संस्करण: 26  सितम्बर- 2011

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नीरो खुश हुआ !
गुजरात पर आला अदालत के ताजा निर्देश पर इतनी उछलकूद क्यों ?

            मेरे प्रिय भाई, ऐसा लगता है कि आपने अदालती फैसले को पूरी तरह गलत ढंग से समझा है।मैं इस बात को स्पष्ट कर दूं कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहीं भी यह नहीं सुझाया है कि सुश्री जाकिया जाफरी द्वारा दायर शिकायत में प्रस्तुत आरोप बेबुनियाद या झूठे हैं। हकीकत यही है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश गुजरात जनसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है। जैसा कि आप जानते हैं कि सुश्री जाफरी ने  ....... 

  ? सुभाष गाताड़े


भाजपा में विरासत क

लड़ाई तेज हो रही है

     भाजपा ने यह भ्रम फैलाया हुआ था कि वह एक अलग तरह की पार्टी है जिसे अंग्रेजी में 'पार्टी विथ ए डिफ्रेंस'कहा गया था। बाद में जैसे जैसे उसके झगड़े सड़क पर आते रहे थे तो अंग्रेजी अखबारों ने उसे 'पार्टी विथ डिफ्रेंसिज' कह कर मजाक उड़ाया था। प्रारम्भिक भ्रम यह भी था कि यह पार्टी व्यक्तियों के आधार पर नहीं अपितु कुछ सिध्दांतों के आधार पर संगठन की मजबूती से चलती है,किंतु सत्तर के दशक में श्रीमती इन्दिरा गान्धी के नाम से चलती कांग्रेस को देख कर ...........

? वीरेन्द्र जैन


मोदी जी दंगों के लिए नहीं पर 

दंगों के बाद के दुष्कृत्यों के लिए तो क्षमा मांगे

      रेन्द्र मोदी ने सन् 2002 के दंगों के लिए माफी नहीं मांगी है। उनके ऐसा न करने के लिए उन्हें माफ भी   किया जा सकता है परंतु उन्हें उनके उन कृत्यों के लिए तो माफी मांगनी ही चाहिए जो उन्होंने सन् 2002के बाद किये। इस तरह का उनका सबसे जघन्य अपराध था मुसलमानों के विरूध्द जहर उगलते रहना है। उदाहरणार्थ नरेन्द्र मोदी बार-बार कहते रहते थे कि सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं परंतु सभी आतंकवादी मुसलमान हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


जनहित के नाम पर कद

नापने की कवायद

    गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का उपवास,  बाबा रामदेव की स्वाभिमान यात्रा और लालकृष्ण आडवाणी जी की प्रस्तावित रथ यात्रा,अन्ना हजारे का जनजागरण अभियान और नीतीश कुमार की सेवा यात्रा इनका उद्देश्य वाकई जनहित है?क्या मोदी ने मुस्लिम प्रतिनिधियों की ओर से सम्मान स्वरूप भेंट की गई टोपी पहनने से इनकार करके यह साबित नहीं कर दिया कि सद्भावना से उनका कोई लेना देना नहीं है?

? विवेकानंद


मध्यप्रदेश में कुपोषण का कहर

    ध्यप्रदेश में प्रशासन तंत्र किस कदर विफल हो रहा है, इसकी बानगी खंडवा जिले के गांवों में देखी जा सकती है, जहां बड़ी संख्या में कुपोषित और अति कुपोषित बच्चे पाए गए हैं। पिछले दिनों प्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति संबंधी सर्वे सामने आया था। यह समाचार 'न्यूयार्क टाइम्स' में भी प्रकाशित हुआ था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की बदनामी होने के बावजूद शासन-प्रशासन तंत्र नहीं जागा, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रशासन ने खंडवा ज़िले के गांवों का रुख किया।

 

? महेश बाग़ी


न्याय का यह नमूना देखिए

पत्नी घरेलू हिंसा की शिकार और प्रेमिका सामाजिक प्रताडना की

न्नड फिल्म जगत विगत कुछ दिनों से सूर्खियों में रहा है, कुछ गलत कारणों से। अब लग रहा है कि उस पर अब पटाक्षेप हो रहा है।

          ख़बर आयी है कि कन्नड फिल्मों के निर्माता संघ ने अभिनेत्री निकिता ठुकराल पर जो तीन साल का प्रतिबन्ध लगाया था उसे वापस लिया है। कन्नड फिल्म उद्योग के नामीगिरामी शख्सियतों द्वारा एवं कला-संस्कृति जगत के अन्य गणमान्यों द्वारा निर्माता संघ द्वारा लगाए इस 'खाप शैली के प्रतिबन्ध का विरोध किया था।

? अंजली सिन्हा


भारतीय लोकतंत्र में कांग्रेस की भूमिका

       देश के इतिहास में सबसे पुरानी, सबसे बड़ी और देश के स्वतंत्रता आंदोलन का नैतृत्व करने वाली राजनीतिक पार्टी होने का श्रेय कांग्रेस को जाता है। कांग्रेस ही वह राजनीतिक दल है जिसे आजादी के बाद भारत की जनता ने देश को नई दिशा और दशा देने के लिये उपयुक्त पाया। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लगाकर वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तक भारत में सबसे ज्यादा समय तक सत्ता का जिम्मा कांग्रेस के पास रहा।

? दिव्या शर्मा


भूजल प्रदूषण नियंत्रण के लिए

कब बनेगी राष्ट्रीय योजना

    मारे मुल्क में भूजल में बढ़ते प्रदूषण पर समय-समय पर चिंता जतलाई जाती रही है। लेकिन इस समस्या के ठोस उपाय क्या हों ? इस पर कभी गंभीरता से नहीं सोचा जाता। जबकि, यदि इस पर समुचित ध्यान नहीं दिया गया तो निकट भविष्य में हमारे लिए पीने के पानी के भी लाले पड़ जाएगें। एक बात तो तय है कि मौजूदा प्राकृतिक संसाधनों में इजाफा नहीं किया जा सकता। लेकिन इनका संरक्षण और इसे प्रदूषण से तो बचाया जा सकता है।

? जाहिद खान


सामंतों की भूमि का हो अधिग्रहण?

     देश में भूमि अधिग्रहण का मुद्दा गरम है। राजनीति में किसी हद तक जन-सरोकारों से जुड़े मुद्दों के पैरोकार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश 'राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन विधेयक 2011'को केबीनेट से पारित कराकर लोकसभा में पेश भी कर चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इस विधेयक का प्रारूप पूर्व में तैयार किए गए सभी विधेयकों की तुलना में किसान मजदूरों के ज्यादा हित में है।

? प्रमोद भार्गव


एक अक्टूबर को वृध्द दिवस पर विशेष

दिनों दिन हाशिए पर जा रहे हैं समाज के बुजुर्ग

         भी अभी हमारे बड़े ही करीब से गुजरा श्राध्द पक्ष। हम अपने पितरों को याद किया। लेकिन यह तो भूल ही गए कि एक अक्टूबर को वृध्द दिवस है। हमें वे बुजुर्ग याद आ रहे हैं, जिनकी ऊंगली थामकर हम जीवन की राहों में आगे बढ़े। उनकी प्रेरणा से आज हम बहुत आगे बढ़ गए हैं,लेकिन हमारी इस प्रगति को देखने के लिए आज वे हमारे बीच नहीं हैं। घर के किसी कोने पर या मुख्य स्थान पर उनकी तस्वीर पर रोज बदलती माला हमें कुछ बाताती है।

 

? डॉ. महेश परिमल



गरीबी की साफ तश्वीर सामने लाएॅ ?

     भारत के योजना आयोग का मानना है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 26 रूपये की आमदानी जीने के लिए पर्याप्त है। इस संदर्भ में योजना आयोग के सलाहकार बीडी बिर्दी ने सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में बताया है कि प्रो.तेंदुलकर की अध्यक्षता वाले समूह ने 2004-05 में कीमतों के आधार पर गरीबी रेखा का निर्धारण किया है। इसके अनुसार देश के शहरी क्षेत्रों के लिए 579रूपये और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 447 रूपये प्रतिमाह की आबादी को गरीबी रेखा का आधार माना जा सकता है।

?  डॉ. सुनील शर्मा



  26सितम्बर-2011

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