संस्करण: 28 मार्च -2011

हिंदू धार्मिक स्थलों पर पाकिस्तानी कहर

? डॉ. महेश परिमल

 

प्रधानमंत्री बनने का सपना सँजोने वाले भाजपा के भूतपूर्व अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी जब पाकिस्तान गए थे, तब वहाँ उन्होंने कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना के गुण गाए थे। जिसका हमारे देश में काफी विरोध भी हुआ था। श्री आडवाणी ने पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर मत्था भी टेका था। अनजाने में उन्होंने वहाँ एक बात ऐसी कह दी, जो अब सच साबित हो रही है। आडवाणी ने कहा था कि जिन्ना ने भले ही मुस्लिमों के लिए अलग पाकिस्तान मुल्क भारत से माँगा, इससे पाकिस्तान बनाने का उनका सपना तो पूरा हो गया, पर बहुत ही जल्द वे समझ गए कि उनसे एक भूल हो गई है। कुछ समय बाद ही उन्होंने पाकिस्तान को एक धर्म निरपेक्ष देश बनाने की बात कही। किंतु उनकी मौत के बाद पाकिस्तान में उनके विचारों को भी दफना दिया गया। आज पाकिस्तान को बने 63 साल हो गए, किंतु वहाँ रहने वाले हिंदू, सिख और इसाई समुदाय के लोग सबसे दुरूखी है। यदि यह कहा जाए कि पाकिस्तान में मुस्लिम समुदाय के अलावा जो भी लोग निवास करते हैं, वे सभी विश्व के सबसे दुरूखी इंसान हैं, तो गलत न होगा।

हाल ही में पाकिस्तान के केबिनेट के एकमात्र इसाई मंत्री की हत्या हो गई। उनकी हत्या की जवाबदारी तालिबानों ने ली है। दूसरी तरफ आतंकवादियों और स्वयं पाकिस्तानी सरकार द्वारा हिंदू धार्मिक स्थलों पर कब्जा कर वहाँ शॉपिंग मॉल, होटल या फिर पिकनिक स्पॉट बनाए जा रहे हैं। पिछने 5 सालों में कम से कम 360 हिंदू और सिख धार्मिक स्थलों पर पाकिस्तान इवेक्यूई बोर्ड ने बहाने बताकर अपने अधिकार में कर लिया है। इसी तरह हिंदू किसानों की कम से कम 1 लाख 35 हजार एकड़ जमीन पर भी पाकिस्तानी सरकार ने जबर्दस्ती कब्जा कर लिया है। इस मामले में पाकिस्तानी सरकार का दोमुँहापन सामने आता है। एक तरफ तो वह अल्पसंख्यकों के संरक्षण की बात करती है, तो दूसरी तरफ उनके ही धार्मिक स्थलों पर कब्जा कर रही है। पंजाब के बक्कर क्षेत्र में स्थित शेरांवाली मंदिर को मदरसे में तब्दील कर दिया गया है। इसी तरह अबोटाबाद के आर्य मंदिर मो स्कूल में बदल दिया गया है। गुजरांवाला के अमीनाबाद के धार्मिक स्थल को फिर से नया रूप देने के बहाने पहले तो उस पर कब्जा जमा लिया, बाद में उसका उपयोग अन्य कामों के लिए किया जाने लगा। अब यहाँ पर जानवरों का तबेला बना दिया गया है। हिंदुओं और सिखों के लिए पवित्र स्थल जोगी तला झेलम और बादशाही मस्जिद के करीब स्थित लाहो महाराज मंदिर पर भी कब्जा कर लिया गया हे। चकवाल के हनुमान मंदिर को धर्मशाला का रूप दे दिया गया है। यहाँ तक तो बात समझ में आती है, पर इस्लामाबाद में स्थित रामकुंडी मंदिर को पिकनिक स्पॉट के रूप में तब्दील कर दिया गया है। पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित डेरा इस्माइल खान के खेबर क्षेत्र के 700 वर्ष पुराने और सबसे पवित्र माने जाने वाले काली बाड़ी को एक कार्पोरेट कंपनी ने सरकार की मदद से एक हॉटल बना दी गई है। जब शुरू में इस स्थल पर कब्जा जमाया गया, तब स्थानीय हिंदुओं ने गवर्नर से मिलकर अपनी चिंता जाहिर की। इसकी शिकायत लिखित रूप से भी की। तब गवर्नर ने हिंदुओं को यह आश्वासन दिया था कि आप लोग चिंता न करें। ऐसा कुछ भी नहीं होगा। पर उनका आश्वासन झूठा साबित हुआ। वहाँ पर एक आलीशान होटल खुल गई। काली बाड़ी का नामो-निशान ही खत्म हो गया। यही स्थिति सिख, इसाई और अहमदिया मुस्लिमों की हो गई है। पाकिस्तान में एक इसाई मंत्री की हत्या के बाद अल्पसंख्यकों पर असुरक्षा की तलवा लटक रही है।

इसके पहले पश्चिमोत्तार सीमा प्रांत के एक हिंदू साधू का अपहरण किया गया, कई दिनों तक उसका कोई पता नहीं चला। उसे खोजने की सारी कोशिशें नाकामयाब रही। कई लोगों को इस्लाम धर्म स्वीकारने के लिए दबाव डाला जाता है। यदि हिंदू इसे मानने से इंकार करते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। इससे डरकर कई परिवार अपनी जान जोखिम में डालकर सीमा पार कर भारत आ गए हैं। इस समय वे फुटपाथ पर रहकर जीवन गुजार रहे हैं। उधर पाकिस्तान सरकार यह कहते नहीं अघाती कि हम हिंदुओं की रक्षा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। लेकिन वहाँ होता इसका उल्टा ही है। अल्पसंख्यकों की सरेआम हत्या अब वहाँ आम बात है। इन अल्पसंख्यकों की बहू-बेटियों को सरेआम बेइज्जत करना या उठा कर ले जाने की घटनाएँ आम बनती जा रही हैं। कई लोगों पर ईश निंदा के आरोप में बेवजह ही परेशान किया जाता है। कई लोग ईश-निंदा के झूठे आरोक के कारण सजा भी भोग रहे हैं।

पाकिस्तान के इस दोगलेपन के कारण अल्पसंख्यकों की हालत बद से बदतर हो गई है। स्वतंत्रता के बाद यानी 1947 में हिंदू और सिख अलपसंख्यकों की संख्या 10-15 प्रतिशत थ, जो अब घटकर 2 प्रतिशत रह गई है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह ईसाई है। केंद्र सरकार के पास अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचार के कई सुबूत हैं, पर वह कुछ भी नहीं कर पा रही है। पाकिस्तान सचिव स्तर की वार्ता की पहल करके इस परदा डालना चाहता है। इस कार्य में वह सफल भी होता नजर आ रहा है। अब बहुत हो चुका, भारत सरकार को इस दिशा में कड़े कदम उठाने ही होंगे। पाकिस्तान से सीधो जवाब-तलब किए जाने चाहिए। यदि सरकार को पाकिस्तान में बसे हिंदुओं के लिए कुछ करना है, तो वहाँ की असली हालात का पता लगाकर हिंदुओं की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाना होगा।


? डॉ. महेश परिमल