संस्करण: 23 सितम्बर-2013

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बंटवारे के विशेषज्ञ हैं मोदी

       भारतीय राजनीति में फिलहाल ऐसा कोई व्यक्ति दिखाई नहीं देता जिसे मोदी की तरह प्रधानमंत्री बनने की विकट लालच और जल्दबाजी हो। वहीं लालकृष्ण आडवाणी जैसा भी कोई महत्वाकांक्षी राजनीतिज्ञ बुजुर्ग दिखाई नहीं देता, जो मार्गदर्शक बनने की उम्र में कुर्सी का मोह पाले हुए हो। सत्ता की यह लालच उस महान भारतीय परंपरा और संस्कृति को स्थापित करने वालों पर धब्बे की तरह है, जिनके त्याग और स्वाभिमान के लिए युगों-युगों से वह आदरणीय बने हुए हैं।    

? विवेकानंद


नमो नमो या नमस्ते

सदा वत्सले मातृभूमे

        गते सूरज को सलाम की तर्ज पर अब भाजपा में नमो नमो की आवाज़ सुनाई दे रही है। एक अंग्रेजी अख़बारनवीस के मुताबिक 'हिन्दुत्व पोस्टर बॉय'नरेन्द्र मोदी को पार्टी की सर्वोच्च कमेटी ने प्रधानमंत्री पद के अपने प्रत्याशी के तौर पर पेश कर दिया है।

? सुभाष गाताड़े


प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी पर मोदी के चयन से नया कौन जुड़ेगा?

        बुन्देली भाषा में एक वाक्यांश आता है- मुँह का जबरजब कोई अतार्किक ढंग से अपनी बात ठेलता हुआ दूसरे को बोलने ही नहीं देता तो उसे मुँह का जबर कहा जाता है। भारतीय राजनीति में कहा जा सकता है कि भाजपाई मुँह के जबर हैं। जो लोग भी टीवी चैनलों पर होने वाली बहसें सुनते हैं वे जानते हैं कि अधिकांश भाजपाइयों या भाजपा समर्थकों की यह कोशिश रहती है वे निरर्थक और अतार्किक बातों से इतना समय खराब कर दें ताकि उनसे भिन्न विचार रखने वालों को अपनी बात रखने का अवसर कम से कम मिले। संसद के सदनों में वे शोर मचा कर सदन को चलने नहीं देते ताकि तर्क और तथ्यों को स्थान नहीं मिले। 

 ? वीरेन्द्र जैन


पार्टी विद डिफरेंस में कुछ भी डिफरेंट नहीं

      भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है मगर इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी नहीं पहुंचे। हालांकि मोदी का नाम घोषित होने के साथ ही यह मान लिया जाना चाहिये कि आडवाणी का चैप्टर क्लोज हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों ने कयास लगाने शुरू कर दिये हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाकर भाजपा ने आतंरिक लोकतंत्र की जितनी छीछालेदर की है,वह पार्टी के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।

? सिध्दार्थ शंकर गौतम


नरेन्द्र मोदी का विरोध क्यों किया जाना चाहिए

         सेक्युलर आदर्शों के प्रति समर्पितों द्वारा 15 सितम्बर 2013 को आयोजित एक पत्रकारवार्ता में कुछ पत्रकारों ने यह सवाल बार-बार पूछा कि आखिर आप लोग नरेन्द्र मोदी का विरोध क्यों करते हैं? आप क्यों उन्हें देश की एकता और समरसता के लिये खतरा मानते हैं?

   

 ?   एल.एस.हरदेनिया


उत्तर प्रदेश के दंगों के संदेश

सपा और भाजपा दोनों जिम्मेदार

           त्तर प्रदेश मे राजनैतिक पार्टियां आग से खेल रही हैं। चुनाव जीतने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। मुजफ्फरनगर के दंगे इसका ताजा उदाहरण हैं। इनमें अबतक 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। वोट बैंक की राजनीति के तहत वहां दंगे भड़काए जा रहे हैं और इसी राजनीति के तहत प्रशासन को भी ढीला छोड़ दिया जाता है। उत्तर प्रदेश के जिन इलाकों में अभी दंगे हुए हैं, वहां जाट और मुस्लिम साथ साथ रहा करते थे और एक साथ ही मतदान भी किया करते थे।  

? कल्याणी शंकर


अग्नि-5 के सफल परीक्षण से

देश को मिली महाशक्ति

      अंतर महाद्विपीय बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 के ओडिशा के व्हीलर द्वीप से सफल प्रक्षेपण के बाद, मिसाइल के क्षेत्र में हमारे देश ने एक बड़ी दूरी तय कर ली है। मिसाइल का यह दूसरा प्रक्षेपण था। इससे पहले इसी साल 19 अप्रैल को भी यहीं से इस मिसाइल का परीक्षण किया गया था। अग्नि-5 के सफल प्रक्षेपण के बाद हमारा देश, उन देशों के प्रतिष्ठित क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास पांच हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाले अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल यानी आइसीबीएम हैं।

?  जाहिद खान


धार्मिक पर्वो-उत्सवों को माध्यम बनाकर कारपोरेट जगत कर रहा है व्यापार

      र्तमान दौर में सरकार पर कितने ही लांछन लगाये जाय कि वह कारपोरेट जगत के हाथ में खेल रही है किंतु इसकी वास्तविकता कुछ और है। भारत का कारपोरेट जगत मजे भी उठा लेता है और व्यवस्थाओं की खिलाफत भी करता जाता है। सच पूछो इस दौर में कारपोरेट सेक्टर इतने अधिक दबाव में है कि उसकी मनमर्जी चल नहीं पा रही है। कांग्रेस के नेतृत्ववाली यू.पी.ए.सरकार की नीतियों के चलते व्यावसायिक घराने अपने आपको स्वच्छंद महसूस नहीं कर पा रहे हैं। उनके सामने अपने प्रोडक्ट खपाने के रास्ते कम होते जा रहे हैं। इस दृष्टि से वे बैंकों के माधयम से सहयोग का प्रबंधा कर आम जनता को अपना ग्राहक बनाने के रास्ते निकाल रहे हैं।

 

? राजेन्द्र जोशी


पुरूषवादी मानसिकता हुई मुखर

        16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में घटित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दरिंदों के वकील एपी सिंह का विवादित व शर्मनाक बयान आया है। टीवी पर चल रही बहस के दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल के जबाव में सिंह ने कहा 'मेरी लड़की यदि शादी से पहले अपने युवा साथी के साथ रातभर घूमती और शादी से पहले आपत्तिजनक संबध बनाती तो में उसे जिंदा जला देता। दामिनी जैसी स्थिति बनने ही नहीं देता। साथ ही उन्होंने बेटियों के परिजनों को यह निशुल्क नसीहत भी दे डाली कि सभी परिजनों को बच्चों के साथ यही व्यवहार करना चाहिए।   

? प्रमोद भार्गव


भूख, कुपोषण से जूझता एक समुदाय

       ध्यप्रदेश में सत्तारूढ भाजपा सरकार आदिवासी समुदाय के समग्र विकास को लेकर आये दिन नये नये दावे करती है । सरकारी की फाईलों और विभागीय बैठक में आदिवासी समुदाय की तरक्की के दावे भले ही संतोषप्रद हों लेकिन यह सच है कि आदिवासियों के नाम पर चलाई जा रही ज्यादातर योजनाएं अपेक्षा के अनुरूप शत प्रतिशत परिणाम नहीं दे पा रही हैं। शासकीय दस्तावेज में आदिवासी समुदाय के पोषण,सुरक्षा,रोजगार,चिकित्सा आदि के नाम पर जो बडी धनराशि खर्च करना बताया जा रहा है उसकी हकीगत आदिवासी बहुल गॉवों का दौरा कर देखी जा सकती है। आदिवासियों में भी सहरिया आदिवासी की हालत सर्वाधिक चिन्ताजनक है।      

 

? अमिताभ पाण्डेय


तलाशने होंगे विकास के रास्ते

        च्चर समिति की रपट कहती है कि भारतीय मुसलमान आर्थिक और शैक्षणिक मानकों पर दलितों से भी नीचे खिसक गए हैं। समिति ने अपने इस निष्कर्ष के समर्थन में ढ़ेर सारे आंकड़े दिए हैं। इस तथ्य को भारत सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है। सवाल यह है कि मुसलमानों की स्थिति में आई गिरावट के लिए कौन जिम्मेदार है? स्वयं मुसलमान या फिर सरकार ? इस विषय पर अलग-अलग राय हैं और विवाद हैं। मुस्लिम बुध्दिजीवियों के एक तबके का कहना है कि मुसलमान सिर्फ शिकायतें करते रहते हैं। वे न तो विकास की बात करते हैं और ना ही परिवर्तन की कोई रणनीति बनाते हैं और साथ ही अपने समुदाय में भी शिक्षा के प्रसार के लिए कोई प्रयत्न नहीं करते हैं।   

? राखी रघुवंशी


1 अक्टूबर विश्व वृध्द दिवस पर विशेष

वृध्द होती जनसंख्या का संकट दूर करेगा बाज़ार ?

       वृध्दावस्था मनुष्य जीवन का वह पड़ाव है, जब व्यक्ति अपने समस्त सांसारिक दायित्वों से मुक्त हो चुका होता है और उसे अब मात्र शान्ति और निश्चिन्तता से भरे क्षणों को जीने की चाह होती है। भारत जैसे देश में तो बुढ़ापे को आधयात्मिक यात्रा से जोड़कर देखा जाता है। गौतम बुध्द के शब्दों में कहें तो-'वृध्दावस्था संसार को एक नयी दृष्टि से देखने का वक्त है। यह मोह और कामनाओं के कवच को उतारकर निस्संग भाव से जीवन के कारण को तलाशने का वक्त है। यह प्रकाश को ढूंढ़ने का वक्त है, वह दिव्य प्रकाश-जो हमारी आत्मा में वास करता है।    

 

? डॉ. गीता गुप्त


आपकी एक गलती पर निगाह है हेकर्स की

        स दिन एक मित्र को रास्ते में एक पेन ड्राइव मिली। 32 जीवी की पेन ड्राइव पाकर वह बहुत ही खुश हुआ। बस फिर क्या था, उसके सारे डाटा खत्म करके उसे इस्तेमाल में लाना शुरू कर दिया। उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था। कुछ दिन बाद जब उसके एकाउंट से राशि निकलने लगी, तब समझ में आया कि कहीं गड़बड़ी हो गई है। करीब दस हजार रुपए निकल गए, तब समझ में आया कि यह कमाल उस पेन ड्राइव का था, जो रास्ते में मिली थी।  

? डॉ. महेश परिमल


म.प्र. में युवाओं का लगातार शोषण

       ला संकाय में स्नातकोत्तर एवं बीएड उपाधि धारी रमाकांत म.प्र. के एक स्कूल में वर्षो से अतिथि शिक्षक का कार्य कर अपना जीवन काट रहें है। रमाकांत बर्ष 2005 और 2008 की संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा भी पास का सर्टिफिकेट भी रखे हुए हैं, लेकिन वो न तो 2005 में संविदा शिक्षक बन पाए और न ही 2008 में क्योंकि सरकार ने खाली पदों के अनुरूप भर्ती ही नहीं की। रमाकांत के साथ बिडंबना ये है कि वो वर्ष 2011 की पात्रता परीक्षा को पास नहीं कर पाए अत: वर्तमान में सत्र जारी भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिए गए।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


  23 सितम्बर-2013

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