संस्करण: 25फरवरी-2009

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''अखंड़ता के लिए शासक को सरदार पटेल बनना ही पडेग़ा''
कभी-कभी वृध्द आंखें अपने ही उत्तराधिकारी का चयन करने में धोखा खा जाती है। बाल ठाकरे का उदाहरण सामने है। उन्होनें उध्दव को अपनी राजनीतिक विरासत इस उम्मीद में सौंप दी थी कि उनके अधूरे >प्रमोद दुबे


               


     

भाजपा की उतरती कलई कैसा चेहरा? कैसी चाल? कैसा चरित्र?
मधयप्रदेश की भाजपा सरकार ने अपने लिए अपने हाथों गढे गये सारे विशेषणों की वैसे ही हत्या कर दी है जैसे कि कृष्ण कथा में कंस ने अपना सिंहासन बचाने के लिए  >वीरेन्द्र जैन


''भाजपा का दिवा स्वप्न, कांग्रेस की जीत''
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी विजय संकल्प यात्रा के दौरान कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा-आतंकवाद, सुरक्षा व नक्सलवाद को प्राश्रय कांग्रेस पार्टी द्वारा मिला है।   >राजेन्द्र श्रीवास्तव


      


                     

बीजेपी एक बार फिर हिन्दुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की राह पर
केन्द्र में काबिज यूपीए सरकार गर कोई अनहोनी नहीं हुई तो 2009 में अपना कार्यकाल पूरा करेगी.यानी अगले साल हमारे मुल्क में लोकसभा चुनाव होना है. जाहिर है आम चुनावों को  >ज़ाहिद खान


कांटो का ताज़ पहिना है सुरेश पचौरी ने
अंतत: मधयप्रदेश कांग्रेस के अधयक्ष पद में बहुप्रतीक्षित परिवर्तन हो ही गया। जब से सुभाष यादव ने अधयक्ष पद सम्हाला था पार्टी में एक प्रकार की मुर्दानगी छा गई थी। प्रदेश कांग्रेस में लगभग सभी गुट परिवर्तन चाहते थे इसक  >एल.एस.हरदेनिया


            


                  


उ.प्र. में सी.बी.आई. जाँच का नाटक
मुख्यमंत्री मायावती ने अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान सातवाँ मामला जाँच के लिए केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सी0बी0आई0 को सौंपा है और हमेशा की तरह एक बार फिर दोहराया है कि 'ताकि उन पर कोई पक्षपात >सुनील अमर


'अल्पसंख्यक' को पुनर्परिभाषित किया जाये
मुस्लिम-आरक्षण का उपाय ढूंढने वाली केन्द्र सरकार ने अन्तत: जनवरी 2008 में पचीस लाख अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा कर दी। इसके पहले यह ज्ञात करने के लिए ख़ासी क़वायद >डॉ. गीता गुप्त


             


    

प्राकृतिक प्रकोपों से झुलसता है किसान राजनैतिक दल सेंकते हैं रोटियां
अपने कृषि प्रधान देश की उपजाऊ माटी पर गर्व करने वाले हम भारतवासियों को गहरा धाक्का तब लगता है, जब प्रकृति के कोपभाजन का हम शिकार हो जाते हैं। कृषि हमारे देश का आर्थिक-आधार है। >राजेन्द्र जोशी


गांवों से आती सुखद बयार
विवाह सामाजिक परंपरा का एक अनिवार्य अंग हैं। लेकिन इस परंपरा पर आज भौतिकता हावी हो गई हैं। जिस वैवाहिक संस्कार पर समाज टिका है, अगर वही संस्कार समाज का अहित करने लगें तो क्या यह ज़रूरी नहीं है   > महेश बाग़ी


      


            


प्रत्यक्ष कृषि ऋण बढ़ाने की ज़रूरत
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसानों पर कर्ज़ के बोझ को लेकर एक बार फिर चिंता ज़ाहिर की हैं। पिछले दिनों फिक्की की सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार जल्द ही किसानों को>अखिलेश सोलंकी


परिसीमन की पीडा
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा प्रेषित नए परिसीमन को हरी झंडी देकर कई प्रमुख पार्टियों को मुश्किल में डाल दिया है। अब झारखंड और पूर्वोत्तार के चार राज्यों असम, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश एवं नागालैंड को  >एम.के.सिंह


          


        


अमेरिकी चुनाव : मुद्दे क्या हैं ?
चुनाव विशेषज्ञों की उम्मीदों के विपरीत महामंगलवार भी अमेरिकी चुनाव की तस्वीर स्पष्ट नहीं कर पाया। जहां रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों में जॉन मैकेनन अपने दोनों प्रतिद्वन्द्वियों मिट् रोमनी और पादरी माईकल हक्काबी पर >अशोक कुमार पाण्डेय


''रोकना होगा मिट्टी का विनाश''
दिन प्रति दिन बढ़ती जनसंख्या व घटते खाद्यान्न के अंतर को समाप्त करना वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता है। यह कैसे होगा, इस पर अनेक प्रकार से विचार चल रहा है, परन्तु गौर करें तो पाएँगे कि सर्वप्रथम मिट्टी की >स्वाति शर्मा


              


          


जोधा-अकबर के बहाने इतिहास से खिलवाड़
इतिहास को तोड़-मरोड़कर मुगले-आजम, झांसी की रानी की तरह 'जोधा-अकबर' को केवल फ़िल्मी अंदाज में परोसकर आशुतो गोवारिकर ने भारतीय संस्कृति को कलंकित करने का दुस्साहस किया है। राजपूतों की बेबसी, >अंजनी कुमार झा


 
                  25 फ़रवरी 2008
 

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