संस्करण: 27अक्टूबर-2008

कुपोषण से हो रही मौतों पर भाजपा सरकार के कुतर्क हैं हास्यास्पद

अजय सिंह 'राहुल'

पनी अक्षमता, अकर्मण्यता और अदूरदर्शितापूर्ण ढंग से राज का संचालन करने वाली भाजपा की सत्ता अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए जिस तरह से कुतर्कों का सहारा ले रही है, उनका अब प्रदेश की जनता की नज़र में पर्दाफाश हो चुका है। हाल ही में सरकार की अनदेखी से प्रदेश के विभिन्न भागों में कुपोषण से रही नौनिहालों की मौतों पर भाजपा के नेता और मंत्रीगण मौत के इस गंभीर मुद्दे को जिस तरह से ट्विस्ट करके जनता के सामने अपनी सफाई पेश कर रहे हैं वह हास्यास्पद ही नहीं निंदनीय भी है। कुपोषण के मामले में इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीटयूट के मुताबिक मध्यप्रदेश की हालत अफ्रीकी देशों की स्थिति से भी ज्यादा बदतर हो गई है। क्या यह प्रदेश के वर्तमान शासन के लिए शर्मिंदगी का विषय नहीं है ? विभिन्न योजनाओं के गलत-सलत आंकड़ों का मकड़जाल फैलाने में भारतीय जनता पार्टी की शुरू से ही फितरत रही है। राजनीति और प्रशासन के हर क्षेत्र में भाजपा ने फितरती मस्तिष्क के लोगों को भ्रम फैलाने के लिए तैनात कर रखा है। भाजपा के एक जिम्मेदार मंत्री के नाम से उधार की कलम से लिखे गये एक लेख में मंत्रीजी के नाम से यह प्रचारित किया गया है कि 'कुपोषण पर राजनीति नहीं राष्ट्रनीति चाहिए'। जिन जिन क्षेत्रों में भाजपा की सरकार नाकामयाब सिध्द हो जाती है उन, उन क्षेत्रों की असफलता के लिए कांग्रेस के पूर्ववर्ती शासन और वर्तमान में केन्द्र की यू.पी.ए. सरकार के मत्थे दोष मढ़ने की कलाबाजी में भाजपा सरकार मधयप्रदेश में लगभग पांच वर्षों से प्रदेश की भोली-भाली जनता को भ्रमित करने का जाल फेंकती आ रही है।

केन्द्रीय योजनाओं की सफलताओं को अपने नाम से गिनाने वाली प्रदेश-सरकार ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में भी यही करती आ रही है। विधानसभा और उसके बाहर कांग्रेस सप्रमाण आंकड़े रखे जाने से तिलमिलाई भाजपा सरकार जिन उपलब्धियों को अपनी कामयाबी बताने का ढोंग कर रही है, वह अब पर्दे के भीतर की बात नहीं रही है। इसी तरह बिजली और सड़क के क्षेत्र में अपनी नाकामयाबी का दोष भी वह गलत सलत आंकड़े देकर और तथ्य छुपाकर प्रदेशवासियों को गुमराह करते रहने में निरंतर लगी हुई है। विज्ञापनों में बढ़-चढ़कर विकास और जनकल्याण की योजनाओं का ढिंढ़ोरा पीटा जा रहा है वह ज़मीनी हकीकत से जरा मेल नहीं खाता।

प्रदेश में कुपोषण के फैले तांडव को रोक न पाने की अक्षमता पर अपना चेहरा बचाने के लिए भाजपा की सरकार इसके लिए राष्ट्रनीति बनाने का बहाना ढूंढ लाई है। भाजपा के नीतिकारों से यह पासा फेंककर जनता की नज़र में कुपोषण से हुई मौतों के लिए राज्य की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का कुचक्र चला दिया है। राज्य के अंदर की व्यवस्था का संचालन और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा और खुशहाली के लिए राज्य सरकारें ही जिम्मेदार होती हैं। राज संचालन की नाकामयाबियों और उसकी  कमजोरियों की वजह से कोई दुष्परिणाम यदि जनता को भुगतना पड़ रहा है, और यदि कोई उसकी ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करता है तो उसे भाजपा राजनीति कह कर उल्टे कुतर्कों के माध्यम से उस पर आक्रमण बोल देती है।

कुपोषण से बच्चों की मौत हो रही है भाजपा के शासनकाल में, किंतु इस हालात के लिए अपने कुतर्कों और तथ्यहीन आंकड़ों के जरिए वह कांग्रेस को दोषी सिध्द करने का प्रयास कर रही है। भाजपा की सरकार सरकारी रिकार्ड ही उलटकर देख ले तो उसकी आंखे खुल सकती है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने वर्ष 1997 से 2003 तक के लिए यूनिसेफ के सहयोग से राष्ट्रीय पोषण नीति की तर्ज पर एक समग्र राज्य पोषण नीति बनाई थी। इस नीति के तहत किए गये कार्यों से राज्य में माध्यम दर्जे के कुपोषण में 15 प्रतिशत तथा गंभीर कुपोषण के मामलों में 10 प्रतिशत तक की कमी लाने का प्रयास किया गया था। इस नीति के तहत जिन उल्लेखनीय कार्यों में सफलता मिली उसमें जन्म के समय होने वाले कम वज़न वाले बच्चों का वज़न बढ़ाना विटामिन 'ए' की कमी से होने वाले अंधत्व का निवारण करना तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (रक्त अल्पता) के प्रतिशत में कमी लाना जैसे मुद्दे शामिल थे। इन सब कार्यों को मूर्तरूप देने का कार्य पंचायत राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के जिम्मे था। उन्हें यह सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व था कि गरीबी हटाने का कार्यक्रम उन लोगों को तक पहुँच सके। बहुक्षेत्रीय प्रयास एवं अंतर-विभागीय समन्वय, किशोरियों की ओर विशेष धयान, पोषण संबंधी सजगता तथा परिवारों को लक्षित करना, ये सब इस नीति के प्रमुख रणनीतिक पहलू थे।

वर्तमान भाजपा सरकार ने पोषण नीति के तहत अपनी अनदेखी को उजागर होते देख अपनी फितरत चालू कर दी है। कहाँ है वह पूर्ववर्ती शासन द्वारा वर्ष 1998 में स्थापित की गई खाद्यान्न सुरक्षा मिशन की गतिविधियां, कहाँ गई आदिवासी बहुत जिलों के दूरस्थ और पिछड़े गांवों में कही गई ग्रेन बैंकों की स्थापना की दूरदर्शिता बच्चों के टीकाकरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जनस्वास्थ्य रक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम से सक्रिय भागीदार बनाने की योजना। एक दशक के कार्यकाल में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी परिलक्षित की गई। भाजपा सरकार अपने ही प्रचार महकमें के रिकार्ड से (अगर उसे सुरक्षित रखा गया हो तो) यह हकीकत जान सकती है कि सन् 1992 में टीकाकृत किये गये बच्चों की संख्या 29 प्रतिशत थी जो 2001 तक बढ़कर 67 प्रतिशत हो गई थी।

 

(लेखक म.प्र. कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अधयक्ष हैं)

 

अजय सिंह 'राहुल'