संस्करण: 25 नवम्बर-2013

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हर जांच से बचना क्यों चाहते हैं,

शाह और 'साहब'

       रेंद्र मोदी की राजनीति से बेशक कोई सहमति न हो, लेकिन उनके चरित्र को लेकर कोई शंका नहीं है, और भविष्य में ऐसा होगा इसकी आशंका भी नहीं की जा सकती। राजनीति में कुछ नेता हैं, जो राजनीतिक तौर पर भले ही कैसे भी हों, लेकिन चारित्रिक रूप से उन पर संदेह नहीं किया जा सकता। फिर भी मामला गंभीर है और भारतीय जनता पार्टी की युवती के पिता के हवाले से सफाई ने इसे और पेचीदा बना दिया, इसलिए न चाहते हुए भी चर्चा और जासूसी कांड के बीच में मोदी का नाम आ ही जाता है।

? विवेकानंद


आचरणहीन भी हैं भाजपा के पीएम

नरेन्द्रभाई मोदी

        पार्टी विद डिफरेंस भारतीय जनता पार्टी के नरेंद्रभाई मोदी जब भी कोई टिप्पणी करते हैं तो उनके पूरे कुनबे की फासिस्ट सोच उजागर हो जाती है। भाजपा में प्रधानमंत्री पद के सबसे योग्य व्यक्ति के राजनीतिक तौर-तरीकों और इस्तेमाल किए गए शब्दों से उनकी जाहिल सोच बार-बार उजागर हो जाती है। छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के निर्वाचन क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी को निशाना बनाया। केंद्र द्वारा छत्तीसगढ़ को दी जा रही राशि के संदर्भ में राहुल गांधी को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि ''क्या पैसा तुम्हारे मामा के घर से आता है''।

? अनुज शुक्ला


लोकसभा चुनावों के पूर्व संघ परिवार बांटने वाले मुद्दे उठाने की तैयारी में

     पांच राज्यों में विधानसभाओं के चुनावों के बाद संघ परिवार देश में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की तैयारी में अभी से जुट गया है। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये उसने कुछ अत्यधिक संवेदनशील मुद्दों को चुना है। मेरी अभी हाल की असम यात्रा के दौरान इस संबंध में मुझे स्पष्ट संकेत मिले हैं। असम के जानकार पर्यवेक्षकों ने मुझे बताया कि जिन मुद्दों को लेकर संघ परिवार देश को बांटने का प्रयास करेगा उनमें बंगलादेशियों से संबंधित मुद्दा प्रमुख होगा। इसके अतिरिक्त साम्प्रदायिक हिंसा से निपटने वाला प्रस्तावित विधेयक संघ परिवार का दूसरा प्रमुख मुद्दा होगा। संघ परिवार वर्षों से यह दावा कर रहा है कि न सिर्फ असम में वरन् पूरे देश में भारी संख्या में बंगलादेश से आये मुसलमान रह रहे हैं।

 ? एल.एस.हरदेनिया


फेसबुक पर दौड़ता भाजपाइयों का

सांप्रदायिकता और नफरत का कारोबार

      त्तर प्रदेश के मुजफरनगर, शामली और आस-पास के जिलों में पिछले महीने हई भीषण सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने के मुख्य आरोपियों में से एक,भाजपा विधायक संगीत सिंह सोम पर रासुका में निरुध्द होने के दौरान जेल से ही सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक को चलाने और उस पर आपत्तिजनक,भड़काऊ व राष्ट्र विरोधी पोस्ट लिखने, उसे शेयर करने का एक सनसनीखेज मामला हाल ही में सामने आया है।   

? हरेराम मिश्र


इस चुनावी परिदृश्य से

किस परिवर्तन की उम्मीद

        म चुनाव में हालाँकि अभी लगभग एक साल का समय बाकी है लेकिन देश में जो चुनावी परिदृश्य दिखाई पड़ रहा है वह न सिर्फ निराशाजनक बल्कि कई मायनों में भयकारी भी है। चुनाव परिवर्तन के लिए होते हैं लेकिन राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक जो चुनावी परिदृश्य हम देख रहे हैं उसमें 'मच्छिका स्थाने मच्छिका' से अधिक कोई संभावना दिख नहीं रही है। पॉच राज्यों के चुनाव हो रहे हैं और साथ में केन्द्र में कब्जे को लेकर सत्ता-संघर्ष भी चल रहा है लेकिन यह समूचा चुनावी परिदृश्य हताशा पैदा करने वाला ही है।

 ?   सुनील अमर


गुरूजन उपेक्षित रहे भाजपा के राज में?

           थोथा चना बाजे घना की कहावत को चरितार्थ करते हुए भाजपा और उसके सहयोगी संगठन गुरूपुर्णिमा या शिक्षक दिवस जैसे अवसरों पर गुरूजनों का अभिनंदन करने में काफी सक्रियता दिखाते हैं। लेकिन वास्तव में गुरूजन   अर्थात शिक्षकों के हितों के सर्वाधिक उपेक्षा भाजपा सरकार ने ही की है। चाहे शिक्षक संवर्ग की बात हो या अध्यापक संवर्ग या फिर कालेजों में कार्यरत प्राध्यापक सभी के साथ लगातार उपेक्षा  और अपमान की बात सामने आई है।  

? डॉ. सुनील शर्मा


क्षमा सावन्त की जीत पर

इतना मौन क्यों ?

      मेरिका के सिएटल के मतदाताओं ने पिछले दिनों इतिहास रचा। आधुनिक इतिहास में पहली बार उन्होंने किसी सोशालिस्ट को सिटी कौन्सिल के लिए चुना है। और वह है भारतीय मूल की क्षमा सावन्त। रिसर्च के मुताबिक विगत सौ साल में कोई भी सोशालिस्ट प्रत्याशी नगरपरिषदों के चुनावों में जीता नहीं है।

?  अंजलि सिन्हा


सच बेनकाब, बीस सालों से

देश से हर दिन मिट रहे हैं 2035 किसान

     नगणना के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश में 1991 के बाद से किसानों की संख्या करीब 1.50 करोड़ घट गई है, जबकि 2001 के बाद यह कमी 77 लाख से थोड़ी यादा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो पिछले बीस सालों में हर दिन औसतन 2035 काश्तकार या किसान अपनी स्थिति से बेदखल होते जा रहे हैं। साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक देश में ऐसे काश्तकारों की संख्या 9.58 करोड़ है जिनका मुख्य पेशा खेती है जो देश की कुल 121 करोड़ की आबादी के आठ फीसदी से भी कम है। यह संख्या 1991 में 11 करोड़ और 2001 में 10.3 करोड़ दर्ज की गई थी।

 

? राखी रघुवंशी


बदलेगा पुलिस का चेहरा

        फआईआर आपराधिक न्याय प्रक्रिया का पहला कदम है और इस पहले ही कदम के चलने में फरियादियों को सबसे ज्यादा तकलीफ का सामना करना पड़ता है। थाने में एक अदद एफआईआर लिखाने के लिए उन्हें कई पापड़ बेलने पड़ते हैं। सामान्य अपराध की तो बात ही छोड़ दें, गंभीर अपराधों में भी एफआईआर लिखने में पुलिस का रवैया नानुकुर का होता है। पुलिस की पहली कोषिष होती है कि एफआईआर लिखने को किसी भी तरह से टाला जाए। जब दवाब ज्यादा बढ़ता है, तभी पुलिसकर्मियों की कलम चलती है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें पुलिस ने एफआईआर लिखने में खूब हीलाहवाली की।

? जाहिद खान


हिंदी का शोककाल

      हंस के सम्पादक और नई कहानी की त्रयी के सदस्य रहे राजेन्द्र यादव के अवसान के बाद से ही मानो हिंदी का शोककाल चल रहा है। गोरखपुर से ख्यात कवि और आलोचक परमानंद श्रीवास्तव जी के जाने की खबर आई फिर लखनऊ से प्रख्यात व्यंग्यकार के पी सक्सेना जी के। अभी हम इस आघात से उबर भी नहीं पाए थे कि हिंदी-राजस्थानी के अत्यंत सम्मानित लेखक विजयदान देथा ने अपने गाँव बोरुन्दा में अपनी आखिरी साँस ली। जीवन भर बच्चों के लिए उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करने वाले हरिकृष्ण देवसरे का बाल दिवस वाले दिन ही चले जाना जैसे एक बड़ी विडंबना रच गया तो उसके तीन दिन बाद ही वरिष्ठ कवि और लेखक ओम प्रकाश वाल्मीकि जी के निधान की खबर देहरादून से आई।     

 

? अशोक कुमार पाण्डेय


1 दिसम्बर : विश्व एड्स दिवस पर विशेष

जागरूकता से सम्भव है

एड्स पर नियंत्रण

        विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य संस्थाओं द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार विश्व में एचआईवी संक्रमित लोगों की ताजा संख्या 3 करोड़ 40 लाख है। इनमें से अधिकतर लोग गरीब तथा पिछड़े देशों में रहने वाले हैं। भारत इस बीमारी से जूझने वाले देशों में तीसरे नम्बर पर है। पहले स्थान पर दक्षिण अफ्रीका और दूसरे स्थान पर नाइजीरिया है। गौरतलब है कि संक्रमण के कारण विगत तीस वर्षों में दो करोड़ पचास लाख लोगों की मौत हुई, तब पहली बार एचआईवी की पहचान हो सकी।

? डॉ. गीता गुप्त


  25 नवम्बर2013

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