संस्करण: 23 मई-2011

सेवा-क्षेत्रों में वेतनवृध्दि के मामले में
भारत है दुनियाभर में अव्वल
कंसलटेंट कंपनियों की रिपोर्ट ने किया खुलासा
 

? राजेंद्र जोशी

               पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सेवारत् कर्मियों को अन्य दूसरे देशों की तुलना में सबसे ज्यादा वेतन वृध्दियां मिलता है। जहां प्रत्येक स्तर का कर्मचारी का ध्यान अपने कर्तव्यों के निर्वहन के प्रति कम किंतु इसी पर ध्यान केन्द्रित रहता है कि किसी न किसी तरह से उसकी पगार बढ़ जाय। वैसे पगार में वृध्दि करने के अलग-नियम कायदे भी मौजूद है। किंतु कर्मचारियों की आक्रामक मांगों के आगे झुककर प्रबंधनों को झुकना पड़ता है और देखते ही देखते वेतन में वृध्दिया होती ही रहती हैं। चालू वर्ष की तिमाही की रिपोर्ट जारी करते हुए एच.आर.कंसलटेंट कम्पनियों ने इस बात का खुलासा तिमाही सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपने देश में वेतन वृध्दि का प्रतिशत 12दशमलव नौ प्रतिशत की वृध्दि हुई है,जबकि चीन में नौ प्रतिशत ही है। दुनिया में वेतन वृध्दि करने के मामले में चीन को भारत ने पौने चार प्रतिशत आगे बढ़कर पीछे छोड़ दिया है। भारत में वेतन बढ़ोत्तरी का यह आंकड़ा इसके पूर्व के वर्ष 2010 में पहली तिमाही तक ग्यारह दशमलव सात प्रतिशत था।

 

              वर्तमान में नौकरियों की हालत यह हो गई है कि जो कम्पनी जितना ज्यादा वेतन बढ़ा रही है उससे वह ज्यादा ही जॉब-आक्रामक हो जाती है। वेतन बढ़ाने का यह असर होता है कि किसी कम्पनी का कोई भी कर्मचारी चाहे वह किसी भी स्तर का क्यों न हो किसी अन्य कम्पनी में भागकर नहीं जाता है और अच्छे वेतन के कारण कम्पनियों को प्रतिभावान कर्मचारी भी मिल जाते है। पूर्व का यह अनुभव देखने को मिला है कि बड़ी संख्या में बढ़े हुए वेतन के प्रलोभन में फंसकर कर्मचारी एक कम्पनी से दूसरी कम्पनी में छलांग लगाता रहता है। अब भारत में आर्थिक सुधारक के कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलने से कोई भी कम्पनी अपने कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की मांग को अनदेखी नहीं कर रही है। कंपनियों में वेतन बढ़ाते रहने की प्रतिस्पर्धाएं शुरू हो गई है।

 

               कंसलटेंट कम्पनियों की रिपोर्ट के अनुसार मध्यवर्ग के कर्मचारियों को वेतन बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा से ज्यादा पैसा मिल रहा है और वे जहां है वहीं संतुष्ट भी दिखाई देने लगे हैं। जबकि अभी भी कंपनियों में बेहतर और कुशल कर्मचारियों को किसी अन्य कंपनी के प्रतिभावान कर्मियों को बढ़े हुए वेतन का लालच देकर दूसरी कंपनियों द्वारा अपनी ओर खींचने के अनेक उदाहरण सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष की पहली तिमाही की अध्ययन रिपोर्ट दर्शाती है कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में इस चर्चित अवधि में 14.4प्रतिशत पगार बढ़ी है,जबकि आटोमोबाईल सेक्टर में 12 प्रतिशत से भी बढ़कर 14 प्रतिशत तक की वृध्दि हुई है। इस रिपोर्ट के आधार पर देश के एक लोकप्रिय समाचार पत्र ने भी अपनी टीम से इस हालात पर सर्वे कराया जिसके अनुसार हेल्थ सेक्टर में वेतन बढ़ोत्री का प्रतिशत 13रहा है। अध्ययन के अनुसार इंजीनियरिंग क्षेत्र में जिसमें अन्य सेक्टरों की तुलना में सर्वाधिक वेतन वृध्दि आंकी गई है,उसके मेनुफेक्चरिंग सेक्टर में अच्छी ग्रोथ हुई है। इस सेक्टर में कम्पनियों के सामने प्रतिभा सम्पन्न टेलेंटस को जोड़े रखने की चुनौती बनी हुई है। इसी तरह आटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री का आंकड़ा काफ़ी बढ़ने से जॉब में अवसर भी बढ़े हैं। इसी कारण यहां पगार भी बढ़ी है और कर्मचारियों की तरक्कियां भी हुई हैं। हेल्थ सेक्टर में भी ग्रोथ बढ़ी है इसलिए अर्जित लाभ का हिस्सा कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने में हो रहा है। ऐसी कम्पनियों में बेहतर कर्मियों की मांग भी बढ़ी है जिन सेवा के क्षेत्रों में वेतन वृध्दियां बढ़ी हैं,उनमें बैंकिंग,फायनेंस,मीडिया और इंटरनेट,शिक्षा,फुटकर धंधो,सूचना तकनीकी,हास्पिटिलिटी,ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

 

                आज प्रत्येक सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों के दिमाग में एक ही बात गूंजती है कि उसकी तनख्वाह कैसे बढ़े। सेवा क्षेत्रों में भी तनख्वाह बढ़ाने का अब मापदंड हो गया है कि मेहनत और ईमानदारी ही जरूरी नहीं है बल्कि जरूरी है परिणाम और केवल परिणाम। कर्मचारियों के क्रियेटीविटी के गुण और उनमें टीम वर्क की भावना भी अहम भूमिका निभाती हैं। समाचार पत्र की टीम में अधययन के मुताबिक आने वाले वर्षों में निर्माण और इंजीनियरिंग क्षेत्र जॉब बाजार पर हॉवी रहेंगे।

 

              पिछले दो वर्षों में भारत में जो वेतन वृध्दि का प्रतिशत रहा है उसने यूरोपीय और अमेरिकन देश भी पीछे छूट गये हैं। जहां तक एशियाई देशों का सवाल है उनमें 2 प्रतिशत से 9 प्रतिशत की बढ़ौत्री हुई है, जबकि भारत में सर्वाधिक वेतन वृध्दियां दर्ज की गई हैं।


? राजेंद्र जोशी