संस्करण:  27 सितम्बर-2010   

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सन्तजन नहीं रहजन कहिए !

  कानून से भगोड़ों को शरण देने, पैसों की हेराफेरी करने, सरकारी ठेकों का 'इन्तज़ाम' करने, अपनी वित्तीय समस्याओं को सुलझाने या आप को परेशान करनेवाले किसी ब्लैकमेलर को छह इंच छोटा करने>सुभाष गाताड़े

 


घर में नगदी रखने की सीमा को तय किया जाना जरूर


  क समय था जब न तो बैंक होते थे और ना ही लाकरों की सुविधाएं ही थीं तब लोगों को अपना धन और जेवर सुरक्षित रखने के लिये उन्हें जमीनों में गाड़ना पड़ता था।>वीरेंद्र जैन
 


कामनवेल्थ गेम्स गुलामी की मानसिकता नही राजनीति के खेल से ऊपर है राष्ट्रधर्म का निर्वहन
 

 प्रजातांत्रिक देश में पक्ष और विपक्ष के राजनैतिक दलों के बीच प्रतिद्वंद्विता और आरोप प्रत्यारोपों का चलते रहना स्वाभाविक है। किंतु अपनी राजनीति का खेल ऐसा कतई नहीं होना चाहिए>राजेंद्र जोशी
 


सुरक्षा का मुद्दा और मायावती

  .प्र. की मुख्यमंत्री मायावती ने आरोप लगाया है कि अयोध्या विवाद पर फैसले के मद्दे-नजर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए माँगे गये अतिरिक्त केन्द्रीय बलों को देने से केन्द्र ने इनकार कर दिया है।>सुनील अमर
 


कौन कहता है इस्लाम और कुरान परिवार नियोजन के विरूध्द हैं?

 ह एक आम धारणा है कि मुसलमान, परिवार नियोजन नहीं अपनाते और इसके विरोधी हैं। मुसलमान यह मानते हैं कि परिवार नियोजन, इस्लाम के विरूध्द है। >एल.एस.हरदेनिया
 


मध्यप्रदेश में कांग्रेस का भविष्य


  त्तरप्रदेश यदि राजनीति की कर्मभुमि है तो मध्यप्रदेश राजनीति की जन्मभुमि है। उत्तरप्रदेश के श्री कृष्ण को भी राजनीति सिखने मध्यप्रदेश में सांदीपनी के पास आना पड़ा।> डॉ. मृत्युंजय जोश


2 अक्टू. गॉधी जयंती पर विशेष सतत विकास के लिए गॉधीवादी सोच जरूर

   देश में विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहें है। बड़े-बड़े कारीडोर बन रहें हैं। कारखानों का निर्माण हो रहा है। गहरी गहरी खदानें खोदी जा रही हैं।>डॉ. सुनील शर्मा

 


आफत के अभयारण्य

  दिवासी बस्तियों को उजाड़कर भारत सरकार का वन अमला भारत में फिर से चीतों के पुनर्वास की तैयारियों में जुट गया है। अफ्रीका से लाए जाने वाले इन चीतों के नए आश्रम-स्थल मध्य-प्रदेश के कूनो-पालपुर> प्रमोद भार्गव


1 अक्तूबर अन्तराष्ट्रीय वृध्द दिवस पर विशेष वृध्दावस्था को अभिशाप बनने से रोकिए

  वृध्दावस्था जीवन का एक ऐसा सत्य है जिसका सामना करने के लिए मनुष्य मात्र को सहज रूप में तैयार रहना चाहिए। भारत जैसे परंपरा प्रधान देश में जहां संयुक्त परिवार प्रथा अभी विद्यमान है>डॉ. गीता गुप्त


27 सितम्बर-2010 

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