संस्करण: 23 जून-2014

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आखिर किसके इशारे पर खेल रहे मोदी

     देश में लगभग दो दशक से गंभीर संकटों का सामना कर रही खेती और बर्बादी के मुहाने पर खड़े किसानों की चिंता उस वक्त और बढ़ गई जब अलनीनो के प्रभाव से पड़ने वाले संभावित सूखे की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनने लगीं। भयानक वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में, जब देश की अर्थव्यस्था बेतहाशा मंहगाई और जबरजस्त ऋणात्मक विकास के साथ भयंकर बेरोजगारी की समस्या से जूझ रही हो, सूखे की संभावना से ही आर्थिक क्षेत्र में खलबली मचनी तय थी। 

? हरे राम मिश्र


अत्याचार-भ्रष्टाचार और मोदी सरकार

        रीब साल भर पहले इन्हीं दिनों नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के लिए मशक्कत कर रहे थे। तब वे छतीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की विकास यात्रा में हिस्सा लेने गए थे और वहां उन्होंने कहा था कि 'अपनी जवान बेटियों को लोग दिल्ली न भेजें,क्योंकि वहां मनमोहन सिंह बैठे हुए हैं। अब नरेंद्र मोदी दिल्ली में बैठे हैं और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री कहते हैं कि बलात्कार धोखे से हो जाते हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र के डौडीलोहारा में रहने वाली एक 4 साल की बच्ची बलात्कार हो जाता है।

?

विवेकानंद


इतिहास सवाल करेगा कि...

(पलासी से विभाजन तक के बहाने)

     ई सरकार आने के बाद पिछले दिनों 'पलासी से विभाजन तक' नामक किताब को आरएसएस के अनुषांगी संगठन विद्या भारती के महामंत्री दीनानाथ बत्रा द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया है। न्यूजीलैण्ड के विक्टोरिया विश्वविद्यालय के प्रो.शेखर वंद्योपाध्याय द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक आधुनिक भारत के इतिहास की एक बेहतरीन पुस्तक है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसकी भूमिका की दूसरी पंक्ति से लगाया जा सकता है, जिसमें कहा गया है-''यह उपनिवेशी राजसत्ता से या 'भारत पर राज करने वाले व्यक्तियों' से अधिक भारतीय जनता पर केन्द्रित है''।

 ? अनिल यादव


जयजयकार के बीच ऑंकड़ों के झरोखों से

ताक झाँक

      गर आमचुनाव का कुल मतलब किसी व्यक्ति विशेष या किसी दल विशेष के पास सत्ता पहुँचना होता हो तो वह काम पूरा हो चुका है और पिछले पच्चीस वर्षों की संख्यागत विसंगतियों के विपरीत अधिक आदर्श चुनाव परिणाम आये हैं। पर यदि लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुरूप आम चुनावों का मतलब जनता के मानस को पढना और उसे समन्वित करके उसकी दशा दिशा का अनुमान लगाना हो तो मतदान के ऑंकड़ों का सम्पूर्ण राजनीतिक सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, क्षेत्रीय, और जातीय अध्यन करना जरूरी होता है।

? वीरेन्द्र जैन


उत्तरपूर्व को कैसे संभालेंगे

नरेन्द्र मोदी ?

            त्तरपूर्व भारत की समस्याएं कितनी गंभीर हैं वह इस बात से महसूस होता है कि उस क्षेत्र के मामलों की देखरेख के लिये केन्द्र में एक पृथक मंत्रालय का गठन किया गया है। उत्तरपूर्व भारत में स्थित सभी राज्यों में कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर रहती है। त्रिपुरा ही शायद ऐसा राज्य है जहां तुलनात्मक शांति है। उत्तरपूर्व में शांति कायम करना मोदी सरकार के लिये सबसे गंभीर चुनौती है। वहां की समस्याओं के प्रति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस चश्में से देखता है, यदि नरेन्द्र मोदी भी वैसा ही नजरिया अपनाते हैं तो समस्याओं को सुलझाना काफी कठिन होगा।

 ?  एल.एस.हरदेनिया


प्रशिक्षण का ही हिस्सा है

महिलाओं का उत्पीड़न

           हिलाओं को लेकर देश की पुलिस मशीनरी का नजरिया, उसकी मानसिकता तथा उत्पीड़क चरित्र की वजहों पर बात करने से पहले मै कुछ वाकयों का जिक्र चाहूंगी। दो साल पहले की बात है। मुंबई पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती लड़कियां पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रही थीं। उसी वक्त उनमें से कई लड़कियों के गर्भवती होने की खबरें अचानक मीडिया मे आईं। जिन लड़कियों में गर्भावस्था की पुश्टि हुई थी उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान कभी छुट्टी भी नहीं ली थी। 

? रीना मिश्रा


किस राह पर उत्तर प्रदेश?

      हाल ही में मुलायम सिंह यादव का एक बयान खासा चर्चित हुआ था जिसमें उन्होंने बलात्कारियों को फांसी देने का विरोध करते हुए कहा था कि बच्चों से गलती हो जाती है। यह अलग बात है कि बच्चों की गलती से कई जिंदगियां तबाह हो जाती हैं जिन्हें मुलायम की पारखी नजर नहीं देख पाती या यों कहें कि देखना नहीं चाहती पर मुलायम के उन्हीं कथित बच्चों की गलती अब उनके खुद के बेटे अखिलेश यादव पर भारी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश में बीते एक पखवाड़े से बलात्कार के जितने भी मामले सामने आए हैं उन्हें बच्चों की मामूली गलती मानना गलत होगा।

?  सिध्दार्थ शंकर गौतम


संदर्भ : सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला   

फैसले पर उठते सवाल

     र्मदा नियंत्रण प्राधिकरण यानी एनसीए ने हाल ही में एकतरफा फैसला करते हुए गुजरात में स्थित सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई वर्तमान के 121.92 मीटर से बढ़ाकर 138.68 मीटर करने की मंजूरी प्रदान कर दी है। एनसीए का मानना है कि उसके इस कदम से बांध के जलाशय में, परियोजना में अपेक्षित पूरी क्षमता के साथ जल संग्रहण हो सकेगा। जिससे सिंचाई और जल विद्युत उत्पादन की क्षमता बढेग़ी।

 

? जाहिद खान


अफसरों के घोटाले की सजा भोगते वृध्द

        ध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार करने वाले अफसरों, कर्मचारियों पर त्वरित और कडी कार्यवाही नहीं होने से घपले घोटालों का सिलसिला रूक नहीं पा रहा है। सत्तारूढ दल के नेताओं और अफसरों की मिलीभगत से जो भ्रष्टाचार हुआ उसे जॉच के नाम पर दबाने की कोशिशें कई बार सफल हो चुकी हैं। करोडों रूपयों का घोटाला करने वाले दागी अफसरों के विरूधद जॉच सालों साल तक खत्म नहीं होती । सत्तारूढ दल के अनेक मत्रीं भी भ्रष्टाचार से जुडे अनेक मामलों में जॉच का सामना कर रहे हैं । जॉच बरसों तक इस तरह चलती है कि भ्रष्टाचार करने वालों पर उसका कोई असर नहीं होता ।        

? अमिताभ पाण्डेय


टूथपेस्ट और साबुन से भी बढ़ रहा है

पुरुषों में बाँझपन!

      स्त्रियों और पुरुषों में बॉझपन के लिए अलग-अलग प्रकार के कई तत्त्व जिम्मेदार होते हैं। इसमें एक अहम् भूमिका आधुनिक समय के रहन-सहन की भी है। बाँझपन का मामला कितना जटिल हो गया है इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि अब इसके कारणों में वेश-भूषा तक को जिम्मेदार बताया जा रहा है! वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न स्तर पर किए गए प्रयोगों से निकले निष्कर्ष भयावह संकेत करते हैं और बताया जा रहा है कि हमारे दैनिक इस्तेमाल में आने वाले रसायनों में से लगभग एक तिहाई ऐसे है जो पुरुषों की प्रजनन क्षमता को खत्म कर रहे हैं। हैरतअंगेज तो यह है कि अन्यान्य कारणों से माँ के गर्भ में ही पुरुष भ्रूण का बनना खतरे में पड़ गया है।

? सुनील अमर


हिन्दी भाषियों के लिए बन्द होते आईएएस के दरवाजे

        बीते गुरूवार को संघ लोक सेवा आयोग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा 2013 के परिणाम घोषित कर दिये। इस बार राजस्थान के गौरव अग्रवाल ने देश भर में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर लगातार 3 वर्ष से टाप कर रही लडकियों के सिलसिले पर विराम लगाया। हांलाकि लडकियां टाप 10 की सूची में 4 सीटों पर और टाप 25 की सूची में 10 सीटों पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं। यदि हिन्दी भाषा के अभ्यर्थियों की बात की जाए तो उन्हें इस बार भी निराशा ही हाथ लगी है। टाप 25 की सूची में हिन्दी के एक भी छात्र का नाम न होना और टाप 100 की सूची में एक उंगली पर गिनने लायक छात्रों की संख्या का होना हिन्दी भाषी छात्रों के दर्द को बयां कर रहा है।

? सुनील तिवारी


आप शाकाहारी हो ही नहीं सकते

      ज के जमाने में विशुध्द शाकाहारी होना एक चुनौती है। लोग भले ही स्वयं को शुध्द शाकाहारी कहकर गर्व का अनुभव कर लेते हों, पर यह भी सच है कि आज हमारे हाथ में जो चीजें आ रही हैं, वह किसी भी तरह से शाकाहारी नहीं हैं। इसलिए अब शाकाहारियों के लिए सावधान होने का समय आ गया है। यदि नई सरकार अपने नियम-कायदों में थोड़ा-सा बदलाव करे, तो इस धोखाधाड़ी को रोका जा सकता है। जिस धार्मिक भावना से मांस, मछली, चिकन या अन्य हिंसक पदार्थों का इस्तेमाल करने से हम बच रहे हैं, वही चीजें किसी न किसी रूप में हमारे सामने आ रही हैं।

? डॉ. महेश परिमल


  23 जून-2014

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