संस्करण: 28जुलाई-2008

अंधविश्वास के यज्ञ में जन-धन की आहूति

डॉ. दर्शना सिंह

भारत सदियों तक अंधविश्वासों की जंजीरों में कैद रहा हैं, जिससे मुक्त होने के लिए हमें लंबा संघर्ष करना पड़ा हैं। इसके बावजूद अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले आज भी है। इसी के चलते कभी देवी प्रतिभा के आगे जीभ चढ़ाने तो कभी बच्चों की बलि देने के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों को अक्सर यह कहकर खारिज कर दिया जाता हैं कि वे लोग अशिक्षित और गंवार थे, लेकिन जब शिक्षित और प्रगतिशील होने का दंभ भरने वाले ही अंधविश्वास को बढ़ावा देते नज़र आएं तो इसे क्या कहा जाए ? मामला उस वक्त और गंभीर हो जाता हैं जब ऐसे अंधविश्वास में कोई सरकार ही लिप्त नज़र आए। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने हाल ही में अपने अंधविश्वासी होने का प्रमाण देते हुए इस सामाजिक अपराधा के नाम पर शासकीय खजाना भी बर्बाद कर डाला। मामला राज्य सरकार द्वारा कराये गए सोम यज्ञ का है। सरकार दावा कर रही हैं कि इस यज्ञ के कारण ही प्रदेश में मानसून समय से पहले आया हैं और प्रदेश में अच्छी बारिश हो रही हैं।

 

बताया जाता हैं कि सरकार ने सोम यज्ञ के पन्द्रह आयोजनों पर सरकारी खजाने से लगभग सवा करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आज के वैज्ञानिक युग में, जबकि मौसम के पूर्वानुमान को लेकर तमाम अनुसंधान आज भी अधूरे हैं और यह दावा नहीं किया जा सकता कि बारिश कब होगी या होगी कि नहीं। ऐसे में अगर सरकार यज्ञों के जरिये अच्छी बारिश के दावे करे तो ऐसी सरकार की अवैज्ञानिक बुध्दि पर तरस ही किया जा सकता हैं। आज के वैज्ञानिक युग में यज्ञों से पानी बरसाने की अवैज्ञानिक धारणा पर शायद ही किसी को विश्वास हो खुद सरकार भी इस तथ्य से भली-भांति परिचित भी हैं। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बड़ी बेशर्मी से यह कह रहे हैं कि जन आलोचना से बचने के लिए सोमयज्ञ आयोजनों का प्रचार-प्रसार नहीं होने दिया गया था। अब जबकि इस साल मानसून समय से कुछ पहले आ गया हैं तो सरकार इसे भी अपनी उपलब्धियों में शुमार कर यह दावा कर रही हैं कि यह सब उसके द्वारा कराये गये सीमायज्ञों का ही प्रतिफल हैं अगर थोड़ी देर के लिए सरकार के इस दावे पर यकीन कर भी लिया जाए तो यह प्रश्न उछता है कि सरकार द्वारा कराए गए सोमयज्ञों के कारण मानसून समय पूर्व आया हैं तो इस मानसून ने राजधानी भोपाल सहित मालवा और निमाड़ पर अपनी मेहरबानी क्यों नहीं दिखाई ? यदि सरकार का यह दावा सही हैं तो सोमयज्ञ करवाने से अच्छी बारिश होती हैं तो लगातार चार साल से सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखण्ड में ये यज्ञ क्यों नहीं कराए गए ? वहाँ पड़े भारी सूखे, फसलों की बर्बादी और हजारों-लाखों लोगों के पलायन के लिए क्या भाजपा सरकार जिम्मेदार नहीं हैं ? यदि शिवराज सरकार द्वारा कराए गए यज्ञों से अच्छी बारिश हो रही हैं तो उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बगैर यज्ञ कराए पानी झमाझम क्यों बरस रहा है ?

 

स्व. इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व काल में जब पहला परमाणु परीक्षण किया गया था, तब भाजपा के पूर्ववर्ती दल जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उसका दिल, खोलकर स्वागत किया था, क्योंकि जनसंघ तथा संघ द्वारा लंबे अरसे से यह मांग की जा रही थी कि देश की सुरक्षा और विकास के लिए परमाणु संयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए। स्व. श्रीमती गांधी के इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हुए तत्कालीन जनसंघ के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने श्रीमती गांधी को ''दुर्गा का अवतार'' विशेषण से नवाजा था। यह उनकी और संघ जनसंघ की प्रगतिशीलता का उदाहरण था खुद जब वाजपेयी केन्द्रीय सत्ता में आए तो उन्होंने पोखरण में परमाणु परीक्षण करवाया स्व. राजीव गांधी के कार्यकाल में जब देश में संचार क्रान्ति का सूत्रपात हुआ और कम्प्यूटर, मोबाईल सेवाओं का विस्तार हुआ तो भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार भी स्व. राजीव जी के नक्शे कदम पर चली, लेकिन इसी के साथ भाजपा का अघोषित एजेंडा भी परवान चढ़ता रहा। आज यदि शिवराज सिंह यह कह रहे हैं कि वराहमिहिर ने सोमयज्ञ का सिध्दान्त प्रतिपादित किया था और उनकी सरकार ने इस पर चल कर कोई अपराध नहीं किया हैं, तो इसे भी भाजपा के छुपे हुए एजेण्डा में ही शरीक किया जाना चाहिए।

 

गौरतलब है कि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने जब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) के पाठयक्रम में बदलाव कर आर्यभट्ट की हटाकर वराहमिहिर को स्थान दिया था, तब भी उसकी वैज्ञानिकता पर सवाल खड़े किए गए थे। पश्चिम के महानतम खगोल विज्ञानी कोपरनिकस से बहुत पहले आर्यभट्ट ने यह सिध्दांत प्रतिपादित किया था कि पृथ्वी से पश्चिम की ओर भ्रमण करती हैं। भारतीय संस्कृति में प्रचलित पंच तत्वो पर भी आर्यभट्ट ने यह व्यवस्था दी थी कि पांचवा तत्व आकाश कुछ नहीं, सिर्फ रिक्त स्थान मात्र हैं जाहिर हैं कि आर्य भट्टर के इस सिध्दान्त से संस्कृति के ठेकेदारों की कथित भावना को आघात लगा था, क्योंकि वे अब तक पंचतत्व के सिध्दांत का बखान कर अपनी रोजी-रोटी चलाते आ रहे थे। ईसाई धर्म की मान्यता भी थी कि पृथ्वी घूमती नहीं हैं। और नही सूर्य का चक्कर लगाती हैं, बल्कि सूर्य ही पृथ्वी का चक्कर लगाता हैं। ईसाइयों ने इस सिध्दांत का विरोध  कर वैज्ञानिक सिध्दान्त प्रतिपादित करने वाले कोपरनिकस को जिन्दा जलवा डाला था। इसी तरह पंडें-पुरोहित की दुकानदारी पर हमले करने के कारण आर्य भट्ट हमेशा ही उनके निशाने पर रहे। इस वर्ग को अपने खेमे में करने की गरज से ही भाजपा नीत सरकार ने आर्य भट्ट द्वारा प्रतिपादित सिध्दांत पाठयक्रम से हटवाऐ थे। दरअसल, भाजपा की दिक्कत यह हैं कि वह किसी भी व्यवस्था के सिर्फ उन अंशों को ही आत्मसात करती हैं, जिनमें उसे अपना हित नज़र आता है। सनातन धर्म में जिन महर्षि मनु को संसार का पहला पुरुष माना जाता हैं और उनके नाम पर स्थापित जिस मनुवाद की भाजपा दुहाई देती आई हैं, वे ही मनु आडंबर तथा ढोंग के प्रखर विरोधी थें। उन्होंने ज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, गृह, नक्षत्र आदि संबंधी भ्रांत धारणाओं का भी खण्डन किया था, लेकिन भाजपायी ऐसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को छुपाने में ही अपना हित देखते हैं और वही बाते उजागर करते हैं, जिसमें उन्हें अपनी राजनीतिक रोटी फूलती दिखाई देती हैं। इसलिये शिवराज सिंह यदि सोमयज्ञों के जरिए अच्छे मानसून का दावा कर रहे हैं तो समझ लेना चाहिए कि इसका लक्ष्य चुनावी फसल काटना हैं। सड़क, पानी, बिजली, जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर उनकी पार्टी ने जो वादे किए थे, उन्हें तो पूरा नहीं किया जा सका। इसलिए अंधविश्वास की फसल खड़ी कर उसका राजनीतिक दोहन करने की कोशिश की जा रही हैं। सोमयज्ञ इसका ज्वलंत उदाहरण है, जो भाजपा की अवैज्ञानिक सोच को तो जाहिर करता हैं, साथ ही यह भी इसके लिए जन-धन की बर्बाद करने में भी पीछे नहीं रहना चाहती है।

 

डॉ. दर्शना सिंह