संस्करण: 27 फरवरी- 2012

राह से भटक रहे हैं

कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थी

? डॉ. गीता गुप्त

                  से में, जबकि भारतीय किशोरों और युवाओं के अपराधोन्मुख होने की घटनाओं में निरन्तर वृध्दि दर्ज की जा रही है, कोटा (राजस्थान) के कोचिंग संस्थानों से 800 छात्रों के गायब होने का मामला सनसनीखेज़ है। आज पढ़ लिखकर कुछ बनने की चाहत किशोरों और युवाओं को अपने घर की दहलीज़ से दूर ले जा रही है। इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। परन्तु इंजीनियर, डॉक्टर बनने का स्वप्न साकार करने के लिए कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी यदि अपने लक्ष्य से भटकने लगें तो यह निश्चय ही चिंता की बात हैं। अपना भविष्य संवारने के लिए आज देश के कोने-कोने से युवा दिल्ली, बेंगलुरू, पुणे, कोटा आदि शहरो में जाते हैं और माता-पिता अपने ख़ून पसीने की कमाई उनके लिए दांव पर लगा देते हैं। लेकिन इन युवाओं का ध्यान यदि अपने लक्ष्य से हटकर नशा, अपराध या किसी ऐसी बुराई पर केन्द्रित हो जाए जो उनके भविष्य को अंधकारमय बना दे और माता-पिता की आशाओं को धूमिल कर दे, तो ऐसे संस्थानों की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा।

                हाल ही में कोटा पुलिस के एक सर्वेक्षण से यह सत्य उजागर हुआ है कि डॉक्टरी ओर इंजीनियरिंग की परीक्षाओं की तैयारी के लिए पूरे देश से बड़ी संख्या में कोटा के कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेने वाले 800 से अधिक विद्यार्थी अपनी कक्षाओं से लगातार ग़ायब है। पुलिस का कहना है कि अधिकतर विद्यार्थी शहर में मौजूद होने के बावजूद कोचिंग के लिए कक्षाओं में नहीं जाते। ऐसी स्थिति में उनके ग़लत राह पर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस ओर कोचिंग संस्थानों को धयान देना होगा। निस्संदेह इन संस्थानों का उद्देश्य धान कमाना ही है परन्तू दूर-दूर से आने वाले विद्यार्थियों के प्रति उनकी कुछ नैतिक जिम्मेदारी भी है। मसलन, ऐसे विद्यार्थी जो पढ़ाई से जी चुराते हैं और अपना समय तथा माता-पिता की मेहनत की कमाई अन्यत्र व्यर्थ गंवा रहे हैं, उनकी जानकारी अभिभावकों को कोचिंग संस्थान के संचालकों द्वारा अवश्य दी जानी चाहिए।

                 चूंकि शहरों में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं और यह भी देखने में आया है कि उच्च शिक्षा से संबंध युवा अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए अपराधों की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। तो कोचिंग संस्थानों में अनुपस्थित विद्यार्थियों की ओर पुलिस का धयान आकृष्ट होना स्वाभाविक ही है, मगर अभिभावकों, खुफ़िया एजेंसियों और कोचिंग संस्थानों के संचालकों के लिए भी यह गंभीर चिंता की बात है। युवावस्था में मन को एकाग्र और संयमित रखना कठिन होता है अत: घर से दूर रहने पर युवाओं का निरंकुश हो जाना अस्वाभाविक नहीं कहा जा सकता। इस दौर में ग़लत बाते युवा मन को बहुत आकृष्ट करती हैं इसलिए वे अपराधों में लिप्त हो जाते हैं। कभी-कभी तो वे अपने जीवन का उद्देश्य पूरी तरह भुलाकर ऐसे मार्ग पर चल पड़ते हैं कि उनके माता-पिता को समाज में शर्मिन्दगी उठानी पड़ती है।

                 शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति अब एक समस्या बन चुकी है। कक्षा में निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप उपस्थिति के अभाववश परीक्षा से वंचित किये जाने पर वे न्यायालय की शरण भी लेने लगे हैं जो कि सर्वथा अनुचित है। जहां तक कोचिंग संस्थानों की बात है, तो बेहतर यही होगा कि एक स्थान के कुछ विद्यार्थी मिलकर एक साथ किसी शहर के कोचिंग संस्थान में प्रवेश लें और साथ रहकर पढ़ाई करें तथा एक दूसरे का धयान रखें। उनके अभिभावक भी परस्पर सम्पर्क में रहे और सबकी गतिविधियों की जानकारी रखें। कोचिंग संस्थान में प्रवेश दिलवाकर सिर्फ़ उनकी फ़ीस चुकाने तक ही वे अपनी ज़िम्मेदारी को सीमित न कर दे। बल्कि संस्थान के संचालक से भी संवाद बनाये रखें और बच्चों को भी अपनी चिंता का एहसास कराते रहे, ताकि उन्हें भी अपने दायित्व का बोध होता रहे। यह स्थिति उन्हें निरंकुश होने से भी बचायेगी।

               कभी-कभी माता-पिता बच्चों को इतनी रकम देते हैं कि वे अपनी मित्रमंडली में रौब गांठने के लिए कुछ बुराइयां अपना लेते हैं। फिर बाद में जब उन्हें पर्याप्त राशि नहीं मिलती या माता-पिता कोई कटौती करते हैं तो वे स्थिति से समझौता नहीं कर पाते और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए ग़लत राह पर चल पड़ते हैं। बुरी संगति में पड़कर चोरी, लूटपाट या अन्य वारदातों को अंजाम देना उनके लिए मामूली बात हो जाती है। मगर उनका यह आचरण समाज के लिए ख़तरे की घण्टी है। यह अभिभावकों को समझना होगा।

               कोटा पुलिस के सर्वेक्षण से देश भर की कोचिंग संस्थाओं के संचालकों को यह सीख अवश्य लेनी चाहिए कि उनके यहां कक्षाओं में निरंतर अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों का मामला असाधारण और गंभीर हो सकता है अतएव उनपर विशेष धयान दिया जाना चाहिए। अनेक आपराधिक प्रकरणों में विद्यार्थियों की संलिप्तता उजागर हो चुकी है। अत: पुलिस तो अपराधों पर नियंत्रण के उद्देश्य से ही ऐसी संस्थाओं पर नज़र रख रही है। परन्तु अभिभावकों और कोचिंग संस्थानों के संचालकों को सजग रहकर अपने और देश-हित में विद्यार्थियों को दिग्भ्रमित होने से रोकना होगा।

               
? डॉ. गीता गुप्त