संस्करण: 24अगस्त-2009

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भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र का संकट


त दिनों एक बार फिर भाजपा में आन्तरिक लोकतंत्र पर प्रश्न चिन्ह लगे जब राजस्थान विधानसभा में विधायक दल की निर्वाचित नेता वसुंधारा राजे विधानसभा में विधायक दल के 78 विधायकों में से 57 को साथ > वीरेंद्र जैन


जिन्ना को सेक्युलर कहना
सेक्युलर शब्द का अपमान है


खिर क्या कारण है कि पहले लालकृष्ण आडवाणी और अब जसवंत सिंह, मोहम्मद अली जिन्ना को एक सेक्युलर और महान नेता सिध्द करने में अपनी पूरी बौध्दिक ताकत लगा रहे हैं।>एल.एल.हरदेनिया


पूर्व सर संघचालक सुदर्शन   भोपाल में आकर बसे हैं
क्या वे नागपुर में असहज हो गए थे


से शायद कम ही मौके आते हों कि पुलिस या सुरक्षा बलों द्वारा की जा रही फर्जी मुठभेड़ को कोई बाकायदा कैमरे में कैद कर ले और वे तस्वीरें पूरे सूबे को आन्दोलित कर दें। तेईस जुलाई 2009 को >भवानी शंकर


मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति से बढ़े शक्कर के भाव
गोदाम में पड़े छापों से सामने आया सच


माखोरी, कालाबाजारी और मुनाफाखोरी सिर्फ शब्द नहीं है, यह है व्यापार जगत की वास्तविक हकीकत। इस हकीकत से जूझना पड़ रहा है सिर्फ आम उपभोक्ता को। इस हकीकत से मुकाबला करने की चुनौतियां जिन >राजेंद्र जोशी


नियमों से अनजान मुख्यमंत

 

जिस तरह कांग्रेस के बारे में यह आम धारणा है कि उसे विपक्ष की राजनीति करना नहीं आता, उसी तरह भाजपा के बारे में भी यह कहा जाता है कि उसे सरकार चलाना नहीं आता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज> महेश बागी


दलित गाथा :
रिपोर्टों के बहाने उजागर होती तस्वीर


से मुल्क में मौजूद सियासी माहौल की गर्मी का नतीजा कहें कि कभी कभी यह बात उछलती रहती है कि दलितों-आदिवासियों की रक्षा के लिए बने विशेष कानूनों को अब समाप्त करना चाहिए। उसके कथित