संस्करण: 27 मई -2013

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चाल, चरित्र, चेहरा सब बेनकाब

स्वार्थ के लिए अपने ही कार्यकर्ताओं को बलि चढ़ाने से नहीं चूकती भाजपा

       चाल, चरित्र और चेहरे वाली पार्टी के नेता होने का दम भरने वाले भाजपा नेताओं के चेहरे बेनकाब हो चुके हैं। पार्टी में अपना रुतबा बनाए रखने के लिए किस तरह अपने पद और कद का इस्तेमाल होता है यह लोगों ने खूब देखा। पद की लालच में किस तरह कुलीनों के कुनबे में कलह होती है, यह लोग देख ही रहे हैं। और अब जो घटित हो रहा है उससे वह चेहरा भी सामने आ गया है जिसे संस्कृति और संस्कार जैसे शब्दावरण से भाजपा ने ढंक रखा था। इस पार्टी के नेता अपनी सुविधा के लिए भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते हैं। 

? विवेकानंद


उग्र हिंदुत्व के

कैसे कैसे मददगार ?

       र्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान भाजपा के एक नेता वरुण गांधी ने अल्प संख्यक समुदाय के लोगों के हाथ काट डालने की धमकी दे डाली।  हालांकि वे कितने लोगों के हाथ काट सकते थे, कहना कठिन है क्यों कि उनकी वीरता का कोई ऐसा पुराना रिकार्ड उपलब्ध नहीं था न अभी है फिर भी मुखार बिंदु से वीरता का प्रदर्शन अच्छा चुनावी स्टंट था। भाजपा तथा आरएसएस में इस प्रकार की इच्छायें पाल कर रखने वालों की अच्छी खासी संख्या है किंतु ऐसी घटिया इच्छाओं को वास्ताविकता का रूप देने के लिये जान, माल, प्रतिष्ठा , परिवार की सुरक्षा, सभी कुछ खोने का डर बना रहता है इसलिये .....

? मोकर्रम खान


अरूण जेटली को विनम्र जवाब

      मैं श्री अरूण जेटली का बहुत आभारी हूॅ कि उन्होने मेरे द्वारा की गई उस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी जो सर्वोच्च न्यायालय और सी.ए.जी. द्वारा क्रमश: केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) और खुफिया ब्यूरो (आई.बी.) जैसी संस्थाओं के विरूध्द टिप्पणियाँ करके उनका अवमूल्यन करने के संबन्ध में थी।

             कुछ समय से भाजपा मेरी टिप्पणियों और बयानों को यह कहते हुये अनदेखा कर रही थी कि वे प्रतिक्रिया देने योग्य नही है।

? दिग्विजंय सिंह


सीबीआई को स्वायत्तता के पीछे

ब्यूरो हमेशा सरकार के अधीन ही रही है

      क्या सीबीआई को वास्तव में स्वतंत्र बनाया जा सकता है और इसे पूरी स्वायत्ता दी जा सकती है? शायद कभी नहीं, क्योंकि राजनीतिज्ञ इसका इस्तेमाल अपने प्रतिद्वंद्वियों से हिसाब चुकता करने के लिए करते रहे हैं और आगे भी करता रहना चाहेंगे। जब तक कोई राजनीतिज्ञ सत्ता में है, वह सीबीआई के इस्तेमाल के खिलाफ हंगामा करता है और जब वह खुद सत्ता में चला आता है,तो फिर वह खुशी से उसी एजेंसी का बॉस बनना चाहता है। लालकृष्ण आडवाणी के मामले को हम याद करें। 1998में वे केन्द्र में गृहमंत्री बने थे।

? हरिहर स्वरूप


बहुत कठिन है डगर नवाज शरीफ की

         पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार द्वारा सत्ता सम्हालने की सभी बाधायें दूर हो गयी हैं। यद्यपि नवाज शरीफ की पार्टी वहां की संसद में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर गयी थी परन्तु उसे फिर भी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था। चुनाव के बाद निर्दलीय सांसद नवाज शरीफ की पार्टी में शामिल हो गये हैं। इससे अब उन्हें स्पष्ट बहुमत मिल गया है। यद्यपि नवाज शरीफ को बहुमत मिल गया है,परन्तु उनकी पार्टी पूरे पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं कर सकती है। यह इसलिये है क्योंकि नवाज शरीफ की पार्टी ने जो 126 सीटें जीती हैं उनमें से 118अकेले पंजाब से जीती हैं।। 

 ?   एल.एस.हरदेनिया


और कितने खालिद मुजाहिद ?

हिरासत में मौतें : आखिर कब तक !

                  कुछ साल पहले संसद में हिरेन मुखर्जी व्याख्यान देते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने एक अहम बात कही थी। उनका कहना था कि 'सामाजिक न्याय के विचार की पड़ताल करते हुए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम न्याय के प्रणालीकेन्द्रित नज़रिये (arrangement-focused view of justice) और नतीजाकेन्द्रित नज़रिये (realization-focused understanding of justice) में फर्क करें।   

? सुभाष गाताड़े


राजनीति में नौटंकी

नौटंकी की राजनीति

      माज में आज कई ऐसे प्रश्न है जिनके उत्तर लोग यहां-वहां खोजते फिर रहे हैं किंतु ऐसी प्रश्नों के उत्तर भी अपने आसपास ही सहजता से मिल जाया करते हैं। उदाहरण के तौर पर एक प्रश्न ऐसा है जिसका उत्तर भी यहीं मिल जाता है-

                प्रश्न- आजकल गांव-खेड़ों में, मेलों में, पर्वों और उत्सवों पर जिस तरह नौटंकियां खेली जाती थी, आजकल मंचों पर नौटंकियों के खेल क्यों नहीं हो रहे हैं ?

? राजेन्द्र जोशी


नारी मुक्ति के विमर्श में लिपटा स्त्रीद्रोह

एंजेलीना जोली किनके लिए प्रेरणा हैं ?

      दुनिया की ''सबसे खुबसूरत'' महिला के तौर पर मीडिया द्वारा प्रोजेक्ट की जानेवाली जानीमानी अमेरिकी अभिनेत्री, फिल्म निर्देशक एवं पटकथा लेखक एंजेलीना जोली, जो वहां की सबसे अधिक महंगी अभिनेत्रियों में शुमार की जाती हैं, अपने पार्टनर/पति के ब्राड पिट के साथ वह सबसे महंगे माडल के तौर पर भी चुनिन्दा उत्पादों की मार्केटिंग में सामने आयी हैं, जिनके जुड़ुवा सन्तानों की पहली तस्वीरें पाने के लिए अग्रणी पत्रिकाए 14 मिलियन डॉलर की रकम उंडेल देती हैं,

? अंजलि सिन्हा


पानी का समाजशास्त्र

        लवायु परिवर्तन से विश्वभर में मौसम के बदलाब की बयार बह रही है, बढ़ता तापमान, तूफानी बारिश और बाढ़ सहित अनेक प्राकृतिक आपदाऐं कभी भी किसी भी देश में कहर बरपाने को बैचेन हैं। दुनिया के अधिसंख्य देश पानी की कमी से बेहाल हैं विशेषकर विकासशील देश इस संदर्भ में बुरी हालत में हैं। हाल ही में एक शोध के तहत वैज्ञानिकों को मालूम हुआ है कि भूमंडलीय तापमान में वृध्दि के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन से एशिया में ताजा पानी की भारी कमी महसूस की जाएगी और अधिकतर भागों में फसल उत्पादकता में गिरावट आएगी एवं अधिसंख्य विकासशील देशों में विकास बाधित होगा। शोध यह भी बताता है कि भूमंडलीय तापमान से होने वाले इन बदलावों के चलते अनेक देशों में भुखमरी के खतरे बेहद अधिक हैं।

? शब्बीर कादरी


बढ़ते बाल मजदूर

       ज विश्व में लगभग 11 करोड़ बाल मजदूर हैं जो अत्यंत भयावह परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार समिति द्वारा ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण किया गया। इस रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि किस प्रकार से विश्व के अविकसित राष्ट्रों में बच्चों का शोषण हो रहा हैए और उन्हें अपना व अपने मां-बाप का पेट भरने के लिये जानवरों से भी बदतर जिन्दगी बसर करनी पड़ रही हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार 97 प्रतिशत बाल मजदूर तीसरे विश्व में अर्थात् अविकसित राष्ट्रों में है। इन देशों में बाल मजदूरों की संख्या सबसे अधिक है जहां पर कुपोषण और अशिक्षा अधिक है। 

 

? राखी रघुवंशी


छोटे किसानों को बरबाद करेगी

उ.प्र. की नयी कृषि नीति

        बर है कि उ.प्र. सरकार अपनी नयी कृषि नीति में ठेका खेती को प्रश्रय और बढ़ावा देने जा रही है। यद्यपि यह उसकी अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों के विपरीत है लेकिन समझा जा रहा है कि सूबे की अखिलेश यादव सरकार ने प्रदेश के 85 प्रतिशत सीमांत किसानों की जमीन को बड़ी-बड़ी कम्पनियों को सौंप देने का पुख्ता मन बना लिया है। यदि ऐसा हो गया तो उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से जमींदार राज लौट आएगा। जिन्हें आज किसान कहा जा रहा है वे अपनी ही जमीन पर मजदूर बनकर रह जाएंगें। ठेका खेती का तात्पर्य छोटी-छोटी जोत वाले किसानों की जमीन को लेकर उसे किसी बड़ी कम्पनी को देना है।

? सुनील अमर


विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2013 पर विशेष

हमारी संस्कृति,दर्शन और परम्पराएॅ पर्यावरण संरक्षक हैं।

       प्रकृति के सम्मुख आज सबसे बड़ी चुनौती है- लगातार बढ़ रहा प्रदुषण। सर्वविदित है कि पर्यावरण संरक्षण के बिना किया गया विकास अल्पजीवी तो होता ही है साथ ही मानवता के लिए भी घातक  है। बढ़ रहे पर्यावरण विनाश के पीछे है पश्चिम का सेमेटिक चिंतन जो यह बताता है कि सृष्टि का निर्माण 'गाड' या 'अल्लाह' ने उसके अनुयायियों के लिए किया है।'बेकन' के अनुसार प्रकृति रूपी  रहस्यमयी नारी के सभी भेद उसके हाथ मरोड़कर उजागर कर देने चाहिए।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


  27 मई -2013

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