संस्करण: 26  दिसम्बर- 2011

क्रिकेट में फिक्सिंग की रोकथाम के लिए इंटरपोल से पहल

आई.सी.सी.की दुबई बैठक में होगी चर्चा

? राजेन्द्र जोशी

                 क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की समस्या किसी एक देश की नहीं है बल्कि उन सभी देशों की हैं जिनमें श्रृंखलाबध्द तरीके से अंतर्राष्ट्रीय मैचों का आयोजन होता ही रहता है। मैच फिक्सिंग एक ऐसा अपराध है जो छुपा हुआ होता है। परस्पर जीत-हार के परिणामों के आधार पर यह अपराध चर्चा में आता है। वैसे कहा जाता है कि क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें जीत और हार कब किस टीम की हो जाय अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। 'क्रिकेट बाइ चांस' का जुमला भी प्रसिध्द है किंतु मैच हार जाने या जीत जाने को अब अनेक बार शंका की नजरों से देखा जाने लगा है। कई ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मैच होते हैं जो परिणाम के बाद शंकास्पद बन जाते हैं। इसकी वजह यह होती है कि कोई टीम पहली पारी में तो बढ़िया बेटिंग या बालिंग करती हैं किंतु दूसरी पारी में न तो वह बेटिंग में ही या बालिंग में ही बेहतर प्रदर्शन कर पाती है और जब ऐसी टीमें जीतते-जीतते हार जाती है तो उस पर आरोप लग जाता है कि फलां टीम ने मैच फिक्सिंग कर लिया तभी तो पहली पारी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद दूसरी पारी में निकृष्ट प्रदर्शन किया।

               अनेक बार तो यह भी देखने में आता है कि मैच शुरू होने के बहुत पहले से ही किसी मैच में भाग लेने वाली दोनों टीमों का आकलन करते हुए अधिक प्रचार शुरू हो जाता है और प्रचार के आधार पर टीम के खिलाड़ी और खेल प्रेमी लोग खिलाड़ियों और अपनी प्रिय टीम के बारे में अपनी धारणा कायम कर लेते हैं। जब अपनी धारणा और पूर्वानुमान के अनुसार हार-जीत का परिणाम नहीं निकलता तो यह प्रचारित हो जाता है कि हारने वाली टीम ने अपने प्रतिद्वंद्वी टीम को जिताने के लिए सौदेबाजी कर ली। फिक्सिंग की चर्चा मैच शुरू होने के पहले समझ में नहीं आती और न ही उसका पर्दाफाश हो पाता है। लेकिन पर्दाफाश होने पर संबंधित देश की क्रिकेट टीम विवादों में घिर जाती है। सबसे ज्यादा यदि कोई फिक्सिंग के आरोप से आरोपित होता है तो वह होता है टीम का कप्तान।

                फिक्सिंग के मामले उजागर होने पर क्रिकेट कंट्रोल बोर्डस अपने अपने देश के आरोपित खिलाड़ियं के खिलाफ कार्यवाही तो शुरू करते हैं किंतु आरोप सिध्द होने पर खिलाड़ी पर हुई कार्यवाही सदैव विवादों में उलझकर रह जाती है। जब जब भी मैचों में अपेक्षा के अनुरूप परिणाम नहीं निकलते है तो खिलाड़ियों की खैल शैली पर लोग ऊंगली उठाने लगते हैं। कोई भी खेल हो, वह खिलाड़ी भावना के विपरीत खिलाड़ियों के आचरण देखने को मिलते है तो ऐसे खेल कलंकित होने लगते हैं। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। क्रिकेट खिलाड़ियों के बराबर अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। क्रिकेट खिलाड़ियों के बराबर अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले खेलों के खिलाड़ियों को पारिश्रमिक नहीं मिलता है। अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले क्रिकेट खिलाड़ी लखपति ही नहीं करोड़पति तक हो जाते हैं। सर्वाधिक कमाई वाले इस खेल में मैच फिक्सिंग जैसे अपराध की खबरें जब आती है तो आश्चर्य होता है कि भरपूर फीस मिलने के बाद भी लोभ और लालच में पड़कर कतिपय खिलाड़ी अपना भविष्य बिगाड़ लेते हैं।

               क्रिकेट मैच में फिक्सिंग की रोकथाम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड चिंताग्रस्त देखा जा रहा हैं। एक खबर के मुताबिक आई.सी.सी. अब मैच फिक्सिंग जैसे अपराध की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुलिस, इंटरपोल से पहल करने वाली है। बताया गया है कि जनवरी माह में दुबई में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड की बैठक होने वाली है। इस बैठक में क्रिकेट बोर्ड के पदाधिकारियों के साथ इंटरपोल के अधिकारी भी भाग लेंगे। इस बैठक में इंटरपोल से आग्रह किया जायगा कि वे फिक्सिंग जैसे अपराध की रोकथाम के लिए एक मज़बूत मेकनिज्म तैयार करें। हाल ही में इंटरपोल के प्रमुख रोनाल्ड के.नोबल दो दिवसीय यात्रा पर गई दिल्ली आये थे। रोनाल्ड ने यहां आई.सी.सी. के अधयक्ष श्री शरद पवार के साथ ही बी.सी.सी.आई. और आई.पी.एल. के पदाधिकारियों से मुलाकात की। रोनाल्ड ने यहां एक पत्रकार वार्ता के दौरान आशा व्यक्त की है कि खेल अपराधों की रोकथाम में इंटरपोल के मेकनिज्म को सुदृढ़ बनाने में क्रिकेट बोर्डों का सहयोग प्राप्त होगा। इंटरपोल प्रमुख ने नई दिल्ली में सी.बी.आई. के निदेशक श्री अमरप्रताप सिंह से भी मुलाकात की और इस विषय पर चर्चा की।

                क्रिकेट में मैच फिक्सिंग का मामला दो देशों की टीमों के बीच का होता है इसलिए इस मुद्दे पर इंटरपोल के दखल देने से ही इस अपराध पर अंकुश लगने की संभावना हो सकती है। अभी तक के अनुभवों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि फिक्सिंग के आरोप से किसी भी देश की टीम मुक्त नहीं है। क्रिकेट वाले देशों के अनेक खिलाड़ी फिक्सिंग के आरोपों का खामियाजा अभी तक भुगत रहे हैं। अनेक फिक्सिंग के प्रकरणों में अपने-अपने देशों द्वारा खिलाड़ियों पर दंडात्मक कार्यवाहियां भी हुई है। फिक्सिंग के नाम से अब गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कहावत भी चरितार्थ होने लगी है। वर्षों पुराने मैचों की चर्चा करते हुए तत्कालीन टीम के खिलाड़ियों द्वारा अपनी ही टीम और उसके कप्तान पर ऊंगलियां उठाई जाने लगी हैं। अब इंटरपोल की दखल से निश्चित ही फिक्सिंग जैसे अपराध पर रोकथाम की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

? राजेन्द्र जोशी