संस्करण: 24  अक्टूबर- 2011

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अडवाणी-मोदी मतभेद का प्रचार

कहीं पुरानी चाल तो नहीं

       पिछले दिनों मीडिया द्वारा अगले प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा उम्मीदवार के लिए वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी और नरेन्द्र मोदी के बीच प्रतियोगिता होने की कहानियां बड़े जोर शोर से प्रचारित की जा रही हैं।

                इस प्रचार से प्रभावित होकर भाजपा की स्वस्थ समीक्षा करने वाला मीडिया भी उनकी पुरानी चाल में फँसता नजर आ रहा है। सच तो यह है कि ......... 

  ? वीरेन्द्र जैन


कौन बनेगा प्रधान मंत्री : पार्ट 2

        कुछ समय पूर्व अमेरिका की एक प्राइवेट रिसर्च सर्विस ने बगैर रिसर्च किये वहीं से बैठे बैठे रिसर्च रिपोर्ट दे दी कि 2014 आम चुनावों में भाजपा की जीत हो सकती है तथा नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री पद के प्रबल दावेदार हो सकते हैं।  यह सुन कर भाजपा नेताओं की बांछें ऐसे खिल गईं जैसे भारत की राजनीति का फैसला अमेरिका से होता हो।  यह कुछ ऐसी बात हुई जैसे कोई अधेड़ किसी सुंदर युवती से प्रेम प्रसंग चलाने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगा रहा हो और उससे पैसे ऐंठने के लिये कोई दुश्मन व्यक्ति झूठ मूठ में यह कह दे कि सुंदरी भी तुम्हें पसंद करती है।

? मोकर्रम खान


आडवाणी और भाजपा का दोहरा चरित्र

      भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने के लिए जय प्रकाश नारायण के पैतृक गांव सिताब दियारा से अपनी पूर्व नियोजित रथयात्रा की शुरुआत कर दी है। कॉमनवेल्थ और 2जी स्पेट्रम घोटाले की शर्मिंदगी झेल रही यूपीए सरकार उनके निशाने पर है। वे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए और कांग्रेस को ऐसे घेर रहे हैं, मानो भाजपा देवदूतों की पार्टी है और इसमें भ्रष्टाचार नाम की कोई चीज है ही नहीं।

? मोहम्मद इफ्तेखार अहमद


संदर्भ : आडवानी की यात्रा

बडे बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकल

    ''बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले'' शायद यह कहावत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी अपनी मध्यप्रदेश यात्रा की समाप्ति पर अपने मन में दुहरा रहे होंगे।

                 मध्यप्रदेश में भाजपा का शासन है। आडवाणी स्वयं मध्यप्रदेश स्वयं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं पार्टी अध्यक्ष प्रभात की प्रशंसा कर चुके हैं। ?

एल.एस.हरदेनिया


दिवालिया होता मध्यप्रदेश

          बर है कि मध्यप्रदेश सरकार निजी वित्तीय संस्थाओं से एक हज़ार करोड़ का कर्ज़ लेने जा रही है। प्रदेश के संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है। जो प्रदेश प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर हो और जिसके नागरिक विभिन्न मदों में सरकार को कर दे रहे हों, उस प्रदेश की आर्थिक स्थिति जर्जर क्यों हो रही है ? ख़ासकर उस स्थिति में जब विकास कार्य लगभग ठप्प पड़े हों, तो कर्ज़ लेने की कोई वजह समझ में नहीं आती। सरकारी ख़जाना तो पहले से ही ख़ाली है और सरकार गले-गले तक कर्ज़ में डूबी है।

 ? महेश बाग़ी


भाजपा के लिए मध्यप्रदेश में फ्लॉप और अशुभ रही रथयात्रा

सफल दिखाने के लिए विज्ञप्ति जारी करना पड़ा

     प्रधानमंत्री पद के आतुर दावेदार भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी की मध्यप्रदेश में गुजरी रथयात्रा नितांत असफल और निरर्थक रही। रथयात्रा की जितनी मीडिया के माधयमों से पब्लिसिटी हुई प्राय: सभी ने इस यात्रा को निरर्थक, असफल और फ्लॉप बताया है। रथयात्रा जब प्रदेश के बाहर चली गई तब जाकर भारतीय जनता पार्टी को अपनी इज्जत बचाने के खातिर प्रेस विज्ञप्ति जारी करके यह दिखाना पड़ा कि 

? राजेन्द्र जोशी


माया की महत्वकांक्षा और दलित     

       त्तर-प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा इतनी बलवती हो गई है कि वे दलित उत्पीड़न की हकीकतों से दूर भागती नजर आ रही हैं। दलित यथार्यवाद से वे पलायन कर रही हैं। नोएडा में राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल व ग्रीन गार्डन के उद्धाटन अवसर पर कांग्रेस और भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने जो तेवर दिखाए उससे तो यही चिंता जाहिर होती है कि वे दलितों को मानसिक रूप से चैतन्य व आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की बजाए इस, कोशिश में लगी हैं कि ........

? प्रमोद भार्गव


'गरीब' प्रदेश का 'अमीर' पार्क         

    त्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने ग्रेटर नोयडा में 3,32,000 वर्ग मीटर में फैले और 700 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अपने 'ड्रीम पार्क'का विधिवत उदघाटन कर ही दिया इस पार्क का नाम 'राष्ट्रीय दलित स्थल' रखा गया है  उनका यह 'ड्रीम पार्क' अपनी शैशव अवस्था से ही विवादों में रहा है मगर मायावती ने तमाम विरोधों के बावजूद इसका विधिवत उद्धाटन कर विरोधियों को बोलने का मौका तो दे ही दिया है। और हो भी क्यों न आखिर प्रदेश के विकास और प्रदेशवासियों की मूलभूत आवश्यकताओं की अनदेखी कर उन्होंने इसका निर्माण करवाया है हालांकि....

 

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


इन हमलों के खिलाफ, अब आवाज उठानी होगी

     रिष्ठ वकील प्रशांत भूषण पर हाल ही में हुए हमले ने एक बार फिर हमारे सामने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। संविधान का अनुच्छेद 19 हर भारतीय नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। जिसके आधार पर वाक् स्वातंत्रय आदि विषयक अधिकारों का संरक्षण है। लेकिन बीते एक दशक के इतिहास को यदि उठाकर देखें तो इसी अधिकार पर गोया कि सबसे ज्यादा हमले हुए हैं। ये हमले कभी राष्ट्र-राज्य के नाम पर,तो कभी धर्म के नाम पर होते हैं।

? जाहिद खान


वेतन बढ़ाने से नहीं सुधरेगी शिक्षा

    शिकागो विश्वविद्यालय में वित्त के प्रोफेसर व प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रघुराम राजन का मानना है कि भारत में औपचारिक शिक्षा प्रणाली विफल हो रही है तथा वहॉ शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल प्रणाली सफल नहीं है क्योंकि यहॉ योग्य शिक्षक और अच्छे वेतन की कमी है। इसे ठीक किया जाना चाहिए। अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था से भारत की तुलना करते हुए श्री राजन ने कहा कि भारत में सरकार अपनी जिम्मेदारियॉ पूरी नहीं कर पाती जबकि चीन में सरकारी शिक्षा व्यवस्था बेहतर है और वहॉ औसत साक्षरता दर भारत से काफी ज्यादा है।

 

? सुनील अमर


तो फिर शिवानी की हत्या

प्रमोद महाजन ने करवाई?

     दिल्ली हाईकोर्ट ने शिवानी की हत्या के आरोपी एव आईपीएस अधिकारी रविकांत शर्मा एवं अन्य तीनों आरोपियों को निर्दोष मानते हुए रिहा कर दिया है। तो प्रश्न यह उठता है कि जब रविकांत शर्मा निर्दोष है,तो फिर शिवानी की हत्या किसने करवाई। यदि इसमें भाजपा नेता प्रमोद महाजन का हाथ है,तो उन पर किसी तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। उधर तीर्थ यात्रा करने की उम्र में रथयात्रा करने वाले लालकष्ण आडवाणी लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जाग्रत कर रहे हैं। ऐसे में यह कैसे कहा जा सकता है कि उन्होंने इस मामले में प्रमोद महाजन को संरक्षण नहीं दिया।

? डॉ. महेश परिमल


बदहाली से मौत को

गले लगाते म.प्र. के किसान

    स साल की अच्छी बारिश भी म.प्र. के किसानों के चेहरों पर खुशी के चिन्ह नहीं ला पाई हैं।म.प्र. के किसानों की परेशानियॉ लगातार बढ़ती ही जा रहीं हैं। खेती के मामले में म.प्र.का पंजाब माने जाने वाले होशंगाबाद जिले के किसान इस समय अपनी सोयाबीन के खरीफ की फसल की बर्वादी,कर्ज चुकाने की चिंता और आगामी रबी फसल की तैयारी की चिंता के चलते मौत को गले लगा रहें हैं।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


  24  अक्टूबर-2011

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