संस्करण: 23 दिसम्बर -2013

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अवसरवादी केजरीवाल

...तो अब अन्ना विश्वासघाती हो गए ?

     र एक बौना मेरे कद को नापता है यहां,

               मैं सारे शहर से उलझूं मेरे इलाही क्या?

               समय के एक तमाचे की देर है प्यारे!

               मेरी फकीरी भी क्या, तेरी बादशाही क्या?

              समाजसेवी अन्ना हजारे अपने लिए कुमार विश्वास द्वारा विश्वासघात जैसा शब्द कहने पर आज शायद यही सोच रहे होंगे।

? विवेकानंद


आन्दोलन, पार्टी और प्रशासन के भेद व 'आप' का असमंजस

        दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने में आया गतिरोध भारतीय लोकतंत्र में नयी घटना है। ये इस बात का संकेत भी है कि अब कुछ ऐसा नया घट रहा है जिसे परम्परागत तरीकों से हल नहीं किया जा सकता। अब तक हमारे राजनीतिक दल किसी तरह चुनाव में वोट हस्तगत करके बहुमत के आ धार पर सत्तारूढ हो जाया करते थे और स्पष्ट बहुमत न आने की दशा में भी वांछित संख्या में निर्दलीयों या दूसरे दलों के सदस्यों से समर्थन प्राप्त कर लेते थे। जिन्हें शासन करना नहीं आता था वे भी नौकरशाही के सहारे चार छह महीने खींच कर अपने अपने घर भर लेते थे, पर मौका कोई नहीं छोड़ता था। दल

?

वीरेन्द्र जैन


कब तक समुदाय पर

संशय भरी निगाहें ?

     केरल के हवाले से आयी यह ख़बर चिन्तित करनेवाली है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खाता खुलवाने में अब अल्पसंख्यक समुदाय - विशेषकर मुस्लिम समुदाय को - परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐसे कई नामों की सूची जारी की है और कहा है कि ऐसे नामों से मिलते जुलते नाम के लोग अगर खाता खुलवाने आएं तो इस बात की तसदीक कर लें कि कहीं वह आतंकवादी तो नहीं है।

 ? सुभाष गाताड़े


संघ के बारे में अध्ययन करने को लेकर

डर किसी और का नहीं बल्कि संघ का ही है

      न्दर्भ -आउटलुक नवम्बर( 2013) के कालम ''अभिमत'' में प्रकाशित राकेश सिन्हा का लेख ''संघ के बारे में अध्ययन से  डर कैसा''

              आउटलुक नवम्बर( 2013) के कालम अभिमत में प्रकाशित लेख ''संघ के बारे में अधययन से  डर कैसा'' में राकेश सिन्हा जी इस बात को लेकर बहुत चिंतित हो रहे हैं की देश के विश्वविद्यालयों में संघ पर अध्ययन नहीं किया जा रहा है।

? जावेद अनीस


क्या बिना मंत्रिपरिषद के राज्य का शासन संचालित हो सकता है?

              दिनांक 14 दिसंबर 2013 से मध्यप्रदेश में संविधान सम्मत सरकार नहीं है। और यह स्थिति उस समय तक रहेगी जब तक विधिवत मंत्रिपरिषद का गठन नहीं हो जाता। संविधान में इस बात का स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य का शासन राज्यपाल के नाम पर संचालित होगा और राज्यपाल की सहायता एवं उन्हें परामर्श देने के लिए एक मंत्रिपरिषद रहेगी। मुख्यमंत्री इस मंत्रिपरिषद का मुखिया होगा। राज्यपाल,मुख्यमंत्री की नियुक्ति करेगा और बाकी मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल,मुख्यमंत्री की सिफारिश पर करेगा।

 ?   एल.एस.हरदेनिया


पूर्व जस्टिस गांगुली मामले में कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है!

           सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जस्टिस ए. के. गांगुली ने अपने अधीन इंटर्नशिप कर रही कानून की एक छात्रा का यौन शोषण किया। ये आरोप छात्रा ने सोशल मीडिया के माध्यम से लगाया, क्योंकि इस हादसे से उबरने में उसे एक वर्ष से अधिक समय लग गया। इस मामले की जाँच करके सुप्रीम कोर्ट के जजों की कमैटी ने पहली नजर में छात्रा के आरोपों को सही माना और पूर्व जस्टिस एवं पश्चि म बंगाल के राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ए. के. गांगुली को यौन शोषण के लिये आरोपी माना है, लेकिन साथ ही साथ सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने से ये कहकर असमर्थता प्रकट की है कि वर्तमान में पूर्व जस्टिस गांगुली सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कानून की छात्रा भी वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के अधीन इंटर्नशिप नहीं कर रही है।  

? डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरकुंश'


लालू को जमानत से राजनीति में बदलाव

      खिरकार 77 दिन जेल में बिताने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में कैदी की पोशाक पहने लालू का जलवा तब भी कम नहीं था और अब जबकि वे अपनी पारम्परिक पोशाक में आ चुके हैं तो बिहार से लेकर केंद्र की राजनीति में सुगबुआहट होना स्वाभाविक है जयप्रकाश नारायण के छात्र आंदोलन की उपज लालू प्रसाद यादव ने तमाम राजनेताओं की तरह राजनीति के उतार-चढ़ाव को देखा है और कई बार ऐसे-ऐसे निर्णय लिए हैं जो राजनीतिज्ञों से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक ने नकार दिए किन्तु लालू की दूरदर्शिता ने उन्हें आईना दिखा दिया।

?  सिध्दार्थ शंकर गौतम


किसानों को धोखा,

चीनी मिलों का काम चोखा

     त्तर प्रदेश के गन्ना किसान एक बार फिर छले गए हैं। इस बार उनका छला जाना इसलिए ज्यादा त्र्रासद है कि ' धरती पुत्र' कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी की सरकार ने यह छल किया है। यह कितना आश्चर्यजनक है कि देश में सभी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन गन्ने के दामों को घटाया जा रहा है क्योंकि चीनी मिल मालिकों का तर्क है कि उन्हें घाटा हो रहा है! सरकार किस तरह से मिल मालिकों के साथ खड़ी है इसे इस बात से समझा जा सकता है कि किसानों के हित की एक भी बात नहीं की गई और इस नूरा कुश्ती में दो महीने का समय निकल गया।

 

? सुनील अमर


वाजिब है भारत का कड़ा रुख

        भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ बीते दिनों अमेरिका में हुई बदसलूकी के मामले को जिस तरह भारत सरकार ने गंभीरता से लेते हुए अमेरिका के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। इन कदमों में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सभी कर्मियों और उनके परिवार के लोगों को अपना परिचय-पत्र फौरन जमा करने को कहा गया है। इसके साथ ही उनके सभी हवाई अव पास वापस लेने और अमेरिकी दूतावास के लिए आयात मंजूरी रोकने समेत कई सख्त कदम शामिल हैं। यही नहीं सरकार ने फैसला किया है कि अमेरिकी अधिकारियों को अब उसी स्तर की सुविधाएं दी जाएंगी, जो अमेरिका हमारे वाणिज्य दूतों को वहां मुहैया कराता है।

? जाहिद खान


व्यापम का महाघोटाला

यानि युवाओं के हितों पर डाका 

      व्यापम यानि व्यावसायिक परीक्षा मण्डल में हुए घोटालों की पर्ते लगातार खुलती जा रही हैं।  एसटीएफ की जॉच रिपोर्ट में इस घोटाले में सबसे अहम नाम प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम सामने आया है और इनकी सरपरस्ती में हुए इस महाघोटाले में आरोपी के तौर पर इनके नाम पर भी एफआईआर  दर्ज कराई है। एसटीएफ के मुताबिक उच्चशिक्षा मंत्री रहे लक्ष्मी कांत शर्मा ने व्यापम के माध्यम से अपने रिश्तेदारों,करीबियों और समर्थकों को अफसर और सरकारी कर्मचारी बनवा दिया। वास्तव में मंत्री के इस करतुत से प्रदेश के सुपात्र युवा किताबों में ऑखें फोड़ते हुए अपने भाग्य को कोसते रहे।     

 

? डॉ. सुनील शर्मा


मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़ों से

शिक्षा हुई दागदार

        ह पहला अवसर नहीं है जब मध्यप्रदेश में शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। अलबत्ता जिस पैमाने में यह उजागर हुआ है,वह अवश्य चकित कर देने वाला है। पी.एम.टी.में घोटाला,बी.डी.एस.में घोटाला,व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा आयोजित सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षा में घोटाला,परीक्षा परिणामों में घोटाला,प्रावीण्य सूची में अप्रत्याशित घोटाला-क्या-क्या गिनवाया जाए? मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित अन्य तकनीकी शिक्षा संस्थान भी फर्जीवाड़ा,रैगिंग और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं के कारण कलंकित हो रहे हैं।

? डॉ. गीता गुप्त


शब्दों की अलग ही

मोहक दुनिया

      ब्दों का सौंदर्य अद्भुत होता है। जब भी हमारे सामने कुछ शब्द विशेष सामने आते हैं, तो हम उस पर एक तरह से फिदा ही हो जाते हैं। मुँह से अनायास ही निकल जाता है कि वाह क्या शब्द है। शब्द और भाषा का अपना विशिष्ट शास्त्र है। शब्द समय के साथ बनते रते हैं, साथ ही इतिहास के गर्त में गुम भी होते रहते हैं। एक ओर जहां अंगरेजी के एक-एक शब्द पर शो धा होते रहते हैं, वही दूसरी ओर अन्य भाषाओं के लिए यह जुनून नजर नहीं आता।     

 

? डॉ. महेश परिमल


  23 दिसम्बर -2013

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