संस्करण: 25 जुलाई- 2011

 

 क्या भारतीय जांच
अधिकारी हर बार गाफिल रहेगें ?

 

? शेष नारायण सिंह

               अमरीकी जांच एजेंसी, एफ बी आई ने कश्मीरी अलगाववादी आन्दोलन के एक नेता को गिरफ्तार किया है जिसके ऊपर आरोप है कि वह अमरीकी नागरिक होते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी,आई एस आई के लिए काम करता था । उसने अमरीका में एक संगठन बना रखा था तो प्रकट रूप से तो कश्मीर के अवाम के हित में काम करने का दावा करता था लेकिन वास्तव में वह आई एस आई के कंट्रोल वाली एक संस्था चलाता था जो पूरी तरह से पाकिस्तान की सरकार के पैसे से चलती थी। उसने अमरीकी  संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को प्रभावित  करने के लिए आई एस आई के पैसे से लाबी ग्रुप  भी तैनात किया था। वर्जीनिया में रहने  वाले डॉ गुलाम  नबी नाम के इस आदमी के खिलाफ जांच के बाद एफ बी आई ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह आई एस आई का एजेंट है और इसके काम से अमरीकी कानून का उल्लंघन होता है । एफ बी आई के हलफनामे में लिखा है कि डॉ गुलाम नबी ने पाकिस्तानी सरकार के एजेंट के रूप में एक ऐसी साजिश का हिसा बन कर काम किया जिसके नतीजे अमरीकी हितों की अनदेखी करते थे। उन्होंने अमरीकी नागरिक होते हुए पाकिस्तान सरकार के लिए काम किया  और सरकार को अपने काम के बारे में जानकारी नहीं दी। ऐसा करना अमरीकी कानून के हिसाब से जरूरी है । डॉ गुलाम नबी के साथ इस साजिश में एक और अमरीकी नागरिक शामिल है जिसकी तलाश की जा रही है । पता चला है कि वह आजकल पाकिस्तान  में कहीं छुपा हुआ है । जहीर अहमद नाम का यह आदमी भी  अमरीकी नागरिक है और उसके ऊपर भी वही आरोप हैं जो डॉ गुलाम नबी के ऊपर लगे हुए हैं । आई एस आई के कश्मीर एजेंडा पर काम करने वाले डॉ गुलाम नबी ने पाकिस्तानी सरकार के मातहत काम करने की बात को कभी किसी से नहीं बताया.हालांकि वे करीब 20 साल से कश्मीर में पाकिस्तान की दखलंदाजी के खेल में शामिल हैं । अमरीका में वे कश्मीर की तथाकथित 'आजादी' के लिए संघर्षशील व्यक्ति के रूप में सक्रिय थे। अब जाकर अमरीकी जांच अधिकारियों को पता चला है कि वे वास्तव में आई एस आई के फ्रंटमैन थे। उन्होंने अमरीका की राजधानी ,वाशिंगटन डी सी मे कश्मीरी-अमेरिकन कौंसिल  (के ए सी ) बना रखा है और उसी के बैनर के नीचे अमरीकी राजनेताओं के बीच में घूमते थे। अब अमरीकी अधिकारियों ने भरोसे के साथ यह सिध्द कर दिया है कि के ए सी पूरी तरह से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का एक विभाग है । के ए सी वास्तव में आई एस आई का कश्मीर सेंटर है । आई एस आई ने इसी तरह के दो और सेंटर बना रखें हैं . एक ब्रसेल्स में है जबकि दूसरा लन्दन में ।

               अमरीका में सक्रिय इस पाकिस्तानी संगठन की जांच अमरीका केवल इसलिए कर रहा है कि इसमें पाकिस्तानी मूल के उसके दो नागरिक शामिल हैं औरपाकिस्तान सरकार के लिए काम करके उन्होंने अमरीका के कानून को तोडा है लेकिन भारत के लिए यह जांच बहुत ही अहम साबित हो सकती है पाकिस्तान की सरकार और वहां के नेता कहते रहते हैं कि कश्मीर में उनकी कोई दखलंदाजी नहीं है ,वहां तो कश्मीरी लोग खुद ही आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं और पाकिस्तान उन्हें केवल नैतिक समर्थन देता है सवाल है कि क्या नैतिक समर्थन देने के लिए अमरीका में ही अमरीकी नागरिकों को साजिशन पैसा देकर उनसे अपराधकरवाना उचित है जहां तक पाकिस्तान का सवाल है वह तो अब बाकी दुनिया में  आतंकवाद की प्रायोजक सरकार के रूप में देखा जाता  है लेकिन क्या भारत के सरकारी अधिकारियों और नेताओं को नहीं चाहिए कि वे भारत के हितों के लिए पूरी दुनिया में चौकन्ना रहें और जहां भी भारत के दुश्मन सक्रिय हों उनके बारे में जानकारी हासिल करें अफसोस  की बात यह  है कि भारत  की सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह से फेल है . मुंबई पर 26 नवम्बर 2008 को हुए हमलों में भी पाकिस्तानी आई एस आई की पूरी हिस्सेदारी को साबित कर पाने में नाकाम रही भारत की जांच एजेंसियों को सारी बात  का तब पता चला था  जब अमरीकी जांच एजेंसियों ने हेडली को पकड़ लिया था गौर करने की बात यह है कि अमरीकी जांच का मकसद 26/11 के हमले की पूरी जांच करना नहीं था वे तो केवल इसलिए जांच कर रहे थे कि 26/11 के हमले में  कुछ अमरीकी नागरिक भी मारे गए थे वर्जीनिया में डॉ गुलाम  नबी के पकडे जाने के बाद एक बार फिर साबित हो गया है कि भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां भारत के हितों के प्रति गाफिल रहती हैं

? शेष नारायण सिंह