संस्करण: 28 जनवरी-2013

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जयपुर में राहुल का ऐतिहासिक भाषण

जहर पीकर अमृत बांटने की पहल

       यपुर चिंतन शिविर में कांग्रेस उपाध्यक्ष पद के रूप में राहुल गांधी की ताजपोशी और उसके बाद उनका ऐतिहासिक भाषण राजनीतिक दलों को चिंता में डालने वाला है। राजनीतिक सुधारों के लिए राहुल गांधी की व्याकुलता, राष्ट्र निर्माण से पूर्व निकलने वाले विरोध के जहर को खुद पीने और उसके बाद साफ सुथरे प्रशासन और सत्ता की ताकत को देश के अंतिम छोर तक पहुंचाने की उनकी दृढ़ इच्छा ने राजनीतिक दलों के भीतर दहशत पैदा कर दी।

?    विवेकानंद


संघ परिवार की राजनीतिक

संस्कृति के खतरे

       वे खुद भी मानते हैं कि उनका सच कमजोर है इसलिए पहले एक झूठ गढते हैं और फिर अपने हजारों मुखों से उस झूठ को लिजलिजी भावुकता से सराबोर कर इतना प्रचार करते हैं कि शोर और भावना के ज्वार में सत्य के अनुसंधान का विवेक खो जाता है। ऐसा वे एक बार नहीं बार बार कर चुके हैं और अभी भी कर रहे हैं। खेद है कि अब तो उनके द्वारा रचे गये कथानक प्रायोजित मीडिया के सहारे देश भर के मुँह में समाने लगे हैं क्योंकि उनको उनके अब तक के झूठ और षड़यंत्रों की कोई सजा नहीं मिली उल्टे उन्हें इससे लगातार राजनीतिक सफलताएं मिलती रही हैं।

? वीरेन्द्र जैन


शिंदे के बयान पर इतना बवाल क्यों  ?

       हाल ही में जयपुर में संपन्न हुई अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि जांच में यह बात सामने आई है कि भाजपा तथा आरएसएस के प्रशिक्षण शिविरों में हिंदू आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, वे आतंकी प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं, समझौता एक्सप्रेस में बम रखते हैं,मक्का मस्जिद तथा मालेगांव में विस्फोकट करते हैं। हमें इस पर गंभीरता से सोचना होगा तथा सतर्क रहना होगा। शिंदे के इस बयान से आरएसएस तथा भाजपा इतने खफा हो गये  कि उनके इस्तीफे की मांग कर डाली। शिंदे भारत जैसे विशालतम देश के गृह मंत्री हैं, कोई गैर जिम्मेफदाराना वक्तव्य नहीं दे सकते।

? मोकर्रम खान


आर.एस.एस. के आपराधिक

इतिहास के कुछ और प्रमाण

         भारत में ब्रिटिश सरकार और आर.एस.एस. (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के बीच रिश्तों के पुख्ता सबूत ''ए लाइफ ऑफ अवर टाइम्स-द मेमोरी ऑफ राजेश्वर दयाल,आई.सी.एस.''में उपलब्ध है जो ओरिएन्ट लांगमेन द्वारा वर्ष 1998 में प्रकाशित की गई थी। अंग्रेजों द्वारा आर.एस.एस. को नगर और गाँवों के विस्तृत नक्शे दिये गये थे जिससे कि वे मुसलमानों पर हमले कर सकें।

? अखिलेश मित्तल


न नेहरू ने इन्दिरा को प्रधानमंत्री बनाया और न इन्दिरा ने राजीव को : फिर भी परिवारवाद का आरोप क्यों?

       वाहरलाल नेहरू और इन्दिरा गांधी दोनों पर यह आरोप लगता रहा है कि उन्होंने अपने परिवार के लोगों को ही अपना उत्तराधिकारी बनाने का प्रयास किया है। अब यही आरोप सोनिया गांधी पर भी लग रहा है। जवाहर लाल नेहरू 1946से भारत सरकार के सबसे प्रमुख पद पर रहे हैं। 1946में वे वायसराय की कार्यकारिणी के उपप्रमुख थे और उस हैसियत से उन्हें लगभग प्रधानमंत्री के अधिकार प्राप्त थे। 1947में 15अगस्त के बाद वे विधिवत् प्रधानमंत्री बने। 1952में लोकसभा का पहला चुनाव हुआ। उसके बाद वे प्रधानमंत्री बने और मृत्युपर्यन्त प्रधानमंत्री के पद पर रहे।

 ?   एल.एस.हरदेनिया


हर भारतीय की हुंकार

नापाकियों से लडाई

मानचित्र से मिटा दो उनका अस्तित्व

                  ढ़िया गांव का लाड़ला गौरव, विन्ध्य माटी के वीर सपूत शहीद लांस नायक सुधाकर सिंह बघेल की राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा टीवी न्यूज चैनल दिखा रहे हैं। अपने सपूत की एक झलक के लिए स्व नियत्रित भीड़,अपने धैर्य का परिचय दे रही है। अव्यवस्था से शहीद का अपमान होगा। सबकी आंखे नम है। किंतु गर्व से सर ऊंचा है। 

? मो. यूनुस


दुख भरे दिनों की याद में हृदय भर आना स्वाभाविक है राहुल गांधी का भावपूर्ण भाषण

      र्तमान दौर में जहां राजनीति की परिभाषा के अर्थ बदलते जा रहे हैं, वहां यदि कोई सहज और स्वाभाविक होकर अपने सरल अंदाज में अपने हृदय के भावों को खुलकर प्रस्तुत करने का साहस दिखाता है तो इन भावपूण लब्जों के ऐसे विचित्र मायने निकाले जाते हैं जिन्हें सुनकर हैरत होती है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जयपुर में आयोजित चिंतन सम्मेलन के दौरान नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी के उद्बोधन में उनके हृदय के भावों के प्रस्तुतिकरण में अपने परिवार के त्याग,बलिदान और अपने पूर्वजों की राष्ट्रीय सेवाओं का जिक्र किया गया तो पूरा का पूरा सभागार ही नहीं बल्कि टेलिविजन चेनलों पर चल रहे लाइव प्रसारण को देश के जो आम लोग देख-सुन रहे थे, वे भी कांग्रेस पार्टी के इस युवा नेता की प्रवाहमान भावगंगा के बहाव में तब तक बहते रहे जब तक राहुल गांधी मंच से उतरकर अपनी माता सोनिया जी से गले मिलते रहे।

? राजेन्द्र जोशी


व्यापक स्वास्थ्य सेवा-

वास्तविकता और भ्रम

      भी के लिए स्वास्थ्य के सन्दर्भ में अल्मा-आटा घोषणापत्र दुनिया में बड़े महत्व का है। सन 1978 में बने इस घोषणापत्र का साझीदार हमारा देश भी बना था जिसमें सन 2000 तक सभी के लिए स्वस्थ्य मुहैया कराने का वादा किया गया था। इस घोषणापत्र की खासियत इस मायने मैं ज्यादा है कि इसने प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती व विस्तारण की पुरजोर वकालत की थी। तब से अब तक तीन दशक बीत गए और अब ये आलम है कि हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाएं दुनिया में सबसे ज्यादा निजी क्षेत्र के कब्जे मैं हैं और स्वस्थ्य पर आम आदमी की अपनी जेब से होने वाला खर्च भी यहाँ सबसे ज्यादा है।

? राहुल शर्मा


बैंकों की उपेक्षा के शिकार छोटे किसान

        देश के छोटे किसानों की आर्थिक हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है, ऐसा एक ताजा सरकारी रपट में बताया गया है। सरकार द्वारा इस सिलसिले में किये जा रहे प्रयत्नों को राष्ट्रीयकृत बैंकों की वजह से वांछित सफलता नहीं मिल रही है और छोटे किसान मजबूरी में साहूकारों और सूदखोरों के चंगुल में फॅंस रहे हैं। यही वजह है कि किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं का दु:खद सिलसिला थम नहीं रहा है। देश में सबसे खराब स्थिति महाराष्ट्र की है जहॉ गत माह विधानमंडल में सरकार ने स्वीकार किया कि औसत चार किसान प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। कहने की जरुरत नहीं कि ये सब छोटे किसान ही होते हैं।

? सुनील अमर


स्कूली शिक्षा का गिरता स्तर : दोषी कौन?

       स्वयंसेवी संगठन प्रथम ने हाल ही में प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर जो रिपोर्ट जारी की है उसके अनुसार शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के तीन साल बाद भी प्राथमिक शिक्षा के स्तर में कोई परिवर्तन नजर नहीं आता हैं बल्कि साल दर साल स्थिति और भी बदतर होती जा रही है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि ग्र्रामीण विद्यालयों में कक्षा पॉच के विद्यार्थीं न तो गणित का साधारण सा जोड़-घटाना कर सकते हैं और न ही मात्र भाषा में लिख पढ़ पाते हैं। वैसे स्वयंसेवी संगठन प्रथम ने यह रिपोर्ट प्राथमिक विद्यालयों के संदर्भ में जारी की है लेकिन देश के ग्रामीण क्षेत्र के माध्यमिक स्कूलों के छात्रों की स्थिति भिन्न नहीं है।    

? डॉ. सुनील शर्मा


आर्मस्ट्रांग शिखर से शून्य तक

बिना घोड़ों के तबेले पर ताला लगाने से क्या होगा?

        फलता और शार्टकट के बीच कितना अंतर होता है। इसे साइकिलिस्ट आर्मस्ट्रांग के जीवन से समझा जा सकता है। आर्मस्ट्रांग को जुर्म कबूलने की वजह से कॅरियर के दौरान कमाई सारी जमा पूंजी लौटानी पड़ सकती है। प्रचार कंपनियां उनसे पैसा मांग सकती हैं। टेक्सास स्थित कंपनी एससीए प्रमोशन पहले ही आर्मस्ट्रांग को भुगतान की गई 1.2करोड़ डॉलर की राशि वापस मांग चुकी है। अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति ने आर्मस्ट्रांग से वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक का कांस्य पदक छीन लिया है।

? डॉ. महेश परिमल


बच्चे भूले विद्यालयों में पढ़ना

       रकार नि:शुल्क शिक्षा अधिकार क़ानून ने बच्चों को पढ़ने का अधिकार तो दिलवा दिया है पर क्या बच्चे सचमुच पढ़ रहे हैं ?यह प्रश्न बहुत प्रासंगिक है। इसलिए कि अशासकीय संगठन 'प्रथम'के वार्षिक सर्वेक्षण रपट 2012 में ग्रामीण ज़िलों के प्राथमिक स्तर की शिक्षा की जो स्थिति उजागर हुई है उससे स्पष्ट है कि कागज़ पर विद्यालयों में बच्चों की संख्या अवश्य बढ़ी है, परन्तु वे पढ़ाई से कोसों दूर हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एम. एम. पल्लम राजू द्वारा जारी यह रपट 567 ज़िलों के 16 हज़ार गांवों पर आधारित है।    

? डॉ. गीता गुप्त


  28 जनवरी-2013

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