संस्करण: 25 जनवरी-2010

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मध्यप्रदेश की ओर से चेतावनी
 

 कुछ सप्ताह पहले संडे एक्सप्रेस ने यह खबर प्रकाशित की कि भूख सूचकांक में मधयप्रदेश का 30.9 पर होना इथोपिया में भूख की स्थिति से भी खराब स्थिति थी। जबकि इसके दो पड़ोसी राज्य झारखंड और छत्तीसगढ़ की>रमेश फड़के


 

नकली नोट के प्रचलन
पर कैसे लगे लगाम


साल 2009 के अंतिम दिन नकली नोट का एक मामला भोपाल में फिर उजागर हुआ, इस तरह के मामले राजधानी में पूर्व में भी सामने आते रहे हैं और सच यह भी है कि आए दिन प्रकाशित होने वाली इन खबरों से अब >शब्बीर कादरी


 

....और अब सुदर्शन हुये
जिन्ना के नये प्रशंसक


 

दि संघ परिवार इसी दिशा में बढता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि भारतीय जनता पार्टी को अपना नाम भारतीय जिन्ना पार्टी रख्र देना पड़े।>वीरेंद्र जैन


 

शेख हसीना की यात्रा से
दोनों देशों के बीच मित्रता का नया मार्ग खुलेगा



ह सुखद संयोग ही है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के पूर्व, बांग्लादेश ने फिर से एक सेक्यूलर राष्ट्र बनने का फैसला किया। >एल.एस.हरदेनिया


 

विजयोत्सव और जन्मदिवस पर शालीनता से हो जश्न
बेहूदा लगती है दिखावे की नौटंकी



किसी भी विजय-उत्सव पर जन्मदिवस पर या अपने किसी प्रियजन की कोई खास उपलब्धि के अवसर पर प्रसन्नता से झूम उठना, नाच उठना मिठाई बांटना और गले मिलना जैसे प्रदर्शन करना मनुष्य का एक स्वाभाविक लक्षण है।>राजेंद्र जोशी


 

आत्महत्या करते बच्चे


मेरे लिये वे दिन काफी दुखद और कष्टदायक होते हैं जब किसी विद्यार्थी की 'आत्महत्या' की सूचना या खबर पढ़ता हूं, ठीक उसी तरह जिस तरह किसान आत्महत्या करते हैं। या दो-तीन या चार बेटियों के माता-पिता आत्महत्या करते हैं।>जीवन सिंह ठाकुर


 

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ :
जांच अभी बाकी है


सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। हमारे मुल्क की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने अभी हाल ही में, सोहराबुद्दीन शेख के भाई रबाबुद्दीन शेख की याचिका पर सुनवाई करते हुए, इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। >जाहिद खान


 

स्वाइन फ्लू के डर का लाभ उठाती दवा कंपनियाँ

भी आपने महसूस किया कि मीडिया में स्वाइन फ्लू की खबरें इतने आक्रामक रूप से क्यों परोसी जाती हैं? इसलिए कि हम इस बीमारी से डर जाएँ। अरे भई, हमारे देश में इससे अधिक मौतें तो टीबी, कैंसर और  >डॉ. महेश परिमल


 

पर आखिर पुरूष हैं कहां


       प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से महिलाओं पर हिंसा पुरूषों की सुविधाओं को बरकरार रखने का असरदार हथियार है। हमने यह देखा है कि महज़ हिंसा की धामकी औरतों को चुप्पी साधाने या फिर सब बातों को मानने के लिए बाधय कर देती है। >डॉ. महेश परिमल


 

30 जनवरी : गांधीजी की पुण्यतिथि पर विशेष
स्त्री-मुक्ति के विरोधी नहीं थे- महात्मा गांधी



गभग दो दशक से नारीवादियों को यह मिथ्या भ्रम है कि गांधाीजी स्त्री-मुक्ति के पक्षधार नहीं थे। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में स्त्री-शक्ति का भरपूर दोहन किया परंतु उनका धयान स्त्रियों की सामाजिक समानता एवं आर्थिक न्याय की ओर नहीं था। >डॉ. गीता गुप्त


 

समाज सेवा से स्वयं सेवा तक



  पने लिए जिए तो क्या जिए वाली कहावत पर अमल करने के लिए गैर सरकारी संगठन का आधार रखा गया जो समाज को विकास की राह पर अग्रसर रख सके. परंतु बदलते परिवेश के साथ-साथ आज गैर सरकारी संगठन यानी एनजीओ का