संस्करण: 27  जनवरी - 2014

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केजरीवाल की तेजी कहीं उम्मीद की

भृणहत्या न कर दे

     रविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी आज एक व्यक्ति या पार्टी का नाम नहीं अपितु एक उस उम्मीद का नाम है जो लम्बे समय से छले जाते नाउम्मीद लोगों ने एक बार फिर से बाँधी है। राजतंत्र से निकल कर आये देश ने लोकतंत्र का अर्थ अपने शासक के चयन का अधिकार समझा और पुराने राजा की जगह अपनी पसन्द का 'राजा' चुनने लगे, व समय समय पर उन्हें बदल कर देखने लगे, जबकि लोकतंत्र में जनता की भूमिका को बदलना चाहिए था,जो यथावत प्रजा बनी रही।   

? वीरेन्द्र जैन


खत्म हुआ हाइप्रोफाइल ड्रामा

        दिल्ली में मुख्यममंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा किया गया हाइप्रोफाइल ड्रामा खत्म हो गया। दो पुलिसकर्मियों को अवकाश पर भेजने के बाद मुख्यंमंत्री मान गए। वे यह अच्छी तरह से समझ गए थे कि उनके इस आंदोलन को जनसमर्थन नहीं मिल रहा है, इसलिए उन्हें  अपना नाटक तो खत्म करना ही था। कुल मिलाकर इस ड्रामे में अरविंद, अहंकार और आप का हाइप्रोफाइल रूप ही दिखाई दिया। 'आप' इस समय एक ऐसे वाहन पर सवार है, जिसमें ब्रेक है ही नहीं। बहाव के विरुध्द चलने का नारा देने वाले अरविंद केजरीवाल इस समय अपनी सरकार सड़क से ही चला रहे हैं। उनका यह ड्रामा टीवी पर लोग देख ही रहे हैं।

?

डॉ. महेश परिमल


अपनी पसंद का राजनीतिक दुश्मन नहीं पा सके

नरेंद्रभाई मोदी

     दिल्ली में पिछले दिनों कांग्रेस ,बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं ने अपनी बातें जनता के सामने रखीं । जहां आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल ने दोनों बड़ी पार्टियों की नीतियों और राजनीति की धज्जियां उड़ाईं, धरने पर बैठकर यह सिध्द कर दिया कि दिल्ली पुलिस उनके अधीन नहीं है और आगे अगर दिल्ली की कानून व्यवस्था में को गड़बड़ी पायी जाए तो उसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाए , वहीं कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने लोकसभा चुनाव 2014 के लिए अपनी  अपनी पार्टी की रणनीतियों का  बखान किया।

 ? शेष नारायण सिंह


गांधी जी की हत्या व्यक्ति ने नहीं

विचार ने की थी

      हात्मा गांधी की हत्या को 65 वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है। वैसे तो गांधी जी की हत्या एक व्यक्ति ने की थी परन्तु वास्तव में पूछा जाए तो हत्या का मुख्य कारण एक विचारधारा थी। वह विचारधारा पूरी तरह से साम्प्रदायिक और प्रतिक्रियावादी थी। हत्या नाथूराम गोंडसे ने की थी। गोंडसे एक विचारधारा का प्रतिनिधि और प्रतीक था। गोंडसे का संबंध हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से था। दोनों संगठनों का मत था कि गांधी की मुस्लिम परस्त नीतियों के कारण उनकी हत्या की गयी।

? एल.एस.हरदेनिया


नये रूप में राहुल

कांग्रेस भाजपा का सामना करने को तैयार

              पिछले शुक्रवार को कांग्रेस के अधिवेशन में राहुल गांधी के भाषण को सुनकर तो ऐसा ही लगता है कि अब वे लय में आने लगे हैं। उनके विरोधी चाहे जो कहें,लेकिन उनका वह भाषण बहुत ही शानदार था। सच कहा जाय तो जयपुर सम्मेलन के बाद उनका यह दिया गया अब तक का सबसे अच्छा भाषण था। गौरतलब है कि जयपुर सम्मेलन में ही उनके कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने की घोषणा की गई थी।

 ?   हरिहर स्वरूप


इस बदहाली का गुनाहगार कौन

           क लंबा संघर्ष अनगिनत कुर्बानियां और जनान्दोलन की कोख से उपजा झारखंड अपने जन्म के साथ ही राजनीतिक अस्थिरता का शिकार रहा है। 15नवंबर 2000में बिहार से अलग होकर झारखंड एक अलग राज्य बना और भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता संभाली। बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनेए मगर 27महीने बाद मंत्रीमंडल में कुछ मंत्रियों के विरोध के बाद मंराडी को रूखसत होना पड़ा। झारखंड के गठन को 13 वर्ष का लंबा अर्सा बीत चुका है।

? देवेन्द्र कुमार


कम नहीं हो रही मुलायम की मुसीबतें

      त्तर प्रदेश में बेमिसाल बहुमत से सरकार बनाने के बावजूद समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक दिक्कतें कम नहीं हो रही हैं। अन्यान्य कारणों से सूबे की बागडोर राजनीतिक रुप से अनुभवहीन अपने युवा पुत्र का सौंप देने के बाद अपना पूरा ध्यान केंद्र की राजनीति पर लगाने का निर्णय उन्होंने जाहिर किया और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को कई अवसरों पर उन्होंने आशान्वित किया कि वे प्रधानमंत्री बनकर दिखा देंगें। यह अवसर के अनुकूल भी था।

?  सुनील अमर


अधिक मतदान के स्पष्ट संकेत

     कांग्रेस ने 2004 के लोकसभा चुनाव में जब 'कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ' नारा दिया था तो उसका आम आदमी से तात्पर्य गरीब था। यूपीए के दो कार्यकाल बीते और उस शहरी एवं कस्बाई शिक्षित,अर्ध शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस परिभाषा को ही बदल दिया जो लंबे समय से स्वयं को राजनीतिक व्यवस्था में उपेक्षित महसूस कर रहा था। दिल्ली में इसी नए आम आदमी ने 'आप' की सरकार बनवा दी और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी अधिक मतदान कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि अब उसकी अनदेखी संभव नहीं। 

? नरेन्द्र देवांगन


संदर्भ : जैन समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा

देश की बहुलतावादी संस्कृति और मजबूत होगी

        जैन समुदाय को आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा मिल ही गया है। केन्द्रीय कैबिनेट ने हाल ही में इस फैसले पर अपनी आखिरी मुहर लगा दी। अल्पसंख्यक मंत्रालय जल्द ही इस बारे में एक अधिसूचना जारी करेगा। दिल्ली, राजस्थान समेत देश के चौहदह राज्य पहले ही अपने यहां जैन समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दे चुके हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह दर्जा दिए जाने की मांग लंबे समय से विचाराधीन थी, जो कि अब पूरी हो गई है। 

? जाहिद खान


मृत्युदंड की जरूरत?

      र्वोच्च न्यायालय ने मृत्युदंड के एक मामले में अधिकतम उदारता बरतते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है। अदालत ने कहा है कि यदि सरकार दया याचिका के फैसले में देरी करती है तो इस आधार पर मृत्युदंड को उम्र कैद में बदला जा सकता है। इसी सोच को आधार बनाकर अदालत ने फांसी की सजा पाए 15 दोषियों की सजा आजीवन करावास में बदल दी। इनमें चंदन तस्कर वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश समेत उसके चार मददगार शामिल हैं। इन्हें बारूदी सुरंग बिछाकर 22 पुलिस कार्मियों की हत्या करने के अपराधा में फांसी की सजा सुनाई गई थी।       

? प्रमोद भार्गव


न्याय की तलाश में भटकती महिलाएं

        ध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की सरकार महिलाओं के कल्याण का दावा तो खूब करती है लेकिन इससे कमजोर, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय की कितनी महिलाओं को लाभ मिला? इसकी पर्याप्त और प्रामाणिक जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही है। सरकार के प्रतिवेदन, विज्ञप्ति और फाईलों से निकालकर समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किये गये आकड़े भले ही महिलाओं के कल्याण को साबित करना चाहे लेकिन वास्तविक स्थिति कहीं न कहीं सच्चाई बयान कर ही देती है।

? अमिताभ पाण्डेय


परियोजनाओं की पर्यावरण संबंधी अनुमति पर

राजनीति गलत!

      पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के कार्यकाल में विकास संबंधी कई परियोजनाओं को लंबित रखा गया। ऐसा बीजेपी के प्रधानमंत्री प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी का कहना है और वो इसका कारण बतलाते हैं जयंती टेैक्स! ज्यंती नटराजन के पूर्ववर्ती पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी अपने कार्यकाल में अनेक परियोजनाओं को हरी झण्डी नहीं दी थी।शायद उस समय इसका कारण मोदी जी नहीं सोच पाए थे, नही तो जयराम टैक्स जैसा जुमला भी उनके शब्दकोष में शामिल हो जाता।       

? डॉ. सुनील शर्मा


  27जनवरी  -2014

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