संस्करण: 25फरवरी-2008

''भाजपा का दिवा स्वप्न, कांग्रेस की जीत''
   राजेन्द्र श्रीवास्तव

भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी विजय संकल्प यात्रा के दौरान कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा-आतंकवाद, सुरक्षा व नक्सलवाद को प्राश्रय कांग्रेस पार्टी द्वारा मिला है।

इस पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपने प्रतिबार में भाजपा और उसके पी.एम. के दावेदार लालकृष्ण आडवाणी को राजग सरकार के कार्यकाल की घटनाओं की ओर याद दिलाई। उन्होंने कहा-पहले भाजपा शासित नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की निंदा करें। जिन्होंने इन लोगों ने बिना शर्त समझौते की बातें कहीं हैं। फिर कांग्रेस पर उंगली उठाएँ। नक्सली घटना राजग के समय में सबसे ज्यादा घटित हुई। छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखण्ड में 80 प्रतिशत नक्सली घटनाओं में वृध्दि हुई है। जम्मू कश्मीर में आतंकी हिंसा में 70 प्रतिशत कमी आई है। जबकि राजग की सरकार के समय में ही आतंकवाद की ज्यादा घटनाएं हुई है। संसद पर हमला उन्हीं आतंकियों ने किया, जिन्हें गृहमंत्री काल में आडवाणी ने कंधार भेजा था।

अक्षरधाम, रघुनाथ मन्दिर, लालकिला और जम्मू कश्मीर व मणिपुर की विधानसभाओं में आतंकी हमलों के लिये राजग सरकार जिम्मेदार रही है और दोषी है। आगरा सम्मेलन के दौरान कंधार काण्ड के बारे में पाक राष्ट्रपति से अटल बिहारी वाजपेयी ने मुशर्रफ से क्यों नहीं पुछा था।

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने कहा-पहले तो लालकृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री पद के योग्य नहीं हैं। राजग ने उन्हें नेता चुनने का फैसला हड़बड़ी में लिया गया है। आडवाणी बाबरी मसज़िद विधवंस के दोषी हैं और अगर इस मामले में जांच करने वाला लिब्राहन आयोग उन्हें दोषी करार देता है, तो राजग की सारी कवायद पर पानी फिर जाएगा।

उन्होंने कहा कि देश क्या वे विपक्ष को भी साथ लेकर नहीं चल सकते। आडवाणी ने गुजरात दंगों पर कोई दु:ख प्रकट नहीं किया था। राजग के पुराने सहयोगियों ने आडवाणी की दूरी की चर्चा करते हुए मोइली ने कहा ओमप्रकाश चौटाला, के राष्ट्रीय लोकदल व चंद्रबाबू नायडू के तेलगुदेशम का उन्हें समर्थन हासिल नहीं है। जबकि अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता का अभी कुछ भी तय नहीं है। भविष्य की चुनौतियों समूह की बैठक के संदर्भ में मोइली ने कहा कांग्रेस पार्टी 20 वीं सदी के अनुरूप 21 वीं सदी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती है।

कांग्रेस महासचिव और अमेठी के युवा सांसद राहुल गांधी ने नई दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई लालकृष्ण आडवाणी की अचानक मुलाकात में कहा कि कांग्रेस और भाजपा को एक दूसरे के साथ राजनैतिक विरोधियों की तरह पेश आना चाहिए न कि दुश्मनों की तरह। उन्होंने कहा भाजपा हमारी राजनैतिक विरोधी है ही और हमारे और उसके बीच बुनियादी मतभेद हैं।

कांग्रेस अधयक्ष सोनिया गांधी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मिली हार से हताश न होने की बात कही इस हार से हम निराश अवश्य हैं, लेकिन केन्द्र सरकार के कामकाज पर कोई असर नहीं होगा। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कड़ा परिश्रम किया वैसा अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ।  ''कांग्रेस सन्देश'' पत्रिका में कार्यकर्ताओं के नाम अपने पत्र में उन्होंने कहा कि गुजरात, हिमाचल प्रदेश की चुनाव हार से हमें सबक लेकर आगे बढ़ना है। इस पराजय का अर्थ यह नहीं कि हमारे आदर्श व सिध्दान्तों की पराजय हुई है।यह तो साम्प्रदायिक ताकतों की विजय है। इस चुनावी हार से कांग्रेस पार्टी को सबक लेना चाहिए ? कांग्रेस को पंजाब, उत्तराखण्ड व उत्तरप्रदेश में भी दयनीय पराजय का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मेरा कहना है कि वह कांग्रेस शासित राज्यों में सरकार के कार्यक्रमों को जनता तक ले जावें और विपक्ष शासित राज्यों में जनता के मुद्दों के साथ जुड़कर आन्दोलन करें। वहीं कांग्रेसी मुख्यमंत्रीगण संगठन को लेकर जनता से किए वादों को निभाए तो भविष्य की जीत निश्चित है।

वही दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की नई दिल्ली की बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की जीत का एक फार्मूला पेश किया गया। इस फार्मूले से हैरान भाजपा के ही नेताओं का कथन था कि अगर इसके आधार पर काम किया गया तो हमारा राम ही मालिक है। इस फार्मूले के हिसाब से तो कांग्रेस अगले चुनाव में पूरी 540 सीटों पर विजय प्राप्त हो जाऐगी। भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में जो जीत का फार्मूला पेश किया गया है वह किसी सब्जबाग़ से कम नहीं है। उसमें 1989 से लेकर 2004 तक हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा की 297 लोकसभा सीटों पर एक बार से ज्यादा बार चुनाव पार्टी जीत चुकी है। पार्टी उन्हीं सीटों पर पूरा धयान देंगी। इस फार्मूले को भाजपा की महिला नेता सुषमा स्वराज्य ने प्रस्तुत किया। उस पर लालकृष्ण आडवाणी ने आशा जताते हुए कहा कि पार्टी दो तिहाई बहुमत हासिल कर सकती है। राजग के स्थायी मित्र दलों-अकाली दल, शिवसेना, जनता दल व बीजू जनता दल की 64 सीटों को जोड़ दें जो वे कम से कम एक बार जीत चुके हैं, तो राजग द्वारा अब तक जीत गई सीटों की संख्या 361 पहुंचेगी।

भाजपा के इन दिवा स्वप्न देखने वाले दोनों नेताओं के कथन से कई पार्टी नेता भौचके हो गए हैं। उनका कहना तो यहाँ तक है कि अगर पार्टी इस आधार पर जीत का फार्मूला तैयार किया जाता है तो कांग्रेस को 1989 से लेकर अब तक हुए चुनाव में 540 सीटें मिली हैं। उसे देखते हुए हमारा चुनाव लड़ना ही बेकार है। बिना नाम बताए एक राष्ट्रीय नेता का कथन था कि हम पहली बार यह देख रहे हैं कि चुनाव रणनीति 4000 लोगों में सार्वजनिक रूप से बताई जा रही है। कामयाबी का एजेंडा तो गोपनीय होता है जो कि चंद लोगों के साथ बन्द कमरे में तय किया जाता है। इस फार्मूले पर अगर चले तो कांग्रेस पार्टी को अगले चुनाव में पूरी 540 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है।

राजेन्द्र श्रीवास्तव