संस्करण: 24मार्च -2008

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सोनिया का अध्यक्षीय दशक कांग्रेस की आंखों की चमक विपक्ष की आंखों की किरकिरी

काँग्रेस की आंखों की चमक और विपक्ष की आंखों की किरकिरी तथा परिवार के त्याग और बलिदान की कहानियों के बीच एक तपे हुए चरित्र के रूप में अपनी एक अलग पहचान का नाम है सोनिया गांधी।     >राजेन्द्र जोशी



     


सोनिया गांधी के दस साल

सोनिया गांधी के काँग्रेस अधयक्ष पद पर दस साल पूरे कर लेने का वैसा ही महत्व है जैसा कि किसी क्रिकेट खिलाड़ी द्वारा टैस्टमैच में रनो, मेड इन ओवरो, कैचों, या विकेट लेने का रिकार्ड तोड़ने का होता है। अभी तक किसी काँग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी में इतने समय   > वीरेन्द्र जैन


 प्रशासनिक नपुंसकता का नमूना

ऐसा लगता है कि मधयप्रदेश में शासन-प्रशासन नाम की कोई चीज़ नहीं है। इसका लाभ उठा कर चंद लोग पूरे प्रदेश की जनता पर जबरिया भार लाद रहे हैं और शासन-प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। ताज़ा मामला दूध के   > महेश बाग़ी


      


                    


''गुजरात के घाव अभी भी हरे हैं''

साम्प्रदायिक ताकतों से सतत संघर्ष करने वाले दो महत्वपूर्ण व्यक्ति दिनांक 15 व 16 मार्च को भोपाल में थे। दोनों साम्प्रदायिक ताकतों से मैदानी एवं बौध्दिक स्तर पर संघर्षरत् हैं। ये दो व्यक्ति हैं-सुश्री तीस्ता सीतलावाड् एवं प्रोफेसर राम पुनियानी।  >एल.एस.हरदेनिया


लुप्त होते जंगल

राष्ट्र की अद्वितीय व अटूट प्राकृतिक संपदा और आदिवासी जीवन के प्रमुख साधान रहे जंगल समूचे भारत में  बहुत तेजी से लुप्त हो रहे हैं। देश का वन विभाग अब तक यह दावा करता रहा था कि भारत के कुल भू-भाग में 19 प्रतिशत जंगल हैं  > प्रमोद भार्गव


                  


         


''भारत में ग्रामीण विकास-चिंता अब भी दूर नहीं''

 भारत मूलत: गाँवों का देश है और इसकी लगभग 75 प्रतिशत आबादी आज भी गाँवों में रहती हैं। अधिकांश जनसंख्या कृषि तथा उससे संबध्द कार्यों पर निर्भर करती है, फिर भी बहुसंख्यक ग्रामीण आबादी गरीबी की रेखा  > स्वाति शर्मा


क्या है विधि आयोग की सिफारिश की मंशा

पिछले दिनों विधि आयोग के सुझाव पर कुछ महिला अधिकारों के पक्षधार हाय तौबा मचा रहे हैं। बिना यह जाने की इस सुझाव के पीछे विधि आयोग की मंशा क्या हैं? दरअसल विधि आयोग ने अपनी सिफारिशों में दो महत्वपूर्ण बातें कहीं है।   > आरती पांडे


        


    


लोगों को लीलता विकास

जैसे एक तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह हर अच्छी घटना के साथ एक दुखद पहलू भी अधिकंशत: जुडा होता है।  विकास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ में पीछे मुडक़र देखना भूल जाते हैं  > सुभाष कार्तिकेय


अंधाधुंध भागते, गिरते युवा

वे बहुत ही खुशकिस्मत हैं, जो आज के युवाओं को मंद गति से गाड़ी चलाते देख पाते हैं। पर ऐसे खुशकिस्मतों की संख्या बहुत ही कम है। आज के युवा तो भाग रहे हैं, केवल भाग रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही
 >डॉ. महेश परिमल


      


   
                  24 मार्च 2008
 

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