरकार बेबस नजर आ रही है। हाल ही में स्वास्थ्य संचालक एएन मित्तल और लिपिक जीपी किरार के आवास पर लोकायुक्त छापे में सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। इनके यहां से 48 लाख रुपए केस, लाखों रुपए के जेवरात और 70 करोड़ रुपए से ज्यादा की जमीन के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है।

? महेश बाग़ी


नरभक्षी डॉक्टर

         ध्यप्रदेश के स्वास्थ्य संचालक डॉ. ए. एन. मित्तल पर लोकायुक्त के छापे और भ्रष्ट आचरण के कारण उनके निलंबन के बाद पुन: यह तथ्य उभर कर आया है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र से काला धन कमाने की असीमित संभावनाएं हैं। वैसे डॉ. मित्तल स्वास्थ्य विभाग के पहले संचालक नहीं हैं जो भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाये गये हैं। इसके पूर्व दो और संचालक भ्रष्ट आचरण के आरोप में निलंबित हो चुके है। ये पूर्व संचालक हैं डॉ. अशोक शर्मा और डॉ. योगीराज शर्मा। मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार इन तीनों पूर्व स्वास्थ्य संचालकों को बिना कोई मुकदमा चलाये गोली से मार देना चाहिए क्योंकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करते हुए काला धन आम आदमी की जान की कीमत पर ही कमाया जा सकता है। 

 ? एल.एस.हरदेनिया


भ्रष्ट व्यवस्था, बीमार अस्पताल

           भूख, भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का दावा कर मधयप्रदेश में सत्ता हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी के राज में न तो भूख,कुपोषण से होने वाली मौत पर रोक लग पाई, न खुलेआम गुण्डागर्दी कर नागरिको को भयभीत करने की घटनाओं की सख्त रोकथाम हो सकी । भ्रष्टाचार का हाल यह है कि ज्यादातर सरकारी कार्यालय रिश्वतखोरी,घपले घोटाले के लिए बदनाम हैं जहॉ बिना रूपये दिये कोई काम नही होता। अफसर ,बाबू,चपरासी से लेकर रूपयों का लेन देन बडे बडे नेताओं तक हो रहा है। सरकारी अफसरों कर्मचारियों के घर में नोट के बण्डल भरे पडे है। पलगं,बिस्तर,तकिये ,तक में नोट की गडडियॉ मिल रही है।  

? अमिताभ पाण्डेय


पद का लोभी पार्टी ढाए

       त्रेतायुग के सत्य-असत्य के बीच चल रहे युध्द के बीच लंका में जो राजनीतिक द्वंद्व चला था उसमें हमें एक जुमला मिला था 'घर का भेदी लंका ढाए।'इसे यदि बदलना चाहें तो भाजपा के आंतरिक कलह को देखकर कुछ यूं बदल सकते हैं 'पद का लोभी पार्टी ढाए।'भाजपा शासित कोई राय ऐसा नहीं है जहां पार्टी के भीतर पद को लेकर कलह न चल रही हो। मजेदार बात तो यह है कि जहां पार्टी विपक्ष में है वहां भी 'अबकी बारी मेरी बारी' के लिए जंग छिड़ी हुई है। खुद दिल्ली की राजनीति कर रहे नेता भी इस बीमारी से पीड़ित हैं। पद की लालच में डूबे राजस्थान, कर्नाटक और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी की न केवल जड़ें काटने में जुटे हैं बल्कि सरेआम रुसवाई भी करवा रहे हैं।

? विवेकानंद


संदर्भ -आई.पी.एल.

सचिन को न खेलने की सलाह देना, हास्यास्पद

      विश्व के नक्े में भारत ही एक ऐसा दे है जहां बिन मांगे कोई चीज मिलती है तो वह है सलाह। सलाह एक ऐसी चीज़ है जिसे कोई भी, कभी भी कहीं भी और बिना मांगे किसी को भी सहज ही मिल जाती है। कभी-कभी तो सलाह देने वाला यह भी नहीं सोचता है कि वह किसे, क्यों और काहे के लिए बिना मांगे सलाह दिए चला जा रहा है। कुछ लोग सलाह देने को अपना पैतक अधिकार मान बैठते हैं। परिवार में,समाज में और सामाजिक ढांचे में सलाहों का आदान-प्रदान कई बार आव्यक ही नहीं अनिवार्य भी हो जाता है। किंतु किसी एक क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति यदि किसी अन्य क्षेत्र के व्यक्तियों को सलाह देने के लिए आगे आता है तो वह यह भूल जाता है कि..........

? राजेन्द्र जोशी


''न्यूक्लियर विंटर'' का खतरा कितनी दूर

        क्या विश्व की वर्तमान परिस्थिति किसी परमाणु युध्द की कगार पर है, हाल ही में एक शोध के आधार पर कहा गया है कि ऐसा होने की संभावनाऐं शून्य नहीं हैं; धरती पर संकट के जो भी बादल मंडरा रहे हैं उसके यूं तो अनेक कारण हो सकते हैं पर प्रमुख रूप से तीन कारणों की पहचान की गई है। पहला ग्लेियर का पिघलकर समुद्रतल में बढ़ोतरी करना,दूसरा ओजोन लेयर का छिद्रग्रस्त होकर बढ़ते जाना और तीसरा परमाणु युध्द की परिस्थिति में निर्मित होने वाला वातावरण। आईये इन बिंदुओं की गहराई में जाकर जानें की धरती संकट में क्यों है?

? शब्बीर कादरी


दूध के अनावश्यक इस्तेमाल से पशु-हिंसा व अपराध

    दिल्ली में दूध की सरकारी कीमत फिलहाल 40 रु. प्रति लीटर हो गयी है, तब भी यह सबके लिए उपलब्ध नहीं है। आवश्यकता अधिक और उपलब्धता कम होने पर वस्तु के दाम बढ़ जाते हैं और उसकी आपूर्ति में कृत्रिम व नकली उत्पाद आने लगते हैं। दूध के साथ भी अर्थशास्त्र का यह साधारण और सार्वभौम सिध्दांत काम करता है। यही कारण है कि आज देश में जितना प्राकृतिक दूध उपलब्ध है उससे कहीं ज्यादा नकली या कृत्रिम यानी सिंथेटिक दूध प्रयोग में लाया जा रहा है। इस बेहद खतरनाक सिंथेटिक या रासायनिक दूध को रोक पाने में हमारा प्रशासनिक तंत्र इसलिए अक्षम है क्योंकि यह खुद इस धंधे में शामिल है।

 

? सुनील अमर


शिक्षा : आगे रहते हुए फिर पीछे क्यों छूटती हैं लड़कियां

     शिक्षाजगत से जुडी दो खबरे एक साथ एक ही दिन आई। दसवी और बारहवी परीक्षाफल में फिर लडकियां आगे रहीं। यहां लड़कियां न केवल टॉपर्स रही है बल्कि सफल होनेवाली लडकियों की संख्या भी अधिक है। दूसरी खबर आई कि आई. आई. टी. में लड़कियों का प्रतिशत 10 और आई.आई.एम. में 20 प्रतिशत है। देशभर के 15 आइ.आइ.टी. में 13,196 छात्रों में लडकियों का अनुपात 10 प्रतिशत है। ऐसे प्रोफेशनल पाठयक्रमों में लड़कियों की कम संख्या अब चिन्ता का विषय बना है क्योंकि कम्पनियों के बोर्ड मेम्बर्स में कुछ महिलाओं को रखने की सिफारिश कुछ समय पहले सरकार ने की थी।

? अंजलि सिन्हा


महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी है-वित्तीय साक्षरता

    माम विरोधाभास के बावजूद हमारे देश में एक ओर तो यह सच है कि महिलाएॅ परिवार की धुरी होती हैं तथा भले ही कमाई पुरूष वर्ग करता है लेकिन खर्च का हिसाब महिलाएॅ ही तय करती है। परिवार में कौन सा सामान जरूरी है ? लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि अगर महिलाएॅ नौकरी पेशा और कमाउ हैं तब भी उनकी आय का सारा हिसाब पुरूष ही रखते है। महिलाएॅ अपनी सारी कमाई अपने पति के हाथों में सौंप देती है, एटीएम के युग में पत्नियों के एटीएम कार्ड का पासवर्ड भी सिर्फ पति महोदय को ज्ञात रहता है। 

? डॉ. सुनील शर्मा


मीडिया से गायब महिलाएं

     जो लोग टीवी चैनलों के जरिये सूचनाएं लेने के आदती होंगे उन्हें यह स्वाभाविक भ्रम हो सकता है कि मीडिया में महिलाएं ज्यादा हैं। टीवी चैनलों पर दिन-रात महिला एंकर सजधज कर खबरें पढ़ती दिखती हैं। मीडिया के इसी ग्लैमर के चक्कर में ढेर सारी लड़कियां मीडिया की पढ़ाई की तरफ खिंची चली आती हैं। लेकिन क्या वास्तव में टीवी के जरिये दिखने वाली मीडिया की यह हकीकत सही है इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। एक सर्वे के जरिये हमने यही देखने की कोशिश की कि क्या वास्तव में मीडिया में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उनके अनुपात में सही है? इस सर्वे के जो नतीजे आए वो बेहद शर्मनाक हैं।

? पूर्णिमा उरांव


कैसे सुधरे रूपए की सेहत

 

    डॉलर के मुकाबले रुपए की तबीयत जिस तरह से नासाज होती जा रही है उसे देखकर बिल्कुल नहीं लगता कि हालात जल्द सुधरेंगे। पिछले तीन दिनों में ही रुपया अपने निमस्तरपर पहुंच गया है। रुपए की इस गिरावट की वजह वैश्विक भी है और राष्ट्रीय भी। आर्थिक स्तर पर इतने बड़े बदलाव वैसे भी किसी एक वजह से नहीं आ सकते। 

 

? नीरज नैयर


  28 मई2012

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