संस्करण: 24नवम्बर-2008

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सियासत की नाव में सभी है सवार- दागी, बागी, तपस्वी और त्याग

देशभक्ति और जनसेवा के प्रदर्शन की कतिपय जनसेवकों में कुछ इस कदर प्रतिस्पधर्एं चल रही है कि वे राजनीति के मैदान में कूदकर अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाने के लिए मर्यादा, नैतिका और जीवनमूल्यों की हदें तक पार करते जा रहे हैं।  > राजेन्द्र जोश


बुध्दिजीवियों की मध्यप्रदेश के मतदाताओं से अपील-साम्प्रदायिक पार्टियों को पराजित कर

मधयप्रदेश में निवास कर रहे अल्पसंख्यकों व दलितों ने पिछले पांच वर्ष असुरक्षा के साए में बिताए। सन् 2003 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ताव संभालने के साथ ही अल्पसंख्यकों पर हमले प्रारंभ हो गए थे जो लगातार पांच वर्षों तक जारी रहे। > एल.एस.हरदेनिया


कैसे सैनिटेशनयुक्त हो यह देश ?

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 'सैनिटेशन पर दक्षिण एशियाई सम्मेलन' के उद्धाटन के अवसर पर (मंगलवार 18 नवम्बर 2008) जो चित्र सामने आ रहा है वह किसी भी मायने में सन्तोषजनक नहीं कहा जा सकता।  >सुभाष गाताड़


आंचलिक भाषाई

सांप्रदायिकता के संकट

अब तक सांप्रदायिकता को उन्मादित धार्मांधाता और जातीय विद्वेष के परिप्रेक्ष्य में ही देखा जाता रहा है। लेकिन महाराष्ट्र में दो उत्तर भारतीयों की हत्या के बाद इस भाषाई जघन्यता को हम आंचलिक भाषाई सांप्रदायिकता के विंधवसक रुप में भी देखने को विवश हैं। > प्रमोद भार्गव


दहशतगर्दी के खिलाफ फतवा, ये सदा आगे तक जाये

हमारे मुल्क में गुजिश्ता कुछ सालों से दहशतगर्दी की तोहमतें अपने ऊपर झेल रहे मुस्लिम समुदाय ने आखिरकार इससे मुकाबला करने की ठान ली है और यह बीड़ा उठाया है कौम के मजहबी उलेमाओ, रहनुमाओं और मुस्लिम विद्वानों ने। अभी हाल ही में हैदराबाद में हुए जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के सालाना जलसे में 6 हजार उलेमा और हजारों मजहबी लीडर इकटठे हुए। > ज़ाहिद खान


चिकित्सा के क्षेत्र को कलंकित करने वाले ये चिकित्सक

गत दिनों मधयप्रदेश के देवास में भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं ने एक महिला निर्वाचन अधिकारी के साथ र्दुव्यवहार किया तथा असंयत भाषा का प्रयोग किया क्यों कि उनमें से एक प्रदेश सरकार में मंत्री है व दूसरा पूर्व सांसद है। ये लोग अपने पद के दबाव में उस महिला अधिकारी से चुनाव सम्बंधी अनियमित कार्य कराना चाह रहे थे जबकि वह अधिकारी नियमानुसार काम करना चाह रही थी।  > वीरेन्द्र जैन


उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों में बढ़ती अनुशासनहीनता

भौतिक समृध्दि की आकांक्षा के कारण जहाँ एक ओर अधिकाधिक संख्या में विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करने की दिशा में तेज़ी से उन्मुख हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर, उनके जीवन में अनुशासन का घोर अभाव भी देखा जा रहा है। यह चिन्ताजनक है।  >डॉ. गीता गुप्त


2 दिसंबर-राष्ट्रीय प्रदूषण निवारण दिवस पर विशेष

भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रदूषण की काली छाय

मानव ने हमेशा ही जीवित रहने, सुख-सुविधा के साथ जीवन व्यतीत करने, साधान-संपन्न बनने के लिए अर्थात पूर्ण आर्थिक विकास के लिए अनेक उपाय किये हैं। प्रारंभिक दौर में भोजन जुटाने के लिए जंगलों को काट-काट कर खेती योग्य भूमि विकसित की गई, नगर-गांव बसाए गए। >स्वाति शर्मा


जरूरी है पशुओं पर अत्याचारों को रोकना

प्रख्यात पर्यावरणविद एवं नोबल पुरूस्कार विजेता श्री राजेंद्र पचौरी जी का मानना है कि शाकाहार से ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ने से रोका जा सकता है। वास्तव में प्रख्यात पर्यावरणविद का यह कथन हमारी जीव रक्षा की भावना को संतुष्ट करता है तथा प्रकृति की रक्षा में पशुओं के अस्तित्व की बात को स्वीकारता है। >डॉ. सुनील शर्मा


बेशुमार दौलत = तनाव और असुरक

दीपावली तो चली गई, पर अभी भी उपहार देने और लेने का सिलसिला जारी है। इस दौरान लोग आपस में मिलकर बधाई देना भी नहीं भूल रहे हैं। परस्पर शुभकामनाएँ देना और दीपोत्सव पर आपसी भाईचारे की मिसाल देकर सुखद जीवन की कामना भी कर रहे हैं। >डॉ. महेश परिमल


24 नवम्बर 2008

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