संस्करण: 27अप्रेल-2009

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मनमोहन का उत्तर और चोटिल आडवाणी


    जिस प्रकार से स्वयं को भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण डवाणी देश में भ्रमण कर रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं>भवानी शंकर


स्विस बैंकों में जमा ब्लैकमनी
पर चुनावी उथलपुथल


       गत दिनों जब देश के सारे अखबार चुनावों को मुद्दाविहीन घोषित कर रहे थे तब अचानक ही भाजपा के प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी लालकृष्ण आडवाणी स्विस बैंकों में जमा भारतीयों की ब्लैकमनी के सवाल पर ऐसे उछल पड़े जैसे कभी सापेक्षिकता का सिध्दांत हाथ लग जाने पर   >वीरेंद्र जैनी


कौन होगा मजबूत : कौन होगा कमजोर
वोटिंग मशीन के पेट में पल रहा है सच

 

         भाषण सुन-सुनकर थक गये, अखबार पढ़-पढ़कर थक गये, टी.वी. चैनलों पर समाचार देख-देखकर उक्ता गये। रिमोट हाथ है। जिस भी चेनल को बदलों सबमें एक ही बात हम मजबूत, वो कमजोर.... वो कमजोर-कहीं >राजेंद्र जोशी


आखिर ईसाई समाज की हुई जीत

 

  वक्फ बोर्ड की तरह चर्च और उनसी जुड़ी मिल्कियतों की देख-रेख के लिए मप्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा ईसाई बोर्ड बनाने के प्रस्ताव को आखिरकार बीजेपी सरकार ने नामंजूर कर दिया है। लोकसभा चुनाव से ऐन ठीक पहल   >जाहिद खान


लोकतंत्र के महापर्व में नक्सली दखल


  पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव के पहले चरण के मतदान में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक साथ छह राज्यों में अपनी उपस्थित दर्ज कराकर नक्सलियों ने केंद्र और राज्यों सरकारों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर>एम.के.सिंह


कार्पोरेट कंपनियों के लिए स्वर्ग बना ग्रामीण भारत

 

   भारती एयरटेल ने 27 फरवरी को महाराष्ट्र में पूना से 70 किमी दूर औसारीखुर्द में अपने पहले ग्रामीण सेवा केंद्र की शुरूआत की। तीन दिन बाद ही, इसी प्रकार के एक अन्य केंद्र का आंधारप्रदेश के उंडावली में उद्धाटन किया >अमित शर्मा


संदर्भ:- मई दिवस 1 मई 2009
वैश्वीकरण,मंदी और श्रमिक आंदोलन

 

      वैश्विक मंदी का दौर है, बहुराष्ट्रीय निगमों और कंपनियों पर मंदी का शिकंजा कसता जा रहा है। जैसे-जैसे आर्थिक मंदी बढ़ रही है, वैसे ही कर्मचारियों की छंटनी की रफतार भी बढ़ रही है,सारी दुनियॉ में अब तक>डॉ.सुनील शर्मा


सौ नहीं हजार की नोट बांटे नेता


        मतदाताओं को लुभाने के लिए नित नए तिकड़म किए जा रहे हैं, कहीं उपहार, पैसे और समान तो कहीं घोषणापत्र बांटे जा रहे हैं। इसके अलावा मंदिर में प्राणप्रतिष्ठा, भागवत कथा, किसान जागृति अभियान आदि किए>दुलार बाबू ठाकुर


न टला संकट, न जगी उम्मीद

 

        मजबूरन पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी ने अपनी ताकत को कम कर नवाज शरीफ के आगे भले ही आत्मसमर्पण कर दिया हो, लेकिन अंदर ही अंदर कई तरह के उबाल ने सियासी हलकों में कई >अंजनी कुमार झा


विद्यालयीन शिक्षा की चुनौतियां


       यह दु:खद सत्य है कि आज़ादी के छ: दशक बाद भी भारत में विद्यालयीन शिक्षा का स्वरूप सुनिश्चित नहीं हो सका है और इतनी विसंगतियां उजागर हो रही हैं कि व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता अनुभव की>डॉ. गीता गुप्त
 

''महिलाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति''

 

      भारत में महिलाओं की अपराधों में बढ़ती भागीदारी आज एक गंभीर समस्या बन गई हैं। आज औरतें छोटे-मोटे अपराध करने में ही नहीं बल्कि भयंकर अपराध करने में भी नहीं हिचकिचातीं। आज महिलाएं न>स्वाति शर्मा



 27अप्रेल2009

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