संस्करण: 26  दिसम्बर- 2011

भारत रूस संबंध नई ऊंचाई पर

कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर मनमोहन सिंह अडिग

 

? हरिहर स्वरूप

                मास्को: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तीन दिनों की रूस यात्रा तीन कारणों से महत्वपूर्ण रही है। सबसे पहले तो उनकी यह यात्रा रूस के संसदीय चुनाव के तुरंत बाद और राष्ट्रपति चुनाव के ठीक पहले हुई। यात्रा उस समय हुई, जिसके ठीक दो महीने बाद दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 65वीं सालगिरह मनाएंगे।

                 भारत की विदेश नीति में रूस के साथ हमारे संबंध बहुत ही खास मायने रखते हैं। भारत रूस के संबंध को हमेशा कसौटी पर खरा उतरा हुआ मानता है। भारत रूस को अपना एक विश्वसनीय साथी मानता है, जो समय आने पर कभी दगा नहीं देता।

                 अक्टूबर 2000 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा हुई थी। उस यात्रा के दौरान देशों के बीच रणनीतिक सहयोग की संधि हुई थी। उसके बाद तो दोनों देषों के संबंधों में गुणात्मक मजबूती बनी है।

                 रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव पिछले साल दिसंबर महीने में भारत आए थे। उनके उस दौरे में यह निर्णय किया गया था कि दोनों देश अपने द्विपक्षीय रणनीति सहयोग को विशेष रणनीतिक सहयोग की ऊंचाई पर ले जाएंगे।

               दोनों देशों के आपसी संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। यह तथ्य भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के रूसी राष्ट्रपति द्मितरी मेदवेदेव और प्रधानमंत्री व्लादिमिर पुतीन के साथ हुई बातचीत में भी सामने आया।

                 उस बातचीत में भारत और रूस दोनों ने महसूस किया कि शांतिपूर्ण कार्यों के लिए दोनों देशों का परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने का प्रयास सफल रहा है। दोनों पक्षों ने परमाणु टेक्नालॉजी की सुरक्षा के मानकों में अपनी प्रतिबध्दाताओं का फिर से इजहार किया।

                दोनों पक्षों ने डिजाइन और टेक्निकल सहयोग में रूसी संगठनों की कुशलता को स्वीकार किया। दोनों ने परमाणु संयत्र के निर्माण में भारतीय संगठनों की कुशलता को भी स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने कुडनकुलत के दोनो यूनिटों के जल्द से जल्द शुरू होने की संभावना को सकारात्मक नजरिये से देखा।

                बाद में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत कुडनकुलम में रूस निर्मित परमाणु बिजली संयत्र को दो सप्ताह में ही षुरू कर देगा। गौरतलब है कि इस काम के लिए मार्च 2012 का डेडलाइन तैयार किया था। उस समय से 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाले संयंत्रों द्वारा काम करना शुरू होना था। उसके आगामी दो सप्ताह में ही शुरू होने की घोषणा करके प्रधानमंत्री ने सबको हैरानी में डाल दिया।

                 भारतीय प्रधानमंत्री ने यह घोषणा रूसी राष्ट्रपति के साथ आयोजित अपने संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस में की। वह घोषणा प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में की, जब भारत के अधिकारी कुडनकुलम के स्थानीय लोगों को समझाने में लगे हैं कि उस परमाणु बिजली घर से उनका कोई नुकसान नहीं होने वाला है।

              ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे विरोध के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक क्षणिक समस्या है। कुछ लोग संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और विरोध कर रहे हैं। उन्होनें विश्वास जाहिर किया कि विरोध करने वाले लोगों को समझा दिया जाएगा कि इन बिजली संयंत्रों से उन्हें कोई खतरा नहीं है और ये पूरी तरह सुरक्षित हैं।

 
? हरिहर स्वरूप