संस्करण: 26जनवरी-2009

''कृषि पेट्रोलियम तथा पर्यावरण के क्षेत्र में एक क्रांति-बायो डीजल''

 

स्वाति शर्मा

भारतीय अर्थव्यवस्था में पेट्रोलियम का एक विशेष महत्व है। देश में हाइड्रोकार्बन प्राथमिक ऊर्जा का एक मुख्य स्रोत है जो कुल ऊर्जा की आवश्यकता का 35 प्रतिशत है। जबकि हाइड्रोजन के उपयोग का विश्व औसत 60-61 प्रतिशत है। देश में हाइड्रोजन के स्रोत बहुत कम हैं। फलस्वरूप तेजी से बढ़ता आयात बिल, भारतीय व्यापार के संतुलन को प्रभावित करता है। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 70 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पाद विदेशों से आयात करता है, परिणाम स्वरूप कीमती विदेशी मुद्रा का एक बड़ा भाग केवल पेट्रोलियम आयात पर खर्च हो जाता है। चूंकि हम तेल खरीदने के लिए विवश हैं इसीलिए तेल उत्पादक देश हमेशा मनमाने ढंग से अपनी शर्तों (चाहे वे राजनीतिक हों या आर्थिक) के साथ तेल की दरें रखते हैं। भारत में तेल खपत 80 प्रतिशत डीजल तथा 20 प्रतिशत पेट्रोलियम की है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में डीजल के महत्व को दर्शाती है। केवल कृषि के ही क्षेत्र  को लें तो इसमें कुल डीजल खपत का 8 से 10 प्रतिशत खर्च होता है जो लगभग 28 लाख ट्रेक्टरों, 60 लाख डीजल पंप सैट, हार्वेस्टरों तथा अन्य कृषि यन्त्रों द्वारा होता है। वैसे तो डीजल की कमी का प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिखेगा लेकिन कृषि के क्षेत्र में इसके प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता, हालांकि भारत के पास काफ़ी मात्रा में तेल का रिजर्व स्टॉक है। उपरोक्त कारणों से ऊर्जा के अन्य वैकल्पिक स्रोत जैसे बायोगैस, सौर ऊर्जा, वनस्पति तेल तथा बायो डीजल पर धयान केंद्रित किया गया है।

वनस्पति तेलों का उपयोग डीजल ईंधन के रूप में किए जाने का इतिहास बहुत पुराना है। लेकिन इसके साथ सबसे बड़ी समस्या इसका डीजल की तुलना में अधिक गाढ़ापन है। जो इसके सफलतापूर्वक उपयोग में बाधाएं उत्पन्न करता हैं। वनस्पति तेलों की कमी के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1992 में बायो डीजल का आविष्कार किया गया, इसमें वनस्पति तेल को अल्कोहल तथा कास्टिक सोड़ा के साथ मिलाया जाता है, रासायनिक क्रियाओं के परिणाम स्वरूप बायो डीजल तथा ग्लिसनरीन प्राप्त होती है। बायोडीजल की अशुध्दियां दूर करने पर यह पारदर्शी ग्लिसरीन का प्रयोग साबुन तथा दूसरे उतपाद बनाने में किया जा सकता है।

बायोडीजल की क्षमता, डीजल की तरह ही होती हैं। 20 प्रतिशत बायोडीजल का पेट्रोलियम डीजल के साथ मिश्रण का प्रयोग लगभग सभी डीजल चलित इंजनों में कर सकते हैं। इसके लिए इंजन में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं होती एवं इंजन वहीं क्षमता देता है। डीजल इंजनों में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर यौगिक आदि में कमी आएगी। जैसे-जैसे डीजल में बायो डीजल की मात्रा बढ़ती जाएगी, परिणाम बेहतर मिलने लगेंगे।

भारत सरकार इस दिशा में कार्यशील है। योजना आयोग की पर्यावरण, वन तथा वन्यजीवन पर गठित कमेटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रतनजोत नामक अखाद्य पौधो जिसका तेल बायोडीजल बनाने में उपयोग किया जा सकता है के प्लांटेशन पर अधिक धयान दिया जाएगा। एक हेक्टेयर में रतनजोत के 2500 पौधो लगाए जा सकते हैं। सामान्यत: यह पौधाा दूसरे वर्ष से अगले 40-50 वर्षों तक बीज देता रहता है। जानवर इसे नहीं खाते अत: फेन्सिंग की आवश्यकता नहीं होती। इसके बीज में 40 प्रतिशत तेल होता है। ऊर्जा का यह वैकल्पिक स्रोत बायो डीजल भारत की आर्थिक स्थिति में क्रांति ला सकता है। योजना आयोग द्वारा 18 राज्यों के 200 जिलों को चुना है, जहां रतनजोत की खेती की जाएगी। इसके अलावा बंजर भूमि विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भी अखाद्य तेलों के पौधो लगाए जा रहे हैं, जिनसे बायो डीजल बनाया जास कता है। पड़त भूमि विकास हेतु 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष 1000 करोड़, रुपयों की आवश्यकता होगी, इससे लाखों ग्रामीणों को पौधा रूपाई, उनके रखरखाव, सिंचाई, बीजों को एकत्रित करने तथा उनका स्थानांतरण एवं प्रोसेसिंग हेतु रोजगार मिलेगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन तथा भारतीय रेल्वे में भी रेलों को बायोडीजल व डीजल के मिश्रण से चलाने की बात चल रही है। यह विश्वास किया जा रहा है कि रेलवे द्वारा कुल डीजल खपत का 20 प्रतिशत बायोडीजल होगा। रेल्वे ट्रेक के दोनों ओर खाली पड़ी भूमि पर रतनजोत लगाया जा सकेगा जो रेल्वे की कुल डीजल की आवश्यकता की 10 प्रतिशत की पूर्ति कर सकेगा।

बायो डीजल के उपयोग में जो सबसे बड़ी बाधा आ रही है इसकी कीमत। क्या यह डीजल की तुलना में सस्ता होगा ? जब तक इसके उत्पादन में वृध्दि नहीं हो जाती यह कुछ महंगा तो साबित होगा। इसकी कीमत भले ही 10 से 20 प्रतिशत अधिक है, लेकिन बढ़ी हुई कीमत की तुलना में 5 से 20 प्रतिशत तक पर्यावरण साफ़ सुथरा रहता है, लाखों लोगों को रोजगार मिलता है, भारत को कम मात्रा में क्रूड आइल आयात करना होगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी व संयुक्त राज्य अमेरिका भी बायो डीजल के समर्थक हैं। उसके अनुसंधान के अनुसार बायो डीजल के प्रयोग से लगभग 90 प्रतिशत तक कैंसर के खतरों से बचा जा सकेगा। अत: बायो डीजल के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए, इसका अधिक उपयोग ही इसके अधिाक उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकेगा।

 

स्वाति शर्मा