संस्करण: 26 अगस्त-2013

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नरेंद्र मोदी को झूठ बोलने का व्यसन है,

वे झूठ के सिवा कुछ नहीं बोलते

       रेंद्र मोदी संघ के सच्चे प्रचारक हैं और संघ द्वारा बताए गए झूठ बोलने के तरीकों में पूरी तरह से पारंगत हैं। इतने वर्षों से संघ की सेवा करते हुए उन्होंने अफवाह फैलाने की संघ की सारी विद्या को हृदयंगम कर लिया है। उनके पिछले कुछ बयानों में बोले गए झूठ का संकलन किया गया है और उस पर गौर करने से समझ में आ जाता है कि नरेंद्र मोदी को झूठ बोलने का व्यसन है वह ऐसे व्यक्ति हैं जिसको अंग्रेजी में कम्पलसिव लायर कहा जाता है। यह एक तरह की बीमारी है जिसका इलाज बहुत मुश्किल है। हिटलर को यही बीमारी हुई थी। नरेंद्र मोदी किसी भी घटना को साम्प्रदायिक रंग दे देने के काम में उस्ताद हैं।    

? दिग्विजय सिंह

(कांग्रेस महासचिव)


मोदी से बहस

        ''मोदी अपने कद को बढ़ाने के लिए कोई बहस नहीं चाहते है क्योंकि उन्हे इस बात का जरा भी ज्ञान नही है कि जो वे कहते है उनमें से आधी बातें गलत होती है। क्या मोदी के राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को निश्चय ही उनके इस दोष का लाभ नही उठाना चाहिये?''

? मिहिर एस. शर्मा


मोदी जी, तुलना में तर्क नहीं, तथ्य होने चाहिए...!

      ...जी मोदी जी, 15 अगस्त को देश ने दो भाषण सुनें, देश के प्रधानमंत्री का जिम्मेदार वक्तव्य भी सुना और आपका तथ्यहीन बयान भी। जिन विषयों पर देश को चिंता हैं, उस पर प्रधानमंत्री ने देश से संवाद किया, लेकिन आप सिवाय राजनीति और दिल्ली पहुंचने की छटपटाहट के दिखावे के अलावा कुछ नहीं कर पाए। भुज के लालन कॉलेज में खड़े होकर भी आपको समझना पड़ेगा कि 67 साल की उम्र पा चुकी आजादी के बाद देश अब तथ्यों पर गौर करता है, क्योंकि तर्क तो उसे न्यूज चैनलों पर सुनने मिल ही जाते हैं।

 ? विवेकानंद


फिर एक बार दंगों का मौसम?

      बीसवीं सदी के उत्तरार्ध्द में हिन्दी भाषा के चर्चित कवि गोरख पाण्डेय की एक लघुकविता है : 'इस साल दंगा बहुत हुआ/बहुत हुई है खून की बारिश/अगले साल/अच्छी होगी फसल मतदान की'। बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर पूरे मुल्क में जो जूनून फैलाया जा रहा था, उन दिनों यह कविता काफी चर्चित हुई थी। अब जबकि 2014 के चुनावों के लिए बिसात बिछ रही है, उस वक्त बरबस यह कविता नए सिरेसे मौजूं हो उठी है।

? सुभाष गाताड़े


धार्मिक आधार पर राजनीतिक मोबिलाइजेशन

आर एस एस का पुराना हथकंडा है

         ब बिहार में बीजेपी और जनता दल ( यू ) के बीच झगडा शुरू हुआ था तो जो डर राजनीतिक जानकारों के मन में था वह सही साबित हो रहा है। बिहार में धार्मिक और साम्प्रदायिक बुनियाद पर राजनीतिक मोबिइलाजेशन शुरू हो गया है। देखा यह जा रहा है कि बिहार में दो संप्रदायों के बीच में झगड़े की शुरुआत किसी भी मामूली बात से होती है और साम्प्रदायिक तनाव की शक्ल अख्तियार कर लेती है। वर्ना नवादा मेंकिसी ढाबे पर खाने के बारे में विवाद,या बेतिया में किसी जुलूस पर फेंके गए कुछ पत्थर साम्प्रदायिक दंगे की बुनियाद नहीं हो सकते।

 ?   शेष नारायण सिंह


नरेन्द्र मोदी मेगलोमेनियक (अकल की अर्जीणता से पीड़ित व्यक्ति) है

           अंग्रेजी का एक शब्द है मेगलोमेनियक। इस शब्द का अर्थ है कि खुद की प्रतिभा और खुद की योग्यता के बारे में बढ़कर सोचना। बुनियादी रूप से देखा जाए तो मेगलोमेनियक होना एक प्रकार के मानसिक रोग का प्रतीक है। इस शब्द का भावार्थ नरेन्द्र मोदी पर पूरी तरह से लागू होता है। मोदी ने अपने 15 अगस्त के भाषण में जो कुछ कहा उनकी इसी मानसिक स्थिति का परिचायक है। उस दिन वे जिस भाषा में बोले उससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वे प्रधानमंत्री पद के अघोषित उम्मीदवार ही नहीं हैं, वे प्रधानमंत्री ही हैं।  

? एस.एस.हरदेनिया


भारत : सफलता का जश्न मनाने का समय

      त 15 अगस्त को भारत का 67वां स्वाधीनता दिवस मनाया गया। सांस्कृतिक, धार्मिक व भाषायी विभिन्नताओं से परिपूर्ण, 127 करोड़ की जनसंख्या का यह देश, अपना संसदीय प्रजातंत्र कायम रखने में सफल रहा है। इसके विपरीत, कई अन्य देश अराजकता के भंवर में फंस गए हैं।

 

? बुध्ददेव पंडया,एमबीई


ठहर जाना एक जुम्बिश का

अंधश्रध्दा के खिलाफ संघर्षरत एक संग्रामी की मौत

      पुणे के निवासियों के एक बड़े हिस्से के लिए मुला मुठा नदी के किनारे बना ओंकारेश्वर मंदिर वह जगह हुआ करती रही है जहां लोग अपने अन्तिम संस्कार के लिए ले लाए जाते रहे हैं। इसे विचित्र संयोग कहा जाएगा कि उसी मन्दिर के ऊपर बने पूल से अल सुबह गुजरते हुए डा नरेन्द्र दाभोलकर ने अपनी झंझावाती जिन्दगी की चन्द आखरी सांसें लीं। एक जुम्बिश ठहर गयी, एक जुस्तजू अधबीच थम गयी।

 

? सुभाष गाताड़े


नये कम्पनी कानून के प्रावधान और सामाजिक जिम्मेवारियां

        कंपनी अधिनियम 1956 को बदलकर एक नया कंपनी कानून बनाने की कवायद पिछले लगभग दो दशकों से चल रही थी। पिछले 8 अगस्त को राज्य सभा द्वारा कंपनी विधोयक को पारित करने के बाद कंपनी अधिनियम 2013 का रास्ता साफ हो गया है। अन्य महत्वपूर्ण बातों के अलावा इसमें कुल लाभ का दो प्रतिशत सामाजिक दायित्वों के लिए व्यय करने की अनिवार्यता का प्रावधान भी है।  

? वीरेन्द्र जैन


शादी का पंजीकरण

       विवाह पंजीकरण वाला बिल राज्यसभा में पारित हो गया है। अब जन्म और मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण वाले कानून में ही संशोधन कर विवाह पंजीकरण को भी जोड़ दिया जाएगा तब कानून बन जाने पर वह देश भर में सभी समुदायों एवं धर्मों के दम्पतियों पर लागू हो जाएगा। हालांकि कानून मंत्री ने यहभी सफाई दी है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिना पंजीकरण वाली शादियां अवैध मानी जाएंगी तथा यह भी कहा है कि भारत में विभिन्न समुदायों में भिन्न रीति रिवाजों के मद्देनजर राज्य सरकारें इस कानून को अपने हिसाब से लागू करेंगी।     

 

? अंजलि सिन्हा


प्रदेश न बने पापुआ न्यूगिनी

        वाकई यह एक राहत और खुशी की खबर है कि म.प्र. ने देश मे ऊंची विकास दर दर्ज कराई और बंपर कृषि-उत्पादन हुआ। वित्तीय वर्ष 2012-13के लिए कृषि विकास दर 14.28प्रतिशत रही, साथ ही जी.एस.डी.पी. (ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट) मे वृध्दि दर 10.02प्रतिशत रही। बेशक मध्य-प्रदेश पर से 'बीमारु राज्य' होने का कलंक मिटा है। बढ़ती विकास दर और कृषि उत्पादन मे हम अग्रणी राज्यों के श्रेणी मे आ गये हैं। 

? डॉ. अर्चना मुठये


प्ले स्टेशन पर हिंसा का पाठ पढ़ते मासूम

       ज हमारे पास अपनी संतानों के लिए समय नहीं है। निश्चित रूप से कल उनके पास भी हमारे लिए समय नहीं होगा। जो आज आप कर रहे हैं,कल वे भी वही करेंगे,इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं आएगा। बच्चों को हर तरह की सुविधाएं देकर हम यह समझ रहे हैं कि हम अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो रहे हैं। पर वे सुविधाएं उन मासूमों को कितना प्रभावित कर रही हैं, इसे जानने-समझने का समय हमारे पास नहीं है। आज कंप्यूटर पर बच्चे यदि वीडियो गेम खेल रहे हैं,तो हम यह सोचते हैं कि इससे बच्चे का मस्तिष्क विकसित होगा।    

 

? डॉ. महेश परिमल


  26 अगस्त-2013

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