संस्करण: 23 जनवरी- 2012

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अब मुसलमान जज्बात नहीं,

विकास के मुद्दों पर वोट डालेगा

           त्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव के पहले सभी राजनीतिक पार्टियों में वोटर को अपनी तरफ खींच लेने की होड़ मची हुई है। इस बार के चुनाव में सभी दलों को पता है कि सत्ता की चाभी मुसलमानों के हाथ में है। शायद इसीलिये सभी गैर बीजेपी पार्टियां अपने को मुसलमानों सबसे बड़ा शुभचिन्तक साबित करने के चक्कर हैं। जब टेलिविजन की खबरों का जमाना नहीं था तो एक खास विचारधारा के लोग अफवाहों के सहारेचुनावों के ठीक पहले राज्य के कुछ मुसलिम बहुलइलाकों में साम्प्रदायिक दंगा करवा लेते थे और उनकी अपनी सीट साम्प्रदायिक धृवीकरण के नाम पर निकल जाती थी। 

  ?  शेष नारायण सिंह


........लेकिन हाथी खा जाता है !

        चुनाव को लोकतंत्र का पर्व कहा जाता है। हिन्दुस्तान में तो चुनाव किसी मेले सरीखे होते हैं। किसी मेले से आप जितनी गम्भीरता और सिध्दांतवादिता की अपेक्षा कर सकते हैं, चुनाव से भी उतनी ही करनी चाहिए। शोर-शराबा, हल्ला-गुल्ला, धक्का-मुक्की, हेरा-फेरी तथा नारेबाजी के जो नजारे आपको मेले में दिखते हैं, वही सब लेकिन जरा बड़े पैमाने पर आपको चुनाव में भी मिल जाते हैं। हमारा लोकतांत्रिक इतिहास गवाह है कि हर चुनाव ने हमें नये-नये नारे दिए जो सामयिक होने के कारण लोकप्रिय भी हुए। वर्ष 2012के उत्तर प्रदेश के चुनाव इन दिनों हो रहे हैं और राजनीतिक दलों द्वारा नारे गढ़ने का काम शुरु हो गया है।

? सुनील अमर


कहां गए वो स्मारकों के लिए हांक देने वाले

अस्मिता की राजनीति का भंवर

      न्दना, उसके चार बच्चे और उनकी बूढ़ी सास, उनकी विधवा बेटी तथा उसके तीन बच्चे अब धीरे धीरे इस हकीकत से बावस्ता हो चले हैं कि शहादेव तायड अर्थात वन्दना का पति अब दुनिया में नहीं है। गन्ना खेतों में काम करनेवाला शहादेव तायड, जो दलित पृष्ठभूमि से सम्बधित था, उसे महाराष्ट्र के बीड जिले के गेवराई तहसील के चिंचोली सिन्दपान्हा गांव में जनवरी की आठ तारीख को मराठा जमींदार वशिष्ठ ढाके ने जिन्दा जला दिया।

? सुभाष गाताड़े


मध्यप्रदेश का इंदौर

दवा परीक्षणों का हब बन चुका है

          दुनिया में सर्वाधिक मुनाफे वाले दो ही उद्योग हैं, जिनमें पहला है हथियार उद्योग और दूसरा दवा उद्योग। इनमें से पहला उद्योग जहां मनुष्य के विनाश से सीधे तौर पर जुड़ता है,वहीं दूसरा जिसे कि सिर्फ बीमारियों के विनाश से वाबस्ता रहना चाहिए था,वह भी बाजार के हक में मनुष्य के विनाश से संबध्द हो चला है। दवाओं का बाजारीकरण, उनकी सबके लिए उपलब्धाता, उनकी विश्वसनीयता, उनका प्रमाणीकरण, परीक्षण इत्यादि कुछ ऐसे मसले हैं जो वैश्वीकरण की गिरत में लगातार अमानवीय हो चले हैं।

? राहुल शर्मा


मध्यप्रदेश के संघीकरण की दिशा में दो और कदम

         गता है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समाज को धर्म के आधार पर बांटने में विशेषज्ञता हासिल कर ली है। अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में गीता पढ़ाने का निर्णय लिया था। उसी तारतम्य में मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने दो नये कदम उठाये हैं। पहला कदम है अत्यधिक विस्तृत पैमाने पर स्कूलों में सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम और दूसरा है गौवंश की हत्या के अपराध की कड़ी सजा का प्रावधान।

 ? एल.एस.हरदेनिया


अवैध धर्मस्थलों का राजनीतिशास्त्र

           त्तर प्रदेश की बसपा सरकार ने पिछले दिनों एक महत्वपूर्ण फैसला लिया कि वो प्रदेश के 45142 अवैध धार्मिक स्थलों को नहीं हटाएगी। इसके पीछे उसका तर्क है कि ऐसा करने से धार्मिक तनाव का माहौल बनेगा जो राज्य की कानून व्यवस्था के लिहाज से खतरनाक है। गौरतलब है कि 29 सितम्बर 2009 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में उन सभी धार्मिक स्थलों को हटाने और स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था जो सार्वजनिक भूमि पर बने हैं और जिनसे यातायात या दूसरे तरह की दिक्कतें उत्पन्न होती हैं। 

? शाहनवाज आलम


शिव सरकार

के कागजी घोड़े

       ध्यप्रदेश की शिवराज सरकार काग़जी घोड़े दौड़ाने में व्यस्त है और यह प्रचार किया जा रहा है, मानो प्रदेश बेहद तरक्की कर रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि भाजपा सरकार के राज में प्रदेश रसातल में जा रहा है। यह हम नहीं, आंकड़े बता रहे हैं। इन्वेस्टर्स मीट के ज़रिये एमओयू करते समय सरकार ने विकास के जो दावे किए थे, उनकी हकीकत अब सामने आ रही है। सरकार ने निवेशकों से जितने करार किए थे, उनमें से दस फ़ीसदी भी ज़मीन पर नहीं उतर सके हैं। एमओयू साइनकरते समय गर्व करने वाली सरकार अब मुंह छिपाने की स्थिति में आ गई है।

? महेश बाग़ी


अफसर करे न चाकरी, मंत्री करे ना वर्क

हर दफ्तर का हाल हे, जो कुछ करे सो क्लर्क

            ''अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम

                             दास मलूका कह गये, सबके दाता राम।''

                 मलूकदास का यह दोहा अब अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। यह दोहा कहने के पीछे मलूकदास का यह आशय रहा होगा कि ईश्वर ने ही यह सृष्टि रची है और उसी ने ही तमाम प्राणियों के भरण पोषण की व्यवस्था कर दी है। कुछ लोग इस दोहे का मतलब भी निकाल लेते हैं कि 'कुछ मत करो, भगवान खुद हमारे भरण पोषण का इंतजाम कर देगा।' यह अर्थ ऐसे लोगों के लिए है जो आलस्यमयी जीवन जीने के आदि हो गये हैं।

? राजेन्द्र जोशी


निन्दक की निन्दा से आत्मपरीक्षण

     बीबीसी लन्दन द्वारा बीते क्रिसमस के अवसर पर प्रसारित एक विशेष कार्यक्रम के प्रस्तोता के 'भारत विरोधी टिप्पणी' पर काफी खबरें आ चुकी हैं। इस मसले पर भारत सरकार ने बीबीसी से माफी मांगने को भी कहा है। ज्ञात हो कि प्रस्तोता जेरमी क्लार्कसन द्वारा 'टॉप गीयर' कार्यक्रम में भारत की ट्रेनों ,शौचालयों, खानपानों और इतिहास को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की गयी थी तथा उपहास उडाया गया था। हो सकता है कि क्लार्कसन भी पश्चिम के उन लोगों में से ही एक हो तथा उन्हीं विचार और प्रवृत्तियों से ग्रसित हों जिन्हें यह लगता है कि पूरी दुनिया ने सभ्यता और संस्कृति उन्हीं से सीखी है और कथित पिछडे और असभ्य राष्ट्रों या लोगों को 'सीखाने' का ठेका उनका है।

? अंजलि सिन्हा


आत्ममंथन करे मीडिया

    मीडिया पर सरकारी या किसी स्वायत्ता संस्था की निगरानी हो या फिर समूचा मीडिया खुद पहल कर ऐसा स्वनियामक तंत्र बनाए,जिससे कि मीडिया के अपने मामलों और खबरों में सुधार हो। देश में चल रही इस बहस के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीडिया को आश्वस्त किया है कि सरकार, मीडिया की स्वतंत्रता पर कोई अंकुश नहीं लगाने जा रही है। अलबत्ता,मीडिया से उन्होंने यह अपेक्षा जरूर की,मीडिया बाहरी दबाव से मुक्त होकर स्वयं अनुशासित रहे। यानी,मीडिया को अपने अंदर की गड़बड़ियों को खुद ही दुरुस्त करना होगा। कमोबेश ऐसी ही बात पिछले दिनों सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने एक साक्षात्कार के दौरान कही थी कि................

 

? जाहिद खान


विज्ञापनों की आक्रामकता  

     हले तीन उदाहरण देखिये। एक अंडर गारमेंट के विज्ञापन में जिसका पंच लाइन है 'बडे आराम से' में सैफ अली खान एक नवाब की हत्या की गुथ्थी सुलझाते हैं। वे नवाब की पत्नी, दो सम्भ्रांत दिखने वाले लोग और एक माली से पूछताछ करते हैं। सभी इस हत्या से इंकार करते हैं। तभी नवाब साहब उठ खडे होते हैं और बताते हैं कि माली ही उनका हत्यारा है। एक मोबाइल फोन के विज्ञापन में अभिनेत्री प्रियंका चोपडा का मोबाइल उनकी नौकरानी चुरा लेती है। लेकिन अचानक फोन बजने से वो पकडी जाती है।

? राजीव कुमार यादव


मध्यप्रदेश में विद्यालयीन शिक्षा हुई बदहाल

    भारत सरकार ने नि:शुल्क अनिवार्य शिक्षा अधिनियम लागू कर देश के हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है,लेकिन इसमें सफलता तभी मिलेगी जब राज्य सरकारें भी इसके लिए कृतसंकल्पित होकर समुचित क़दम उठायें। हाल ही में एक अशासकीय संगठन ने 'असर 2011'नामक सर्वेक्षण रपट में भारत के ग्रामीण अंचलों में स्थित शासकीय विद्यालयों की वस्तुस्थिति का विवरण प्रस्तुत किया है जो समूचे देश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की बदहाली का प्रमाण है। लेकिन मध्यप्रदेश की शिक्षा की बदहाली सुर्खियों में है।

 

? डॉ. गीता गुप्त


पाठयक्रम में यौन शिक्षा

     किशोरावस्था में किशोर छात्र-छात्राओं को एड्स जागरूकता के बहाने सरकारी पाठशालाओं में यौन शिक्षा परोसने की तैयारी राष्ट्रीय महिला आयोग करने जा रहा है। इस तरह की नाकाम कोशिश मध्य प्रदेश सरकार चर्चा परिचर्चाओं के माध्यम से की थी, लेकिन सेवा-निवृति की उम्र के करीब पहुंचे शिक्षक किशोरावस्था की दहलीज पर खड़े चौदह-पन्द्रह साल के बालक-बालिकाओं किस मनोवैज्ञानिक तरीके से यौन शिक्षा का पाठ पढाऐंगे इस गंभीर विचारणीय बिन्दु पर सात साल से बात अटकी है। क्योंकि उम्र में कई दशकों का अंतराल और पारंपरिक मर्यादा साठ साल के शिक्षक को सेक्स का पाठ पढ़ाने के लिये मानसिक रूप से किस तरह से और किस स्तर पर तैयार करेगी .....

? प्रमोद भार्गव


  23 जनवरी- 2012

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