संस्करण: 27 दिसम्बर-2010

देश में वापस कैसे आए काला धन
 

 ? शब्बीर कादरी

                       

      

                 कोई केन्द्रीय सरकार लगभग पच्चीस साल बाद एक बार फिर यह फैसला कर रही है कि भारत में काला धन और इसमें तेजी से बढ़तरी क्यों हो रही है का गहन अध्ययन कराया जाए। हाल ही में वित्त मंत्री ने देश के चार प्रमुख संस्थानों जिनमें राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान, राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान, नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकानॉमिक रिसर्च और राष्ट्रीय वित्त प्रबंधन संस्थान शामिल हैं से प्रस्ताव मांगे हैं कि वे देश में काले धन के आंकड़ों तथा उनकी प्रकृति का पता लगाने के बारे में अपने प्रस्ताव एक माह के भीतर प्रस्तुत करें यद्यपि इस अध्ययन में एक वर्ष लग जाने की उम्मीद है। याद रहे काले धन पर इससे पहले अध्ययन करीब 25 वर्ष पहले 1985 में किया गया था। अमेरिका की ग्लोबल फायनेंशियल स्टडी के अर्थशास्त्री 'देव कार' द्वारा किए गए एक अध्ययन में हाल ही में निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्ष 1948 से 2008 के बीच भारत से 462 अरब डॉलर अर्थात लगभग 20 लाख करोड़ रू. देश से बाहर भेजा गया है। श्री देव कार की यह रिपोर्ट बताती है कि इस राशि में से लगभग 50 प्रतिशत काला धन वर्ष 1991 के बाद देश से बाहर गया है। जबकि वर्ष 2000 से 2008 के बीच इसमे से करीब एक तिहाई राशि देश के बाहर भेजी गई है। वर्तमान सरकार का यह प्रयास है कि वह यह जाने कि क्या इस काले धन को देश या देश के बाहर जमा किया गया है एवं अर्थव्यवस्था के किस क्षेत्र में काले धन का सृजन सबसे अधिक हो रहा है और इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को क्या खतरा है, देखा यह भी जाएगा कि किन तरीकों से काला धन बनाया जाता है।
          सच्चाई यह है कि काले धन की शरण स्थली बने देश, आमतौर पर गरीब देशों का लगभग रू. 16,00,228 करोड़ यानि 255 अरब यूरों हड़प जाते हैं अन्यथा इस धन का उपयोग स्कूल, अस्पताल और बुनियादी ढ़ांचे के विकास में किया जा सकता है। आर्थिक सहयोग एवं संगठन  मानना है कि काले धन की शरणस्थली बने इन देशों के कारण बहुत नुकसान हो रहा है जो लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जो देश कर बचाने वालों के लिए शरणगाह बन रहे हैं उनमें प्रमुख हैं लगभग पचास देश जहां काला धन रखने वालों को काफी सुविधाएं मिलती हैं इनमें स्विट्जरलेंड, यूनाईटेड किंगडम,एंटीगुआ, हांगकांग, आस्ट्रिया, लाईबेरिया, लक्समबर्ग, पनामा, बारबाडोस, कोस्टारिका, साइप्रस, ग्रेनाडा, आयरलैंड, माल्टा, मारीशस, नीदरलैंड, उरूग्वे, सिंगापुर और सेंट विन्सेंट इत्यादि शामिल हैं।
       स्विस बैंक एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार जिन लोगों के खाते स्विस बैंकों में हैं उनमें राजनीतिक, ब्यूरोक्रेट्स,उद्योगपति, फिल्म स्टार व कारापोरेट जगत के कई अधिकारी शामिल हैं इसके अलावा भी अन्य क्षेत्रों में लोग काले धन के खेल में शामिल हैं। यह भी जानना दिलचस्प है कि स्विस बैंक एसोसिएशन की सूची में पांच प्रमुख देश जिनके नागरिकों का सर्वाधिक धन इन बैंकों में शामिल है भारत शीर्ष पर है। भारत का 1456 अरब डालर, रूस का 470 अरब डालर, ब्रिटेन का 390 अरब डालर, यूक्रेन का 100 अरब डालर और चीन का 96 अरब डालर काले धन के रूप में उजागर है। जर्मनी के एसजीपी बैंक में सौ से अधिक भारतीयों के खाते बताए जाते हैं साथ ही कई अन्य देशों के बैंकों में भी कई भारतीयों के गुप्त खातों की जानकारी मिलती है, जबकि भारत पर अरबों रू. का कर्ज है यह कर्ज चुकाया जा सकता है अगर यह राशि देश में वापस आ सके। वित्त मंत्री ने कहा हैं कि काले धन की शरणगाह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। काले धन की शरणस्थली और आतंकी वित्तपोषण के बीच कुछ संबंध है, काले धन को सफेद करने आतंकी फंडिंग, रिश्वत और कर चोरी में कुछ पारस्परिक संबंध है।
      देश के कालाधन और राजनीतिक भ्र्रष्टाचार के घालमेल को लेकर कुछ वर्ष पूर्व हमारे यहां वोहरा समिति का गठन किया गया था, कमेटी ने कहा कि देश में माफियाओं की एक ऐसी समानांतर सरकार चल रही है जो राय की मशीनरी को अप्रसांगिक बना रही है, बाद में इस कमेटी की सिफारिशों का भी हाल वही हुआ जो दूसरी कमेटियों का हमारे यहां होता रहा है। प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो.अरूण कुमार ने अपनी पुस्तक 'द ब्लेक इकॉनमी इन इंडिया' में सुन्दरता से लिखा है कि आमजीवन में चल रही गतिविधियों के माध्यम से ही हमारे यहां काले धन की कमाई जिस तीव्र गति से की जा रही है वह स्तब्ध कर देने वाली है। आप किसी भी प्रकार की सेवा पैसे के बल पर जब चाहें, जहां चाहें स्वतंत्रतापूर्वक प्राप्त कर सकते हैं। अनुमान के अनुसार केवल नशीली दवाओं की तस्करी के माध्यम से ही प्रतिवर्ष लगभग 30 हजार करोड़ से अधिक का मुनाफा पैदा किया जाता है जो शुध्द काला धन है। समीक्षकों का कहना है कि अपराधियों, व्यवसायियों, भ्र्रष्ट नौकरशाहों और राजनेताओं की चौकड़ी ही कालेधन का मूलस्रोत है, इस चौकड़ी पर अंकुश लगाकर ही काली अर्थव्यवस्था की आंधी से निपटा जा सकता है। वर्तमान सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कड़े कदमों से काले धन की समस्या का निदान हो सकता है पर इसके लिए विदेश में बैंक खाता खोलने से पूर्व रिजर्व बैंक की अनुमति अनिवार्य करना चाहिए। इसके लिए सभी देशों के केन्द्रीय बैंक के साथ आरबीआई को करार करना चाहिए, सभी देशों में भारतीयों के बैंक खातों की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को दिए जाने के लिए संबंधित देशों की सरकारों से करार होना चाहिए। विदेश में खाता खोलने से पूर्व उस देश में भारतीय दूतावास को सूचित करना चाहिए।
 

 

 ? शब्बीर कादरी