संस्करण: 27अप्रेल-2009

 

कार्पोरेट कंपनियों के लिए
स्वर्ग बना ग्रामीण भारत


 

 

 

अमित शर्मा

भारती एयरटेल ने 27 फरवरी को महाराष्ट्र में पूना से 70 किमी दूर औसारीखुर्द में अपने पहले ग्रामीण सेवा केंद्र की शुरूआत की। तीन दिन बाद ही, इसी प्रकार के एक अन्य केंद्र का आंधारप्रदेश के उंडावली में उद्धाटन किया गया। यह जगह विजयवाड़ा के नजदीक है और अपने गुफा मंदिरों के लिए जानी जाती है।

पिछले तीन या इससे अधिक महीनों में, भारत के शीर्ष मोबाइल ऑपरेटर ने आईसर्व के नाम से सैकड़ों ग्रामीण केंद्रों की शुरूआत की है। इनमें मोबाइल कनेक्शन सक्रिय करने, उन्हें पुर्नसक्रिय करने और रिचार्ज करने, सिम कार्ड बेचने और उन्हें बदलने के अलावा पूरे देश में वैल्यू एडेड सेवाएं जैसे रिंगटोन और हैलो टयून्स की सुविधा उपलब्धा है। एयरटेल के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी और मोबाइल सेवा के अधयक्ष संजय कपूर के अनुसार कंपनी ने भारत के प्रत्येक गांव में एक सेवा केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है।

एयरटेल की आईसर्व योजना भारत के कार्पोरेट जगत की एक बार फिर गांव की ओर चलो वाली नई सोच को प्रदर्शित करती है। मारुति सुजुकी, हीरो होंडा, हिंदुस्तान यूनीलीवर और आईटीसी से लेकर एलजी, सैमसंग, नोकिया और आइडिया सेल्यूलर जैसे विभिन्न उपभोक्ता सुविधाओं के विक्रेता ग्रामीण भारतीय बाजारों पर प्रभुत्व के लिए प्रतिस्पधरात्मक तरीके से काम कर रहे हैं। यह कंपनियां धूल भरे ग्रामीण रास्तों को विनाशकारी वैश्विक मंदी, जिसने हजारों लोगों से न केवल रोजगार छीन लिया, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी गर्त में धाकेल दिया, के कारण शहरी मांग में अचानक आई कमी को पूरा करने का जरिया मान रही हैं।

ग्रामीण भारत जहां देश की 114.5 करोड़ आबादी का दो तिहाई हिस्सा बसता है, अब तक सभी प्रकार के नाकारात्मक समाचारों से कोसों दूर हैं। इसके लिए तीन वर्ष की अच्छी कृषि उन्नति और सरकार की किसानों के 60 हजार करोड़ रुपए के कर्ज को माफ करने की पहल धान्यवाद की पात्र हैं। इसमें ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और उच्च अधोसंरचना विकास खर्च का भी अहम योगदान है। इन स्थितियों ने ग्रामीण उपभोक्ताओं को अमीर और कहीं अधिक महत्वाकांक्षी बना दिया है। इसके अलावा इससे विक्रेता भी विशेष योजनाओं और नए उत्पादों के साथ उच्च मूल्य संवेदी ग्रामीण बाजारों की ओर दौड़ रहे हैं। परिणाम दर्शाते हैं कि शीर्ष कार निर्माता मारुति सुजुकी, जिसने पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायत सदस्यों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के कर्मचारियों की मदद से एक विशेष योजना प्रारंभ की थी, की ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री दोगुना से भी अधिक हो गई, जो 2007-08 के पहले दस महीनों की तुलना में 3.6 प्रतिशत की कुल बिक्री से बढ़कर 2008-09 में 9 प्रतिशत पर पहुंच गई। मारुति सुजुकी के कार्यकारी अधिकारी मयंक पारीख के अनुसार, यह अर्थव्यवस्था में तरलता की तंगी का दौर है। इसलिए हमें ऐसे ग्राहकों को निशाना बनाने की जरूरत है, जिन्हें कर्ज नहीं चाहिए और ग्रामीण उपभोक्ता इस मामले में अच्छा अवसर प्रदान करते हैं। इसके लिए अच्छी पैदावार को धान्यवाद दिया जाना चाहिए।

जनरल मोटर्स भारत के ग्रामीण और छोटे शहरों में जोर-शोर से प्रचारित अपनी छोटी कार स्पार्क की बडे पैमाने पर बिक्री के प्रति आशांवित है। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा का कहना है कि उसकी बहु-उपयोगी स्कॉर्पियो गाड़ी की दो तिहाई बिक्री ग्रामीण क्षेत्रों में हुई है। मोटरसाइकिल बनाने वाली हीरो होंडा कंपनी भी एक वर्ष पहले की तुलना में अपनी कुल बिक्री के अनुपात में ग्रामीण भारत में मोटरसाइकिलों की अधिक बिक्री का दावा करती है।

            ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न निवेश एक अन्य कारण इलेक्ट्रॉनिक उपभोक्ता वस्तुओं की बड़ी कंपनियां एलजी और सैमसंग, जो ग्रामीण भारत से अपनी बिक्री का क्रमश: 35 और 27 प्रतिशत हासिल करती हैं, इस वर्ष इसमें 35 प्रतिशत की और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही हैं। एलजी ने हाल ही में एलसीडी टीवी खरीदने में असमर्थ ग्रामीण उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए डायरेक्ट कूल रेफ्रिजरेटर और सुपर स्लिम टेलीविजन की नई श्रृंखला बाजार में उतारी है। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के मार्केटिंग डायरेक्टर वी. रामचंद्रन ने कहा, हमने यह समझ लिया है कि आर्थिक मंदी के चलते शहरी बाजारों की मांग में कमी के दौर में ग्रामीण भारत में विकास की संभावना उच्च है।

शहरी बाजारों में मंदी और परिपूर्णता के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं का निम्न प्रवेश भी विक्रेताओं के लिए भारत के 6 लाख गांवों तक पहुंच बनाने की राह में एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण भारत में उपभोक्ता वस्तुओं का प्रवेश मुश्किल से 52 प्रतिशत है, जबकि कार का 2 प्रतिशत से थोड़ा अधिक और दोपहिया वहनों का 25 प्रतिशत है। शहरी भारत के लिए तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता वस्तुओं का उपभोग 85 प्रतिशत , कारों का 10 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों का 45 प्रतिशत है। कार निर्माताओं के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के साथ साझेदारी में व्यस्तता पर कोई आश्चर्य नहीं है। सैमसंग भी छोटे शहरों में अपने डीलरों की संख्या में इजाफा कर रहा है, जिससे इस वर्ष ग्रामीण बाजारों में उसे 40 प्रतिशत अधिक बिक्री की संभावना है। मोबाइल सेवाओं और हैंडसेट बाजार में आधो से अधिक की उन्नति के लिए पहली बार सेलफोन का इस्तेमाल करने वाले ग्रामीण भारतीय जिम्मेदार हैं। आइडिया सेल्यूलर के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी प्रदीप श्रीवास्तव के अनुसार, मोबाइल उद्योग में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी के पीछे ग्रामीण भारतीय उपभोक्ता का हाथ है। उन्होंने कहा कि आइडिया अपनी आमदनी का लगभग आधा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में वितरण और कवरेज को सुधारने पर खर्च करने की योजना बना रहा है। टेलीकॉम क्षेत्र के खिलाड़ी ग्रामीण बाजारों के हिसाब से अपनी योजनाएं बना रहे हैं।

आने वाले समय में स्थितियां और बेहतर होती जाएंगी। शहरी मोबाइल बाजार के परिपूर्णता की स्थिति में पहुंचने पर टेलीकॉम ऑपरेटर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। एयरटेल के कपूर के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगले वर्ष तक इसी क्षेत्र से दो तिहाई नए ग्राहकों के आने की उम्मीद है। एयरटेल को प्रतिमाह बढ़ते अपने 25 लाख नए ग्राहकों में से आधो ग्रामीण क्षेत्र से मिलते हैं। आइडिया और एयरटेल दोनों ही किसानों के लिए बाजार में विशेष योजनाएं लाने की तैयारी में हैं। एयरटेल एसएमएस के जरिए कृषि लाभ के नाम से 5 और 10 रुपए का सामग्री मूल्य देने की तैयारी में है, यह सेवा इफको किसान संचार के तहत दी जाने वाली है। आइडिया ने हैंडसेट बाजार की शीर्ष कंपनी नोकिया और समाचार सेवा क्षेत्र की राइटर्स के साथ नोकिया लाइफ टूल का परीक्षण करने के लिए करार किया है। यह वीएएस सेवा महाराष्ट्र के पांच जिलों में इसके उपभोक्ताओं को कृषि, शिक्षा और मनोरंजन के लाभ उपलब्धा कराती है। इसमें सामग्री मूल्यों और मौसम के बारे में जानकारियों के अलावा, एसएमएस के द्वारा भाषा सीखाने के उपकरण और रिंगटोन व स्क्रीन सेवर डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्धा है। नोकिया के एक प्रवक्ता के अनुसार इन सेवाओं की कीमतें खरीदने में सामर्थ्य की दृष्टि से 30 से 60 रुपए के बीच है। यहां तक कि उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली एफएमसीजी कंपनियां, जिन्होंने शहरी मांग में किसी भी प्रकार की गिरावट महसूस नहीं की है, ने भी विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उत्पाद प्रस्तुत किए हैं। उदाहरण के लिए हिंदुस्तान यूनीलीवर ने मधयप्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में टाटा चाय के अग्नि ब्रांड का छोटे शहरों में मुकाबला करने के लिए कम कीमत वाली ब्रूक बांड चाय पेश की है। इसके साथ ही आईटीसी और सनफीस्ट ने अर्ध्दशहरी और ग्रामीण खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कम कीमत वाले उत्पाद बाजार में उतारे हैं। बाल और त्वचा संबंधी उत्पाद बनाने वाली कंपनी मेरिको ने ग्रामीण भारत में बिक्री को बढ़ावा देने के लिए शहरी क्षेत्रों पर किए जाने वाले खर्च में कटौती कर दी है। मेरिको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौगाता गुप्ता के अनुसार हम ग्रामीण बाजारों में काफी संभावनाएं देख रहे हैं और उसी के अनुसार उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए अपनी रणनीतियों में परिवर्तन भी कर रहे हैं। यह उपभोक्ता कम खर्चे वाले उत्पाद अधिक मात्रा में खरीदते हैं और हम उन्हें वह उपलब्धा करा रहे हैं।

बाजार का सर्वे या शोधा करने वाली एजेंसी एसी निल्सन के आंकडे दर्शाते हैं कि 2008 में ग्रामीण बाजारों में 2007 के शहरी बाजारों की तुलना में कपडे या बर्तन धोने के साबुन, टूथपेस्ट और बिस्कुट की विकास दर उच्च थी। ग्रामीण स्उकों पर चलना, हालांकि बहुत आसान नहीं है। सड़कों और अधोसंरचना की कमी और ग्रामीण क्षेत्र तक सामान पहुंचाने में लगने वाले अधिक मूल्य के अलावा विक्रेताओं को अन्य कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके वे मारुति का घर-घर में मारुति जैसे नए-नए विचारों के साथ मैदान में बने हुए हैं।

हिंदुस्तान यूनीलीवर ने ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच और पैठ बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों और सामाजिक संगठनों की मदद ली है। इसने प्रोजेक्ट शक्ति लांच किया है, जो 2001 में महिलाओं के स्व-सहायता समूह से जुड़ी एक ग्रामीण वितरण प्रणाली है। आज 45 हजार से भी अधिक शक्ति केंद्र हैं, जो 15 राज्यों में 1,35,000 गांवों में फैले हुए हैं। ये देश के 6 लाख गांवों का एक चौथाई है। इसलिए अगली बार जब भी आप अपने पूर्वजों के गांव जाएंगे, तब आपको टूथपेस्ट और शेविंग क्रीम के लिए परेशान नहीं होना पडेग़ा। लेकिन अपने साथ अपने देहाती भाई के लिए एक स्मार्ट मोबाइल फोन और अपने भतीजों के लिए कम्प्यूटर गेम ले जाना जरूर सुनिश्चित करें।






 

अमित शर्मा