संस्करण: 28 अप्रेल-2014

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''क्रोनी पूंजीवाद और फासीवाद के यार''

     16 वीं लोक सभा के चुनाव में बहुत सारी चीजें एक दम स्पष्ट हो गयी है। लोक सभा के चुनाव के बाद की स्थिति चाहे जो रहे परन्तु जिस तरह से भाजपा और कारपोरेट का गठबंधन जगजाहिर हुआ है, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए घातक ही होगा। जिस 'गुजरात विकास मॉडल' का जुमला मीडिया द्वारा उछाला जा रहा है- वह और कुछ नहीं बल्कि क्रोनी पूंजी (क्रोनी शब्द का अर्थ चमचा होता है पर यह ऐसी पूंजी को रेखांकित करता है, जो सत्ता के साथ मिलकर गलत तरीके से लाभ उठाती है।) और साम्प्रदायिकता का मिश्रण है।        

? अनिल यादव


उदार मुखौटे में हिन्दुत्व को ढंकने की कोशिश

        भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का कहना है कि वह किसी समुदाय विशेष से वोट मांगने की बात नहीं करेंगे। वह तो देश की 125 करोड़ जनता की एकजुटता में विश्वास रखते हैं। इसका एक मतलब यह होता है कि वह विभिन्न समुदायों में कोई भेद नहीं करते और दूसरा यह कि वह मुसमलमानों से वोट नहीं मांग सकते। उनके विश्वासपात्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा के चुनाव प्रभारी अमित शाह का कहना है कि चुनाव बाद उन लोगों से बदला लिया जाएगा जिन लोगों ने मुजफरनगर और आसपास के दंगा ग्रस्त क्षेत्रों में हिन्दुओं का अपमान किया है। 

? मसीहुददीन संजरी


सम्भावित सरकार को कौन चलायेगा?

     गोएबल्स ने गलत नहीं कहा था कि किसी झूठ को बार बार दुहराने पर लोग उसका भरोसा करने लगते हैं। चैनलों पर एक ही वस्तु के लगातार प्रसारित होते विज्ञापनों का सच भी यही होता है कि वे दिमाग में खुब जाते हैं और दुकान पर सम्बन्धित वस्तु लेने जाने पर वही ब्रांड नेम याद आ जाता है। किसी समय विज्ञापनों की अति के कारण ही वनस्पति घी का नाम डालडा हो गया था और डिटर्जेंट पाउडरों का नाम सर्फ हो गया था। इस आम चुनाव में मोदी के प्रचार के लिए अनुबन्धित अमेरिकी कम्पनी भी इसी तरकीब को अपना रही है और मोदी मोदी के नाम की इस तरह से चोट दी जा रही है कि किसी साधारण जन के ध्यान में अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों से ज्यादा मोदी का ही नाम याद रहता है।

 ? वीरेन्द्र जैन


बयान हैं या भविष्य का प्लान ?

      राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, नरेंद्र मोदी के खासमखास और इसरत जहां से लेकर तुलसी प्रजापति के फर्जी एनकांउटर में संदिग्ध गुजरात के पूर्व गृह मंत्री अमित शाह, बिहार बीजेपी के नेता गिरिराज सिंह, विश्व हिंदू परिषद जिसने नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने की सबसे पहले इलाहाबाद में संत सभा जोड़कर पहल की थी, के बेलगाम नेता प्रवीण तोगड़िया, क्या ये ऐसे लोग हैं जिनके बयानों को बस यूं ही बोली गई बात कह दिया जाए?

? विवेकानंद


तोगड़िया एवं गिरिराज की जहरीली टिप्पणियां बता रही हैं कि मोदी के राज में क्या होगा?

              डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया और बिहार भारतीय जनता पार्टी के एक प्रमुख नेता द्वारा की गई टिप्पणियों ने पुन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असली चेहरे को उजागर कर दिया है। डाक्टर प्रवीण तोगड़िया ने गुजरात के एक शहर के हिन्दू मोहल्ले में एक मुसलमान द्वारा मकान खरीदने पर सख्त ऐतराज जाहिर किया और उस क्षेत्र के हिन्दुओं से कहा कि वे मुसलमान द्वारा खरीदे जा रहे मकान पर कब्जा कर लें या उसमें आग लगा दें।

 ?  एल.एस.हरदेनिया


समान नागरिक संहिता का प्रश्न

           भाजपा ने अपने घोषणापत्र में फिर वादा किया है कि केन्द्र में उसकी सरकार बनी तो वह समान नागरिक संहिता लागू करेगा। सबसे पहले तो उससे यही पूछा जाना चाहिए कि यह वायदा तो उसने अपने पहले घोषणापत्र में भी किया था और जब उसकी सरकार बनी और छह साल तक चली थी तब उसने इसकी चर्चा तक नहीं की थी, इसकी वजह क्या थी ?

? अंजलि सिन्हा


निजी क्षेत्र में आरक्षण का सवाल :

      सोलहवीं लोकसभा के लिए आसन्न चुनावों के बीच निजी क्षेत्र में आरक्षण का मसला नए सिरे से मौजू हो उठा है। अगर पहले भारत की राजनीति की ग्रेण्ड ओल्ड पार्टी अर्थात कांग्रेस ने निजी क्षेत्र में आरक्षण प्रदान करने को लेकर अपनी प्रतिबध्दता दोहरायी है, तो पिछले दिनों जनता दल यू की तरफ से भी यही बात कही गयी है।

?  सुभाष गाताड़े


जैविक विविधता का सिमटता दायरा

     शकों तक दक्षिण बिहार के किसानों को कथित आधुनिक खेती की तकनीक अपनाये जाने की प्रेरणा दी जाती रही , पंरपरागत तकनीक और बीजों को  पिछड़ा और अलाभकर बतलाते हुए  छोड़ने की सलाह दी जाती रही । पईन , पोखर , आहर ,नाला की पंरपरागत व्यवस्था के बदले डीजल इंजन , पम्प सेट लगवाने पर जोर दिया जाता रहा। जैविक खेती के बदले रासायनिक खेती को प्रोत्साहित- प्रसारित किया जाता रहा और आज भी यह प्रक्रिया जारी है। किसान श्री से लेकर न जाने कितने प्रकार की उपाधियों  और इनामों से नवाजते हुए पीढ़ी दर पीढ़ी से प्रयुक्त होते रहे 

 

? देवेन्द्र कुमार


कृषि क्षेत्र पर बढ़ता दबाव

        सेवा क्षेत्र और उद्योग-धंधे के लगातार विस्तार एवं कृषि योग्य जमीन के घटने के बावजूद भी देश में कृषि पर निर्भरता बढ़ी है। यह खुलासा हाल ही में प्रकाशित वर्ल्ड वॉच संस्थान की रिपोर्ट से हुआ है, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 1980 से 2011 के दरम्यान भारत में कृषि में लगी आबादी में 50 फीसद का इजाफा हुआ है। हालांकि वैश्विक स्तर पर इस अवधि के दौरान कुल आबादी के हिस्से के रुप में कृषि आबादी कम हुई है।      

? अरविंद जयतिलक


मार्केज कोई देवदूत नहीं थे

     मार्केज, मार्खेज, मार्क्वेज स्पैनिश में जो भी उच्चारण रहा हो लेकिन यह निर्विवाद तथ्य है कि गैब्रिरियल गार्सिया मार्केज एक प्रतिष्ठित उपन्यासकार एवं कहानीकार थे। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का ऐतिहासिक बयान है-अगर दुबारा जन्म लेना पड़ा तो मैं गैबो की जिदगी जीना चाहूंगा। 17वीं सदी में मिग्यूएल दा कारवांतेस के बाद स्पैनिश भाषा के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक माने जाने वाले और कोलंबिया में पैदा हुए गार्सिया मार्केज ने विश्व साहित्य में वह दर्जा हासिल किया जो मार्क ट्वेन और चार्ल्स डिकन्स को हासिल है।

? शैलेन्द्र चौहान


वायु प्रदूषण से हर साल 7 लाख मौतें!

        विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में जो चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है, उससे हम सभी को सावधान हो जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर वर्ष वायु प्रदूषण से 7लाख मौतें हो रही हैं। वायु में घुले हुए खतरनाक रसायन हमारे शरीर में जहर का काम कर रहे हैं। इसके दूरगामी परिणाम निश्चित रूप से बहुत ही जल्द सामने आएंगे। इस दिशा में भले ही किसी ने न सोचा हो,पर विदेशी फिल्म निर्माताओं ने इस दिशा में सोचना शुरू कर दिया है। पिछले वर्ष एक फिल्म आई थी द आटर अर्थ ,हिदीं में इसे पृथ्वी का सर्वनाश के नाम से रिलीज किया गया।

? डॉ. महेश परिमल


फेसबुक हुआ प्राणघातक

      भारत में फेसबुक की लोकप्रियता जितनी तेज़ी से बढ़ी है उतनी ही तीव्रता से इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि संचार माध्यम लोगों के सोचने-समझने की शक्ति क्षीण कर उसे केवल क्षणजीवी बना रहे हैं। इसलिए उनमें हिंसा, प्रतिशोध एवं संवेदनहीनता बढ़ रही है। फलस्वरूप वे ऐसा आचरण कर रहे हैं जो परिवार और समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। पिछले दिनों फेसबुक पर कमेण्ट के कारण एक विद्यार्थी की हत्या की घटना प्रकाश में आई है।      

? डॉ. गीता गुप्त


  28 अप्रेल-2014

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