संस्करण: 27 दिसम्बर-2010

कांग्रेस को मजबूत करते भाजपा तथा आरएसएस

 ? मोकर्रम खान

                       

      

                  इस समय भाजपा तथा आरएसएस के नेता कांग्रेस को मजबूत करने के लिये जी जान से लगे हुये हैं । यह खबर सुनने में थोड़ी अटपटी जरूर है किंतु सत्य है । अभी चंद दिनों पहले विकीलीक्स ने एक खुलासा किया कि राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से कहा था कि हिंदू आतंकवाद देश के लिये बड़ा खतरा है और यह मुस्लिम आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है । बस आरएसएस तथा भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस के खिलाफ मुहिम छेड़ दी । उनकी आपत्ति यह थी कि आतंकवाद के साथ हिंदू शब्द क्यों जोड़ा । अप्रत्यक्ष उद्देश्य यह था कि जनता में यह संदेश जाय कि आतंकवाद केवल मुसलमानों की विरासत है जिसे कांग्रेस बढ़ावा दे रही है और हिंदुओं को जबरदस्ती आतंकवाद से जोड़ रही है तथा वे हिंदुओं के एकमात्र हितचिंतक हैं जो कांग्रेस से उनकी लड़ाई लड़ रहे हैं । पिछले महीने चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद कह दिया था उस पर भी भाजपा तथा आरएसएस ने बड़ा बवंडर मचाने का प्रयास किया था, यह दिखाने के लिये कि भगवा रंग का पेटेंट केवल उन्हीं के पास है । राहुल गांधी के बयान पर बवाल इसलिये मचाया जा रहा है कि कांग्रेस हिंदू वोटों के नुकसान के डर से बयान वापस ले कर माफी मांगेगी जिससे जनता के बीच भाजपा की साख बढ़ेगी किंतु कांग्रेस ने आफेंस इज द बेस्ट डिफेंस (आक्रमण बचाव का सबसे अच्छा तरीका है) की पालिसी अपनाते हुये उल्टा इन्हीं पर हल्ला बोल दिया । राहुल अपने बयान पर कायम रहे। 19 दिसंबर को हुये कांग्रेस के महाधिवेशन में सोनिया गांधी ने कहा कि कोई भी धार्मिक आतंकवाद खतरनाक है । लेकिन कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तो भाजपा तथा आरएसएस पर सीधा ही हमला कर दिया । उन्होंने कहा कि जिस तरह हिटलर ने यहूदियों को टारगेट किया था और इसे राष्ट्रीयता का रूप दिया था, उसी प्रकार आरएसएस वाले मुसलमानों को टारगेट कर रहे हैं और इसे राष्ट्रीयता का रूप दे रहे हैं । उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरस्वती शिशु मंदिर जैसे स्कूलों में हिंसा का पाठ पढ़ाया जाता है । सीधा मतलब है कि इन स्कूलों के माध्यम से हिंदुओं के दिमागों में बचपन से ही सांप्रदायिकता का ज़हर भरना शुरू कर दिया जाता है जो युवावस्था तक पहुंचते पहुंचते उन्हें पूर्णत: विषैला बना देता है जिसके कारण वे दूसरे समुदाय के लोगों से घृणा करते हैं, यही घृणा उन्हें दंगा फसाद करने के लिये प्रेरित करती है । उन्होंने यह प्रश्न किया कि ब्लास्ट मामलों में आरएसएस से संबध्द लोग ही क्यों पकड़े जाते हैं । स्मरणीय है कि कुछ समय पहले तक हिंदू कटटरपंथी यह सवाल उठाते थे कि आतंकवादी घटनाओं में केवल मुसलमान ही क्यों पकड़े जाते हैं। दिग्विजय सिंह के इस भाषण पर खूब तालियां पिटीं किंतु भाजपा तथा आरएसएस में खलबली मच गई क्यों कि उनके सामने यह समस्या है कि वे दिग्गी राजा के आरोपों को खुल कर नकारने में भी डरते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अपने आपको नरमपंथी प्रदर्श्त करने से कट्टर हिंदूवाद की नींव पर खड़ी उनकी राजनीतिक इमारत में दरारें न पड़ जायें इसलिये वे दिग्गी राजा के आरोपों का सीधा उत्तर न दे कर ऐसे बयान दे रहे हैं जिनसे भाजपा को ही नुकसान हो रहा है और कांग्रेस को मजबूती मिल रही है । बिहारी मूल के झा जी जो मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं, ने कहा है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस को खत्म करने की सुपारी ली है, यह नहीं बताया कि सुपारी देने वाला कौन है क्योंकि ऐसी सुपारी तो कोई विरोधी पार्टी ही देगी न और सुपारी किलर तो मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ की अपेक्षा बिहार में ज्यादा आसानी से मिलते हैं। एक बयान आरएसएस के प्रवक्ता राम माधव ने दिया है कि दिग्विजय सिंह के जेहादियों से सबंध हैं, इसकी जांच की जानी चाहिये । जेहाद का अर्थ है धर्म युध्द जो तब लड़ा जाता है जब इस्लाम खतरे में हो । इस तरह के धर्मयुध्द 1500 वर्ष पूर्व हुआ करते थे । इस समय कश्मीर में जो हो रहा है वह धर्मयुध्द (जेहाद) नहीं है बल्कि अपने ही देश को तोड़ने का घृणित षडयंत्र है । इस्लाम में मुल्क से वफादारी फ़र्ज़ (बंधनकारी कर्तव्य) है और देशद्रोह पर मृत्युदंड का प्रावधान है। अभी तक किसी मुस्लिम धर्माचार्य या विद्वान ने कश्मीर या देश के किसी भी भाग में हुई हिंसक घटनाओं को जायज नहीं ठहराया है बल्कि इसे धर्म विरुध्द बताया है किंतु राम माधव ने इन अपराधियों को ज़ेहादी (धर्मयोध्दा) की पदवी प्रदान कर उनका मनोबल तो बढ़ाया ही है, अन्य मुस्लिम युवकों को पथभ्रष्ट होने के लिये प्रेरित किया है। शायद राम माधव को नहीं मालुम है कि कश्मीर में लड़ रहे आतंकवादी केवल भाड़े के टट्टू हैं जिनमें मुसलमान भी हैं और कई हिंदू भी । राम माधव का बयान भी भाजपा को राजनीतिक नुकसान ही पहुंचायेगा और कांग्रेस को लाभ । भ्रष्टाचार के विरुध्द आंदोलन पर भी भाजपा पस्त पड़ती दिख रही है क्यों कि कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की शुरुआत भाजपा के मंत्री प्रमोद महाजन ने की थी। कांग्रेस का यह भी कहना है कि हमने तो भ्रष्टाचार के केवल आरोप लगने भर से ही अपनी सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री को बरखास्त कर दिया, आरोप सिध्द होने का इंतजार नहीं किया जबकि भाजपा येदुरप्पा को अभी तक कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाये हुये है। कांग्रेस के आरोपों का भाजपा उत्तर देने के बजाय यह कह रही है कि कांग्रेस को घोटाले की सुध छ: साल बाद क्यों आई । उन्हें शायद देर आयद, दुरुस्त आयद का सिध्दांत भूल गया है । वैसे माननीय उच्चतम न्यायालय का एक फैसला है कि अगर सौ गल्तियां हुई हैं तो उस आधार पर एक सौ एकवीं गलती की इजाजत नहीं दी जा सकती । जिस जेपीसी की मांग पर संसद के एक पूरे सत्र, जिस पर लगभग पौने दो अरब रुपये खर्च हुये थे, की बलि दे दी गई क्या उसे इतनी न्यायिक शक्तियां भी प्राप्त होंगी कि वह दोषियों को जेल भेज सके । जेल भेजने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है, क्या राजनेता इन अधिकारों का उपयोग करने के लिये अधिकृत होंगे। फिर जेपीसी पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने का क्या औचित्य है । हर्षद मेहता कांड में जेपीसी गठित की गई थी, उसका क्या अंजाम हुआ। यह तक पता नहीं लग सका कि पैसा आखिर गया किसकी जेब में । भ्रष्टाचार पर भाजपा के रवैये से जनता में गलत संदेश जा रहा है जिसका लाभ सीधा कांग्रेस को मिल रहा है । इस इलेक्ट्रानिक युग में जनता समाचार चैनलों के माध्यम से सब देख रही है।

 

 ? मोकर्रम खान