संस्करण: 28 जुलाई - 2014

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आईसीएचआर के अध्यक्ष का 'इतिहास बोध'

     यी सरकार आने के बाद अकादमी क्षेत्र में सबसे त्वरित और केन्द्रीत हमला इतिहास पर हुआ है क्योंकि शासक और विजेता इतिहास को तलवार-बंदूक से अधिक कारगर हथियार मानते हैं। किसी भी समाज की मानसिकता बदल देने में इतिहास की बहुत बड़ी भूमिका होती है, इसलिए हर शासक अपने अनुकूल इतिहास लिखवाने की कोशिश करता है। मोदी सरकार ने रणनीति के तहत इसकी शुरूआत कर दी है।         

? अनिल यादव


बीजेपी में जीहुजूरी करने वालों की जय जय

संघ की कोशिश पकड़ भी बने रहे और मलाई भी मिलती रहे

        राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भले ही बार-बार यह दोहराए कि उसका बीजेपी में कोई दखल नहीं है, लेकिन असलियत हर बार सामने आ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही है। न न करते धार में संघ के अचानक लिए गए एक फैसले ने साफ कर दिया कि अब आरएसएस वालों के अच्छे दिन आ गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने दो नेताओं राम माधव और शिव प्रकाश को भाजपा में शामिल कराकर न केवल इसका सबूत दिया बल्कि यह भी प्रमाणित कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर भाजपा पर से अपना प्रभुत्व कम नहीं होना देना चाहती।

?

विवेकानंद


अपराध के ऑंकड़े, राजनीति का हिसाब और अनियंत्रित वाणी

     ड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या किसी भी तरह की दूसरी घटनाओं में मरने वालों से अधिक है और इसके लिए केवल ट्रैफिक विभाग में चल रही अवैध वसूली ही नहीं अपितु राज्यों में सत्तारूढ दल भी बराबर से जिम्मेवार होते हैं क्योंकि व्यावसायिक वाहनों की नियमित वसूली का तय हिस्सा अधिकांश सत्तारूढ दलों के पदेश कार्यालय तक पहुँचता है जिससे कार्यालय संचालित होता है। यह वसूली सुचारु ट्रैफिक के लिए बनाये गये नियमों और करों के भुगतान में उल्लंघन के प्रति ऑंखें मूँद लेने से ही सम्भव होती है।

 ? वीरेन्द्र जैन


लोकतंत्र के लिए खतरनाक है यह आकर्षण

      भी कुछ दिन पहले की बात है, मुंबई के उप नगरीय इलाके कल्याण से कथित तौर पर चार मुस्लिम लड़को के इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एण्ड सीरिया यानी आईएसआईएस की ओर से ईराकी सेना के खिलाफ, ईराक में लड़ने के लिए घर से भाग जाने की खबरें अखबारों में छपीं। आरिफ एजाज माजिद, शाहीन फारूकी, फहद तनवीर शेख, अमन नईम टंडेल जिनकी उम्र पच्चीस वर्ष से ज्यादा नहीं थी, अपने परिवारों को सूचित किए बिना ही घर छोड़ कर इराक में आईएसआईएस द्वारा लड़ी जा रही जंग में मदद के लिए चले गए।

? हरे राम मिश्र


अल्पसंख्यक कल्याण :

कहां तक पहुंचा है कारवां ?

            ल्पसंख्यक कल्याण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का हाल पिछले दिनों संसद के सामने पेश हुआ। पता चला कि इस सिलसिले में आठ साल पहले शुरू की गयी प्रधानमंत्री की 15 सूत्रीय योजना के कई बिन्दुओं पर अभी काम भी नहीं शुरू हो सका है। इतना ही नहीं बल्कि कई राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में इसके लाभार्थियों की संख्या शून्य है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम की ओर से इन योजनाओं के लिए आवंटित किए गए धन के आंकड़ों को आधार बना कर इस सम्बन्ध में सदन में जानकारी प्रस्तुत की गयी। 

 ?  सुभाष गाताडे


शरियत पर अदालत का फैसला-

सुधार की दिशा में बड़ा एक कदम

           2005 की बात है 28 वर्षीय इमराना के साथ उसके ससुर ने बलात्कार किया, जब यह मामला शरियत अदालत के पास पहुंचा तो उन्होंने फतवा जारी करते हुए कहा,चूंकि इमराना के ससुर ने उससे शारीरिक संबंध स्थापित कर लिए हैं,लिहाजा वह ससुर को अपना पति माने और पति को पुत्र। शरीयत अदालतों द्वारा दिए गये अनाप दृशनाप फैसलों का यह महज एक उदाहरण है।

? जावेद अनीस


विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने वाला

एक खतरनाक कदम

      ध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में एक ऐसा विधेयक पारित किया है, यदि वह कानून का रूप ले लेता है तो उससे मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों की स्वायक्तता पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने वे सारी शक्तियां जिनके कारण विश्वविद्यालय स्वायक्त होते हैं स्वयं में निहित कर ली हैं।

?  एल. एस. हरदेनिया


गंगा के

विनाश की तैयारी

     सरकार ने गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में पहल करनी शुरु कर दी है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने प्रदूषण फैलाने वाली करीब 48 कारखानों को बंद करने का आदेश दिया है। गंगा नदी के इस मामले में ही पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरूध्दार राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने बताया कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने 764 ऐसी इंडस्ट्रीयल यूनिट्स की पहचान की है, जो......

? डॉ. महेश परिमल


अच्छे दिन आने एवम् सुशासन के नाम पर

जन मानस से छलावा

        भारत की जनता ने नरेन्द्र मोदी को अच्छे दिन लाने,सुशासन देने के लोक लुभावन वायदे के आधार पर चुना है। देश के मात्र 31प्रतिशत मतदाताओं के मत से यह सरकार बनी है। विगत दो माह में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने ऐसा कोई ठोस निर्णय लेने का प्रयास नहीं किया है जिससे आम मतदाताओं के मन में इस आशा का संचार हो कि अच्छे दिन आने बाले हैं।

? विजय कुमार जैन


कथित विकास पर सवाल

      पिछले दिनों सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बेहद गरीब लोगों में से एक तिहाई भारत में रहते हैं तथा यहां पांच साल से कम उम्र में मौत के मामले सबसे अधिक होते हैं। इस रिपोर्ट ने देश के कथित विकास पर बड़े सवाल खड़े कर दिए है। वास्तव में इस देश में विकास कौन कर रहा है? अमीर और अमीर होते जा रहें है जबकि मंहगाई ने तो गरीब की कमर ही तोड़ दी है। महगांई लगातार बढ़ती जा रही है जिसकी वजह से उसके लिए दो वक्त की रोती का इंतजाम करना मुश्किल होता जा रहा है।

? शशांक द्विवेदी


यह संवेदनशीलता है या

प्रहसन!

        से चालबाजी कहें या संवेदनशीलता? सवाल कठिन है। इसे नए दौर का बाजारु उपभोक्तावाद नाम देकर हल्के में भी तो नहीं लिया जा सकता। लखनऊ के बाहरी इलाके में बर्बर बलात्कार कांड के बाद पीड़ित महिला की खून से लथपथ निर्वस्त्र लाश की तस्वीर सोशल मीडिया पर जिस तरह प्रसारित हुई उस पर सवाल खड़ा होता है। क्या यह तस्वीर इसलिए प्रसारित की गई कि........                    

? वरुण शैलेश


साहित्य सिर्फ साहित्य और साहित्यकार सिर्फ साहित्यकार होता है

      हाल में नोबेल पुरस्कार विजेती दक्षिण अफ्रीकी साहित्यकार नादिन गोर्दिमेर का देहान्त हो गया। दक्षिण अफ्रीका के रंगभेदी शासन के खिलाफ न केवल अपने साहित्य के जरिए बल्कि अन्य सक्रियताओं के जरिए विरोध करनेवाली नादिन के बारे में यह बात मशहूर है कि उन्होंने लेखिकाओं के लिए आरक्षित पुरस्कार से अपना एक उपन्यास वापस ले लिया था। उनका कहना था कि मैं नहीं सोचती कि किसी लेखक के साहित्य को परखने के लिए इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि वह स्त्री है या पुरूष।

? अंजलि सिन्हा


'प्रयत्न' जैसी संस्थाएं संवार सकती हैं निर्धन बच्चों की तक़दीर

        ले ही भारत में चौदह वर्ष तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू हो, मगर अभी भी लाखों बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। रोज़ी-रोटी की तलाश में गांव से शहर की ओर प्रस्थान करने वाले श्रमिक परिवारों के ऐसे बच्चे हमें अपने आसपास ही देखने को मिल जाते हैं, जिन्हें विद्यालय तक पहुंचाने की नितान्त आवश्यकता है।                    

? डॉ. गीता गुप्त


  28 जुलाई - 2014

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