संस्करण: 24 नवम्बर- 2014

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मोदी पीएम हैं या शो मैन

     पिछले दिनों मोदी की विदेश यात्रा के दौरान भारतीय मीडिया में इस बात पर बहस चल रही थी कि क्या विदेश गए भारतीय पीएम को लेकर भारत में इस तरह की कोई प्रतिक्रिया होनी चाहिए जिससे भारत की प्रतिष्ठा गिरे। यह चर्चा इसलिए हुई क्योंकि कांग्रेस के नेता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि मोदी ने पैसे देकर ताली बजाने वालों की भीड़ जुटाई है। बेशक खुर्शीद के आरोप पर आपत्ति उठाई जा सकती है, लेकिन मुश्किल यह है कि यह परंपरा बन गई है और इसमें विपक्ष के साथ खुद प्रधानमंत्री भी शामिल हैं।

? विवेकानंद


मोदी के इंडिया में पूंजीपति मालामाल, जनता बेहाल
क्यों खामोश हैं प्रतिरोध की ताकतें ?

        ई बार एक अदद तस्वीर जबरदस्त हंगामे का सबब बन जाती है और विश्लेषकों की पूरी जमात उसकी व्याख्या करने में जुट जाती है। पिछले दिनों जी 20 की बैठक में वैसा ही नज़ारा नमूदार हुआ जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन के चीन के राष्ट्रपति की पत्नी को शाल ओढा दी। हाल यह हुआ कि चीन के अन्दर इस तस्वीर पर बैन लग गया और इसी बहाने असहज करनेवाले ऐसी कई तस्वीरें फिर एक बार चर्चा में आयी।

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सुभाष गाताड़े


मानव शरीर पर हाथी का सिर!
पौराणिक कथाओं का जादूभरा संसार

     चपन में जो चीजें मुझे सबसे अच्छी लगती थीं उनमें से एक थी पौराणिक कथाएं सुनना। मैं उस दुनिया में खो जाता था जिसमें भगवान हनुमान, अपनी श्रद्धा के पात्र श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए हवा में उड़कर जड़ीबूटी लेने जाते हैं, भगवान राम, पुष्पक विमान में यात्रा करते हैं और जब भगवान गणेश के पिता, उनका सिर काट देते हैं तब उनके धड़ पर हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया जाता है।

 ? राम पुनियानी


संघ परिवार की एक कम चर्चित बड़ी सफलता

      6 दिसम्बर 1992 को जब राष्ट्रीय एकता परिषद से वादाखिलाफी करते हुये बाबरी मस्जिद तोड़ दी गयी थी तब देश-विदेश के बुद्धिजीवियों, लेखकों, सम्पादकों, विचारकों, समाजसेवियों और राजनेताओं ने एक सुर से संघ परिवार की निन्दा की थी। इस निन्दा के घटाटोप में रथयात्रा निकालकर खुला आवाहन करने वाले भाजपा नेताओं तक ने अपनी जिम्मेवारी से मुकरते हुए कहा था कि हम लोग इसके लिए जिम्मेवार नहीं हैं

? वीरेन्द्र जैन


गांधी की हत्या के बाद सत्ता पलटने का षड़यंत्र भी था-नेहरू

           हात्मा गांधी की हत्या के बाद दिनांक 5 फरवरी 1948 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर सूचित किया था कि देश में विद्रोह कर सत्ता पलटने का षड़यंत्र किया गया था। इस षड़यंत्र के अनुसार देश के अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों की हत्या की जानी थी और देश में लगभग अराजकता का वातावरण पैदा करना था। यह षड़यंत्र बहुत व्यापक था और अनेक राज्यों में एक साथ किया गया था।

  ?  एल.एस.हरदेनिया


हिन्दुत्व को मजबूत करती एमआईएम

         ह बेहद चैंकाने वाली बात है कि जब एक ओर देश में हिन्दुत्व की विघटनकारी राजनीति अपने ऊफान पर चल रही है, ठीक उसी समय असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन यानी एमआइएम हैदराबाद से निकलकर पूरे देश में अपना प्रसार करने जा रही है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर मिली अप्रत्याशित सफलता के बाद, एमआइएम अब उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड में अपना काम शुरू कर चुकी है। इन राज्यों में चुनाव बहुत दूर नही हैं, लिहाजा एमआईएम चुनाव की तैयारियां भी तेजी से कर रही है।

? शरद जायसवाल


मेक इन इंडिया का सच

      सा लगता है कि नरेंद्र मोदी सरकार उन तमाम शब्दों के अर्थ बदलने पर तुली है जिनको भाजपा ने बार-बार दोहरा कर अच्छे दिन लाने का चुनावी वादा किया था। वह चाहे विकास और रोजगार का सवाल हो या मंहगाई और भ्रष्टाचार का। इन शब्दों के मायने बदलते हुए उन्हें अपनी राय के मुताबिक परिभाषित करने की कोशिश साफ देखी जा सकती है। जहां रोजगार का मतलब सामाजिक सुरक्षा की गारंटी करने वाली नौकरी के बजाए हायर एंड फायर की तर्ज पर अनियमित रोजगार बताया जा रहा है जहां से किसी भी कर्मचारी को उसका मालिक जब चाहे तब अपनी मर्जी से निकाल सकता है।

? राजीव कुमार यादव


सांसद आदर्श ग्राम योजना
आखिर योजना क्या है?

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बहुप्रचारित सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत जिस पैमाने को आधार बना कर भाजपा सांसद गांवों का चयन कर रहे हैं उससे संदेह पैदा होना लाजिमी है कि इसके पीछे मकसद गांवों का विकास करना है या कोई राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना है।

 

? शाहनवाज आलम


संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते के 25 साल  

        20 नवम्बर 1989 को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा द्वारा बाल अधिकार समझौते को पारित किया गया था इस साल 20 नवम्बर को इसके 25 साल पूरे हो चुके हैं । बाल अधिकार संधि ऐसा पहला अन्तराष्ट्रीय समझौता है जो सभी बच्चों के नागरिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों को मान्यता देता है। इस समझौते पर विश्व के 193 राष्ट्रों की सरकारों ने हस्ताक्षर करते हुए अपने देश में सभी बच्चों को जाति, धर्म, रंग, लिंग, भाषा, संपति, योग्यता आदि के आधार पर बिना किसी भेदभाव के संरक्षण देने का वचन दिया है।

? जावेद अनीस


छात्रावास में लड़कियों का यौन शोषण

      छात्राओं के यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं में पिछले दिनों जयपुर का नाम भी जुड़ गया, जहां के झोटवाडा इलाके में गरीब छात्राओं के लिए चल रहे मर्सी होम नाम के छात्रावास के संचालक को पिछले दिनों इन्हीं आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया। छात्राओं के यौन उत्पीड़न के बारे में चूंकि संचालक की पत्नी को भी पता था इसलिए उसे भी पकड़ा गया है। उस स्कूल की शिक्षिकाएं जहां इस होम की बच्चियां पढ़ती थीं वह बधाई की पात्र हैं जिनके प्रयास से आरोपी की करतूतों के खिलाफ कार्रवाई हो सकी।

? अंजलि सिन्हा


संवेदनहीन सरकार, लापरवाह व्यवस्था और बेबस लोग

        र्म और सियासत का आपस में कोई रिश्ता नहीं होता है। नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ-साथ अफसरों से शर्म और नैतिकता की उम्मीद करना बेमानी है। अगर ऐसा नहीं है, तो बिलासपुर के पेंडारी और गौरेला नसबंदी शिविर जैसे हादसों के आरोपी अपने निलंबन पर मुस्कुराते हुए यह नहीं कहते कि चलो..अब सांस में सांस आई। तीन दिन से चैन की नींद सोया नहीं हूं, अब चैन से सोऊंगा। यह गैरजिम्मेदार ब्यूरोक्रेसी और सरकारी तंत्र का शर्मनाक चेहरा है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कठोर सजा जरूर मिलती।

? अशोक मिश्र


बाबा के आगे नतमस्तक हरियाणा सरकार

      बाबा को पकडऩे के लिए पुलिस के 40 हजार जवानों का जमावड़ा भी काम नहीं आया। इस दौरान हरियाणा सरकार उक्त बाबा के सामने पूरी तरह से नतमस्तक दिखाई दी। मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर के पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है। लेकिन बाबा के हजारों समर्थकों को शायद वे अपना वोट बैंक मान रहे थे, इसलिए किसी भी तरह की कार्रवाई से वे बचते दिखाई दिए। लेकिन उन्हें जब लगा कि प्रधानमंत्री का दौरा खत्म होने वाला है, उसके पहले कुछ कुछ तो ऐसा होना चाहिए, जिससे मुंह तो दिखाया जा सके। इसलिए रातों-रात कार्रवाई की गई।

? डा.महेश परिमल


समाज व राजनीति का अपराधीकरण

        मारे देश में प्रजातंत्र ने अपनी जड़े गहरी जमा ली है। भले ही इससे हमारे आसपास के देश, जो प्रजातान्त्रिक प्रणाली वाले नहीं है वे अपने आप को पिछड़ा महसूस करने को बाध्य होते दिखते हों पर वास्तविकता कुछ ऐसी है कि हम भारतवासी भी अपने प्रजातांत्रिक स्तम्भों के गम्भीर राजनीतिकरण और अपराधीकरण से चिन्तित है। ऐसा लगता है कि हमारे देश के सभी राजनैतिक दल येनकेन प्रकारेण, नीति से या अनीति से, गरीबों के या अपराधियों के सहयोग से राजनैतिक सत्ता हथियाने के सारे हथकण्डे खुलकर अपनाने में व्यस्त है ।

? डा.देव प्रकाश खन्ना


  24 नवम्बर- 2014

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