संस्करण: 26जनवरी-2009

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गणतंत्र दिवस पर विशेष
विधानसभा चुनाव 2008 के बहाने

णतंत्र में हम प्रति दिन प्रत्येक घटना पर जनमत नहीं करा सकते इसलिए समय समय पर कराये गये चुनावों के परिणामों को ही जनादेश की दिशा मान कर अपने निष्कर्ष निकालते रहते हैं। इसके लिए राजनीतिक दल अपने घोषणापत्र और कार्यक्रम घोषित करते हैं >वीरेंद्र जैन


अब कर्नाटक में हिन्दुत्व आतंकवाद की दस्तक

हुबली में पिछले साल हुए बम विस्फोट किसी को याद हैं ? छुट्टी के दिन किए गए इन धमाकों में कोई हताहत तो नहीं हुआ था, लेकिन अदालत की इमारत को काफी नुकसान पहुंचा था।जैसा कि आम तौर पर किया जाता है इसके लिए 'सिमी के तथा जिहादी आतंकवादी >सुभाष गाताड़े


सत्ता के लिए संघर्ष-
पार्टी बड़ी या व्यक्ति ?

केंद्र में और राज्यों में विभिन्न राजनैतिक दल सत्ता पर काबिज होने के लिए निर्वाचनों में हिस्सा लेकर जनादेश हासिल करने की कवायदों में अपने-अपने चुनावी घोषणापत्रों में जनता के लिए लुभावने वायदों की फेहरिस्त प्रस्तुत करते हैं। मतदातागण बड़ी ही आशा, विश्वास और वायदों पर भरोसा करके पांच वर्ष के लिए उन्हें केंद्र या राज्य की सत्ता के संचालन >राजेंद्र जोशी


पत्रकारिता की बलिवेदी पर
शहीद श्रीलंकाई पत्रकार का घोषणापत्र

श्रीलंका के समाचार पत्र 'दी सनडे' लीडर के संपादक लसनका विक्रमतुंगा की गत 6 जनवरी को उस समय हत्या कर दी गई जब वे अपने कार्यालय जा रहे थे। विक्रमतुंगा श्रीलंका की सरकार के विरुध्द अपने सैध्दांतिक विरोध के लिए जाने जाते थे। >एल.एस.हरदेनिया


राजनीतिक अस्थिरता से
झारखण्ड का भविष्य अधर म
ें

त्ता मोह की जकड़न और उच्च महत्वाकांक्षा के कारण झारखण्ड में भी लोकतंत्र की मर्यादा की लगातार उड़ रही धज्जियों ने हास्यास्पद स्थिति पैदा कर दी है। राष्ट्रपति शासन समस्या का हल नहीं है। बिना विधायक के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने की चयन और सत्ता के दुरूपयोग ने अकस्मात झारखण्ड को सुर्खियों में ला दिया है। >अंजनी कुमार झा


पेट्रोलियम पदार्थ
बने पर्यावरणीय संकट

पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला और प्राकृतिक गैसों के लगातार बढ़ते उपयोग से पैदा हो रहा प्रदूषण पर्यावरण के लिए बढ़ा खतरा साबित हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार इससे भारत को लगभग 200 खरब रुपये की वार्र्षिक हानि उठानी पड़ रही हैं। यहीं नही वायु में विलोपशील हो जाने वाले इस प्रदूषण से सांस, फेफडों, कैंसर हृदय व त्वचा रोग संबंधी बीमारियों में इजाफा हो रहा हैं। >प्रमोद भार्गव


''कृषि पेट्रोलियम तथा पर्यावरण के क्षेत्र में एक क्रांति-बायो डीजल''
भारतीय अर्थव्यवस्था में पेट्रोलियम का एक विशेष महत्व है। देश में हाइड्रोकार्बन प्राथमिक ऊर्जा का एक मुख्य स्रोत है जो कुल ऊर्जा की आवश्यकता का 35 प्रतिशत है। जबकि हाइड्रोजन के उपयोग का विश्व औसत 60-61 प्रतिशत है। देश में हाइड्रोजन के स्रोत बहुत कम हैं। फलस्वरूप तेजी से बढ़ता आयात बिल, भारतीय व्यापार के संतुलन >स्वाति शर्मा


मुक्ति आंदोलन
वनवासी महिलाओं का

क्षिण गुजरात के नवसारी जिले में वासंदा क्षेत्र। वहां से 45 कि.मी. दूर वलसाड़ जिले का धरमपुर और कपराड़ा क्षेत्र। टीलेनुमा प्रदेश, सर्पाकार रास्ते, कुछ दूर-दूर के अंतराल में बसे गांवों के बांस से बने छोटे-छोटे घर, जहां बसते है धरती के सबसे पुराने रहवासी-गुजरात की आदिवासी प्रजा। वारली, चौधारी, कोटवालिया, >मीनाक्षी जोश


कृषि से विमुख होता किसान

चाहे भारतीय कृषि नीति यह वकालत करे या आमजन इस सुखद स्वप्न में जिये कि हमारे यहां खेती-किसानी एक जीवन शैली की तरह है, हाल ही में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित मशहूर पत्रकार और ग्रामीण मामलों के जानकार पी.साईनाथ ने इस अवधारणा का भ्रम दूर करते हुए कहा है >शब्बीर कादरी


ओजस्वी राष्ट्रकवि और मूर्धन्य पत्रकार दादा माखनलाल चतुर्वेदी
30 जनवरी को पुण्यतिथि पर विशेष

बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे दादा माखनलाल

मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढाने, जिस पथ जाएं वीर अनेक॥

पुष्प की अभिलाषा शीर्षक कविता से ली गई यह पंक्ति दादा माखनलाल चतुर्वेदी के राष्टप्रेम और त्याग को दर्शाता है। यह सिर्फ पुष्प की अभिलाषा ही नहीं उनके जीवन की भी अभिलाषा थी। >राम सुरेश सिंह


खोता जा रहा चांद का मुखड़ा

''चौदहवीं का चांद हो, आफताब हो
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो।....''
''चांद सा मुखड़ा, क्यों शरमाया....''
''खोया खोया चांद, खुला आसमान.... आंखों में सारी रात जायेगी....।''>डॉ. देवप्रकाश खन्ना


26जनवरी2009

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