संस्करण: 28अप्रेल-2008

दिखने के लिए बिजली, भरने के लिए बिल !
अमिताभ पाण्डेय

मौसम की मार और वादाखिलाफ़ी से परेशान जनता का हाल क्या होता है यह देखना हो तो आप मध्यप्रदेश के किसी गांव या शहर में चले जाईये जहाँ गर्मी के इस मौसम के दिनों दिन बढ़ते तापमान ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया हैं। लोग गर्मी से परेशान होकर राहत पाने के लिए कूलर, पंखे या ठण्डे पेय पदार्थों का सहारा लेना चाहें तो यह भी आसानी से संभव नहीं हो पा रहा है। इसकी वज़ह यह है कि बिजली पूरे प्रदेश में आंख मिचौनी का ऐसा खेल दिखा रही है कि सोते उठते, बैठते लोग हाय बिजली कर रहे हैं। पूरे प्रदेश में बिज़ली की घोषित अघोषित कटौती लगातार जारी हैं। हाल यह है कि भोपाल में बड़े अधिकारियों, मंत्री, मुख्यमंत्री तथा कुछ अन्य असरदार लोगों को छोड़ दें तो बाकी लोगों के घर भी चार घंटे से ज्यादा समय तक बिजली गुल है ओर लोग पसीना पसीना हो रहे है। राजधानी में होने वाली चार घंटे की यह कटौती जिला मुख्यालयों पर 6 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर 10 घंटे और गांव में 14 घंटे से अधिक समय तक हो रही है। शहरों गांवों में बिजली कटौती का हाल यह हो गया है कि 24 घंटे में से 15-15 घंटे तक बिजली गुल है। केवल झलक दिखाने के लिए आ जाती है ओर लोगों को रात में मच्छरों के हवाले करके गायब हो जाती है। मच्छरों से जूझते गर्मी से बेहाल होकर रात गुजारते गांव शहरों के लोग अब भाजपा के उन जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगना चाहते है जिन्होंने प्रदेश के बिजली संकट को दूर करने का वादा कर जनता से वोट लिये, सत्ता पर काबिज हो गये। अब हालत यह है कि सत्ता पर काबिज होने के साढ़े चार बरस बीत जाने पर भी भाजपा सरकार के वादे के मुताबिक बिजली संकट का समाधान नहीं कर पाई है। छोटे शहरों तथा गांवों में तो बिजली बस झलक दिखाने को आती है और गायब हो जाती है।बिजली