संस्करण: 25  जून-2012

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT


विरोध के लिए विरोध और

विघ्न संतोषी

           राष्ट्रपति जैसे गरिमामय पद के लिए जब देश के तमाम बुध्दिजीवी दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील कर रहे हैं,वहीं बड़े ताजुब की बात है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसा संगठन जो स्वयं राष्ट्रभक्त,अनुशासन प्रिय और सिध्दांतवादी होने का दावा करता है,उसके मुखिया अपनी ही पार्टी को नसीहत देते हैं कि अगले चुनावों में यदि सफलता की आकांक्षा है तो सरकार से लड़ते दिखो, भले ही पराजित हो जाओ। 

  ? विवेकानंद


भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन का नेतृत्व और उसके विरोधाभास 

        देश में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है और यही कारण है कि जब भी कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ खड़ा होता हुआ दिखता है तो उसके पीछे बहुत सारे लोग यह सोचे बिना ही आ जाते हैं कि जब तक यह समर्थन किसी सार्थक परिवर्तनकारी राजनीति और राष्ट्रव्यापी संगठन के साथ नहीं जुड़ता तब तक किसी परिणिति तक नहीं पहुँच पाता। जय प्रकाश नारायण का आन्दोलन हो या वीपी सिंह का अभियान हो वे व्यापक राजनीतिक दृष्टि और संगठन के बिना चलाये गये थे इसलिए बिना कोई परिवर्तन किये बड़ी घटनाएं बन कर रह गये। 

? वीरेन्द्र जैन


गुजरात में सरकारी पत्रिका में अश्लील सामग्री

चिंतनीय है भाजपा की यह गिरावट!   

    हाल के दिनों में भाजपा से कोई भी खबर ठीक नहीं आ रही है। पार्टी के संगठन से लेकर उसके तमाम बड़े नेताओं व नीति-नियंताओं के बयानों व कृत्यों से देश की यह दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी एक ऐसे झंझावात में फॅंसी दिख रही है जिसमें से इसका बिना टूटे हुए निकल आना मुश्किल लग रहा है। कर्नाटक में फजीहतों का सिलसिला अभी थमा भी नहीं था कि बीते पखवारे मुम्बई में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मोदी बनाम जोशी प्रकरण ने इसकी सांगठनिक नंगई को उजागर कर दिया। पार्टी में वयोवृध्दों की लज्जाजनक उपेक्षा का जो दौर एक लम्बे समय से चल रहा है ...

? सुनील अमर


एन.डी.ए. में मची गहमागहमी

पी.एम.पद के लिए नितीश भी दावेदार

          राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी को लेकर विभिन्न राजनैतिक दलों में चल रही खींचतान के बीच आगामी लोकसभा निर्वाचन के बाद प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने की राजनैतिक लालसाऐं उभरकर सामने आने लगी है। आम चुनाव के बाद देश की संसद में राजनैतिक दलों की क्या स्थितियां बनेगी, यह एक अलग बात है किंतु अगला प्रधानमंत्री कौन बने इस मुद्दे को लेकर एन.डी.ए. के दलों के बड़े नेताओं में अभी से गुदगुदी पैदा होने लगी है। कई दलों को मिलकर एन.डी.ए. का गठन हुआ है। प्राय: प्रत्येक दल अभी से दिवास्वप्न देखने लग गये हैं कि अगला प्रधानमंत्री एन.डी.ए. से ही होगा।

? राजेन्द्र जोशी


अवसर लागत या सिर्फ एक अन्य अवसर?

         वसर लागत किसी भी कार्य की वह लागत है जिसे लगाया तो अधिक लाभ की आशा में जाता है किन्तु उस अवसर का अपेक्षित उपयोग नही कर उसे खो दिया जाता है।  नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक श्री विनोद राय ने 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में 1,76,000करोड़ के नुकसान का आकलन करने में इस अवधारणा का उपयोग किया है। इस संदिग्ध भारी-भरकम ऑंकड़े पर पंहुचने के लिये श्री राय ने कार्य की कीमत का विश्लेषण करने के लिये बैंजामिन फ्रैंकलिन के सारगर्भित तर्क का उपयोग किया है --''जो व्यक्ति अंडे देने वाली मुर्गी को मार देता है वह उसकी हजार भावी पीढ़ियों को मार देता है।'' किन्तु इस तर्क को राज्य पर लागू करने में समस्या यह है कि राज्य कोई व्यवसाय नही है।

 ? मोहन गुरूस्वामी


भारतीय जेल में अल्पसंख्यक

                  स्कूल एवं नौकरियों में आबादी में अपने अनुपात से बहुत कम प्रतिनिधित्व रखनेवाले अल्पसंख्यकों की तादाद क्या भारत के जेलों में आबादी में उनके अनुपात से काफी ज्यादा है ?भारत में मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन की पड़ताल करने के लिए गठित सच्चर आयोग ने पहली दफा इस असुविधाजनक लगनेवाले सवाल को उठाया था जिसमें यह बताया गया था कि जहां तक जेलों की आबादी का सवाल है, वहां पर उनकी संख्या आबादी में उनके अनुपात से कहीं दुगुनी या कहीं तिगुनी भी है।

? सुभाष गाताड़े


मोदी की नयी साम्प्रदायिक रणनीति

      हिंदुत्व के सबसे उन्नत प्रयोगशाला गुजरात में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशें तेज होती जा रही हैं। ताजा मामला पलिताना शहर का है जहां भाजपा के नियंत्रण वाले नगर पालिका परिषद ने अंडा समेत मांसाहार के बिकने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

? शाहनवाज आलम


इतने झंझावातों के बाद कैसे टिकेंगे मोदी?

      हमदाबाद, पटना और दिल्ली में कितनी और क्या समानता होनी चाहिए? यही कि तीनों अपने गृहराज्यों की राजधानियां हैं लेकिन इस वक्त सियासी पारा इन्हीं तीन शहरों में अधिकता से दृष्टिगत हो रहा है। अहमदाबाद में मोदी, दिल्ली पहुंचे केशूभाई पटेल और पटना में बैठे नितीश अपनी-ढपली अपना राग अलाप रहे हैं। इस सियासी समर में किसका सितारा बुलंद होगा यह तो समय के गर्त में छुपा है मगर तीनों की आपसी अदावत ने भविष्य की राजनीति को रोचक बना दिया है। न केवल राज्य की राजनीति वरन राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ना तय है।

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


गुमता बचपन

        भी कुछ दिन पहले खबरें आई थीं कि मध्यप्रदेश से भारी संख्या में महिलाओं और बच्चियों का अपहरण किया जाता है और उन्हें बेचा जाता है। अब यह तथ्य उभर कर आया है कि मध्यप्रदेश से छोटे बच्चों का अपहरण कर उन्हें भी बेचा जाता है। इस तरह यह प्रदेश महिलओं और बच्चों के लिए काफी असुरक्षित है। इस संबंध में अनेक सर्वेक्षण किये गये हैं जिनके आधार पर यह कहा जा सकता है कि छोटे बच्चे और बच्चियां बड़े पैमाने पर असामाजिक तत्वों की साजिश के शिकार हो रहे हैं।

? एल.एस.हरदेनिया


कई दरवाजों के पीछे की

कैद से झांकती औरतें

    ड़े और भीड़-भाड़ वाले शहरों में मनुष्य की चेतना का स्तर किस कदर लगवाग्रस्त हो चला हैं इसके उदाहरण आये दिन मीडिया की सुर्खियाँ बनते हैं। दिल्ली के रोहिणी इलाके मैं दिल दहला देने वाला मंजर सामजिक  असंवेदनशीलता का हालिया उदाहरण है। पिछले साल भी दिल्ली से लगे नोएडा मैं दो बहने जो कई सालों से अपने घर मैं कैद होकर मरणासन्न हालत मैं पहुँच गयी थी और अस्पताल मैं जेरे-खुराक उनमें से एक काल-कवलित भी हो गयी थी को शायद लोग भूले भी ना हों कि फिर वही वाकया उसी खौफनाक मंजर के साथ  सामने आ गया. किसी को भी नहीं पता था कि ...........

? राहुल शर्मा


भ्रूण हत्या, आधुनिक होते समाज में

बर्बरता की निशानी

     भ्रूण हत्या, आधुनिक होते समाज में बर्बरता की निशानी है। इसे बर्बरता के दर्जे में इसलिए रखा जाना चाहिए कि एक जिंदगी जो इस दुनिया में अभी आ भी नहीं पाई, उसे निर्ममता से कत्ल कर दिया गया। उसे दुनिया में आने से रोका गया। आने वाली जिंदगी और औरत के ऊपर ये जुल्म वो लोग करते हैं, जो धर्म और अहिंसा की बात करते हैं। गोया कि उन्हें इस बात का जरा सा भी मलाल नहीं होता कि उन्होंने जो कुछ किया, वो गलत है। महज एक बेटे की चाहत में हमारे मुल्क में हर साल लाखों बेटियां गर्भ में ही मार दी जाती हैं। ये बर्बरता उस दौर में जारी है, जब हमारी हुकूमतें भ्रूण हत्या के खिलाफ सख्त कानून बना चुकी हैं।

? जाहिद खान


सरकारी बनाम निजी स्कूल:

कौन अच्छा?

    रामगोपाल जी हमारे कस्बे के सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। लेकिन इस सत्र में वो पास के शहर में जाकर रहेगें क्योंकि उनके बच्चे पढ़ने वाले हो गए हैं जिनकों उन्हें किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल में डालना है। यहॉ की नौकरी तो अपडाउन से चल जाएगी?बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने की खातिर रामगोपाल जी स्वयं शिक्षक होते हुए भी शहर में बसने तैयार हैं। अकेले रामगोपाल ही क्यों गॉव और कस्बे का हर सुविधा संपन्न आदमी अपने बच्चों को लेकर शहर जाने तैयार है क्योंकि वहॉ के किसी निजी विद्यालय में अपने बच्चों का एडमीशन करवा कर उनके अच्छे भविष्य के प्रति आश्वस्त होना चाहता है?

? डॉ. सुनील शर्मा


27 जून मधुमेह जागृति दिवस पर विशेष

जागरूकता ही बचायेगी मधुमेह से

     विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, समूची दुनिया की छ: प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है। भारत को विश्व की मधाुमेह राजधानी कहा जाता है। इस समय भारत में लगभग पांच करोड़ मधुमेह रोगी हैं। वर्ष 2015तक यह बढ़कर सात करोड़ हो जाने की आशंका है अर्थात तब हर पांचवां मधुमेह रोगी भारतीय होगा। मधुमेह वृध्दि की दर चिंताजनक है। विश्व भर में इस रोग के निवारण में प्रति वर्ष 250से 400मिलियन डॉलर खर्च हो जाता है। हर साल लगभग 50लाख लोग नेत्रों की ज्योति खो देते हैं और दस लाख लोग अपने पैर गंवा बैठते है। मधुमेह के कारण प्रति मिनट छ: मौते होती हैं और गुर्दे नाकाम होने का यह प्रमुख कारण है। आज विश्व के लगभग 95 प्रतिशत रोगी टाईप 2 मधुमेह से पीड़ित है।

? डॉ. गीता गुप्त


राष्ट्र निर्माण से जुड़े साधु समाज

    साधु समाज की रचनात्मकता से जुड़ी एक खबर सामने आई है। गंगा नदी में प्रदूषण के खिलाफ जंतर मंतर पर द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती की अगुवाई में देश भर के साधु संतो ने एक दिनी आंदोलन- प्रदर्शन किया। यहां यह अचरज की बात है कि साधु समाज धारने पर बैठने से पहले राजघाट पहुंचा और वहां महात्मा गांधी की समाधि पर प्रार्थना की । हैरानी की बात यह भी कि देश के शंकराचार्य ने पहली बार जनहित के मसले पर धरना दिया। ये साधु इसलिए जुटे जिससे केंद्र सरकार की नींद खुले और पवित्र गंगा को प्रदूषण से मुक्ति मिले। अब यदि सरकार नहीं सुनती है तो तीन माह बाद यह साधु समाज फिर से जंतर मंतर पर एकत्रित होकर गंगा को बचाने के लिए शंखनाद करेगा।

 

? प्रमोद भार्गव


  25जून2012

Designed by-PS Associates
Copyright 2007 PS Associates All Rights Reserved