संस्करण: 24 जून -2013

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देश और दोस्त  दोनों से छल

       पिछले दो ढाई साल से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बीजेपी और जेडी-यू के बीच चल रही खटपट का यही अंत होगा,इसकी बहुत कुछ संभावनाएं भाजपा और जदयू नेताओं के बयानों में झलकने लगी थीं। दोनों ओर से कोशिश थी तो केवल इस बात की कि इल्जाम किसी और के सिर आए तो अच्छा। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल गलती केवल भाजपा की हो,जदयू भी बराबर की हिस्सेदार है। दंगों के बाद जब नीतीश ने मोदी की तारीफ की थी तब यह क्यों धर्मनिरपेक्षता का ख्याल आया। लेकिन वोटों की राजनीति भी बड़ी अजीब चीज है।  

? विवेकानंद


चेले को आशीर्वाद देंगे या

घर ही जला देंगे आडवाणी

       डवाणी से नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात आपातकाल के दौरान 1975 में हुई। उस समय मोदी संघ के साधारण कार्यकर्ता थे और आडवाणी तत्कालीन जनसंघ (वर्तमान भाजपा) के दिग्गज नेता। आडवाणी को मोदी के अंदर कुछ मेटल दिखाई दिया और उन्हों ने मोदी को महत्व देना प्रारंभ कर दिया।  मोदी ने 1987 में नगर निकाय का चुनाव जीता और संघ के साथ साथ राजनीति में भी सक्रिय हो गये।नरेंद्र मोदी ने 1990में आडवाणी को सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकालने की सलाह दी।आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली,यात्रा के रास्तों पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ा किंतु गुजरात में भाजपा की स्थिति इतनी मजबूत हो गई कि विधान सभा चुनावों में उसे प्रचंड बहुमत मिला और मोदी को भाजपा के महासचिव पद से नवाज दिया गया।

? मोकर्रम खान


आरएसएस के रवैये के कारण

भाजपा के लिए दिल्ली और दूर हुई

          राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हठ के कारण भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर गंभीर संकट के भंवर में फंस गई है। संघ के रवैये के कारण ही भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाईटेड) के 17 साल पुराने संबंधा टूट गये हैं। इस घटनाक्रम से भाजपा के लिये दिल्ली, जो पहले ही दूर थी, अब और दूर हो गई है।

 

? एल.एस.हरदेनिया


भाजपा में छाया स्वार्थ का आपातकाल

      संघ परिवार के लोग न तो लोकतांत्रिक हैं, न सच्चे, न ईमानदार, और न ही निर्भय। हाल में ही घटित मोदी प्रकरण के बाद यह बात और अधिक पुष्ट हो चुकी है। वे अवसरवादी,लालची,सिध्दांतहीन और भयजनित हिंसा से भरे हुये लोग हैं जो मौका लगने पर कमजोरों को मारकर अपनी बहादुरी बखानते रहते हैं,और उसमें भी दूसरों को उकसाने व स्वयं को खतरों से दूर रख कर अवसर पर भुजायें पुजवाने के लिए आगे खड़े मिलते हैं। इनका नेतृत्व सवर्णों या सम्पन्नों के पास रहता है किंतु हिंसक गतिविधियों के लिए ये दलितों, आदिवासियों या पिछड़ों को आगे करते रहते हैं।

? वीरेन्द्र जैन


मल्लेश्वरम या हुबली

कर्नाटक में हिन्दुत्व आतंक

         साम्प्रदायिकता विरोधी संघर्ष को नयी धार देने में जुटे 'कर्नाटक कौमू सौहार्र्द वैदिके' - जो लगभग 200 संगठनों का साझा मंच है - के बैनर तले मंगलौर में रविवार 9 जून को आयोजित सभा अपने आप में एक अनोखी जनसभा थी। इसमें राज्य के चार मंत्री ही नहीं आठ विधायक भी बैठे थे, जिनके सामने विगत पांच साल की केसरिया हुकूमत का कच्चा चिट्ठा पेश किया गया और 24 सूत्रीय मांगपत्रक भी पेश किया गया।  

 ?   सुभाष गाताड़े


अरूण जेटली इतना

अधिक धन कैसे कमाते है?

                  रूण जेटली ने राज्यसभा में अपने पुनर्निर्वाचन के लिये दाखिल नामांकन पत्र में अपनी 158 करोड़ की संपत्ति बताकर सबको विस्मित कर दिया। इस संपत्ति में से 120 करोड़ उनके स्वयं के नाम पर है। (शेष संपत्ति उनकी पत्नी के नाम पर है, अर्थात वह भी वास्तव में उन्ही की है।) मैं यह प्रश्न सिर्फ इसलिये कर रहा हूॅ क्योंकि भारतीय जनता पार्टी अपने विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं से यही प्रश्न करती रहती है। यह तभी उचित है जब जेटली हमें इसका उत्तर दें।  

? प्रशांत पाण्डे


राजनीति के हाट में सेल्फ मार्केटिंग

      दर्श, सिध्दांत, नैतिकता, मर्यादा और अनुशासन जैसे गुणों से संपन्न किसी विचारधारा का नाम है राजनीति। जो राजनीति कभी शुचिता निष्ठा और ईमानदारी के श्रृंगार से अपने अप्रतिम सौंदर्य के लिए जानी जाती थी आज वहीं राजनीति इन गुणों के विपरीत नज़र आने लगी है। गुलामी और राजशाही के शिकंजे में जकड़े भारत को जब स्वतंत्रता के वायुमंडल में सांस लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तो लगा एक नये युग ने करवट बदली है। जिसमें भारत की जनता के हाथ में अपने देश के संचालन की बागड़ोर आ गई। सत्ता संचालन की जन पर आई जिम्मेदारी के तहत विभिन्न विचार धाराओं के दल पर दल बनते चले गये। 

? राजेन्द्र जोशी


स्कूल का प्रवेश उत्सव,

बच्चों की मजदूरी

      रकारी स्कूलों के दरवाजे फिर से बच्चों को शिक्षा देने के लिए खुल गये हैं सरकार ने स्कूल के प्रति बच्चों की रूचि बढाने के लिए प्रवेश उत्सव का ऐलान किया है।प्रवेश उत्सव के अन्तर्गत प्राथमिक शालाओं में आने वाले बच्चों का स्कूल में उत्साहपूर्वक स्वागत किये जाने के निर्देश हैं ताकि बच्चों की रूचि स्कूल में आने के लिए बढें। स्कूल में अध्यापक भी बच्चो को तिलक लगाकर बैठा रहे हैं। स्कूलों में जनप्रतिनिधियों,अफसरों को बुलाकर प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है।

? अमिताभ पाण्डेय


कामकाजी महिलाओं की संख्या क्यों नहीं बढ़ रही है ?

        नगणना कार्य निदेशालय ने हाल में कुछ आंकड़े जारी किए हैं जो जनगणना के दौरान एकत्र जानकारी पर आधारित हैं जिसके अनुसार दिल्ली में दो तिहाई लोग काम नहीं करते। इन्हें काम नहीं करते या काम नहीं मिला समझा जाए यह अलग मुद्दा है। फिलहाल इस बहस में पड़े बिना कि कामकाजी किसे माना जाए तथा गृहकार्य को भी कामकाज की श्रेणी में क्यों नहीं रखा जाए हम प्रचलित अर्थ में जिसे काम माना जाता है यानि जहां श्रम के बदले पारिश्रामिक मिलता है उसे ही लेकर चलते हैं। ज्ञात हो कि गृहकार्य को भी काम का दर्जा मिले तथा गृहणियों को भी भत्ता या पति के वेतन का एक हिस्सा वेतन के रूप में मिले,उन्हें छुट्टी भी मिले आदि पर हमारे समाज में बहसें होती रही हैं, जो मुद्दे को सतही रूप से देखने का द्योतक है।

? अंजलि सिन्हा


बाघ के संरक्षण में

मध्यप्रदेश फिसड्डी

       क तरफ सुप्रीम कोर्ट गीर के जंगलों से बाघों को मध्यप्रदेश स्थानांतरित करने का आदेश दिया है, वही दूसरी तरफ पिछले एक साल में मध्यप्रदेश में एक दर्जन बाघों की मौत र्हुई है। बाघों के लगातार होते शिकार को देखते हुए पहले मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता था, पर अब टाइगर किलर स्टेट कहा जाने लगा है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आखिर बाघ सबसे अधिक कहां सुरक्षित हैं? मध्यप्रदेश सरकार को बाघों पर कम किंतु बाघों को देखने आने वाले पर्यटकों की चिंता अधिक है। इसलिए पर्यटकों के लिए लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, पर बाघों का शिकार करने वाले अभी तक कानून की पहुंच से दूर हैं।   

 

? डॉ. महेश परिमल


  24 जून -2013

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