संस्करण: 23 अप्रेल- 2012

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न्यायालय में न्याय को चुनौती

           गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका के जरिये शिकायत की है कि उसके खिलाफ जान-बूझ कर गुजरात में हुये फर्जी मुठभेडों की जांच की मांग की जा रही है। लेहाजा कोर्ट उसे इस मामले में राहत पहुंचाए। इस याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि फर्जी मुठभेड तो कई राज्यों में होते हैं लेकिन गुजरात को निशाना सिर्फ इसलिये बनाया जा रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाती है।

 

  ? शाहनवाज आलम


हाफिज सईद के लिए

घोषित इनाम के कई आयाम सम्भव हैं

        काल का अपना महत्व होता है। कोई घटना किस काल में घटित होती है उससे उसके बहुत सारे अर्थ प्रकट होते हैं। पिछले दिनों सच्ची घटना पर आधारित बहुचर्चित फिल्म 'नो वन किल्लड जेसिका' में बताया गया है कि यदि एक मीडिया हाउस में किसी बड़ी स्टोरी की गतिविधियां चलती हैं तो बहुत सारी दूसरी खबरें दबी रह जाती हैं, यदि जेसिका लाल की हत्या का फैसला कारगिल के युध्द के समय आया होता तो शायद इतिहास बनाने वाली वह कहानी दबी ही रह जाती। पिछले दिनों संयुक्त राज्य अमेरिका ने 26/11/2008 के मुम्बई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद की सूचना देने वाले के लिए एक करोड़ डालर अर्थात लगभग पचास करोड़ भारतीय रुपयों के बराबर इनाम घोषित किया है।

? वीरेन्द्र जैन


हैद्राबाद : संस्थागत दंगा प्रणालियों की मौजूदगी के वक्त में !

    भारत के साम्प्रदायिक दंगों पर विस्तृत अध्ययन करनेवाले अमेरिकी विद्वान पॉल आर ब्रास इस बात का खुलासा करते हैं कि किस तरह आजादी के बाद दंगों को कहीं भी स्वत:स्फूर्त नहीं कहा जा सकता,वे किस हद तक सुनियोजित होते हैं। उनके हिसाब से साम्प्रदायिक शक्तियों ने 'संस्थागत दंगा प्रणालियों'को विकसित किया है। हाल की कुछ घटनाएं इसी बात की ताईद करती दिखती हैं।

? सुभाष गाताड़े


स्कूली बच्चों को हिंदुत्व का पाठ

पढ़ा रही शिवराज सरकार

          ध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार पर शिक्षा का भगवाकरण करने के इल्जाम लगते रहे हैं। शिवराज सरकार सायास और 'अनायास'लगातार ऐसी कोशिशें करती रहती है,जो कि आखिरकार शिक्षा में साम्प्रदायिकरण को बढ़ावा दे। क्योंकि, 'दूर की लड़ाई' में यही उसके लिए सबसे ज्यादा मुफीद है। सूबे में यह सब खुले आम हो रहा है। इस हद तक कि सरकार ने सूबे में सभी कायदे-कानूनों को ताक पर रख दिया है। शिक्षण संस्थाओं के जनतांत्रिक, बहुलतावादी, बहु-सांस्कृतिक और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप की उसे रत्ती भर भी परवाह नहीं। सब कुछ उसके ठेंगे पर।

? जाहिद खान


आरएसएस के लाड़ले गडकरी अब हो गए पराए

         स बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अपने लाड़ले स्वयंसेवक नितिन गडकरी से मोह भंग हो गया है। सन् 2010 में आर.एस.एस. प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी का चार्ज यह सोचकर सौंपा था कि वे भाजपा का कायाकल्प करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी के मानसिक व शारीरिक रूप से अशक्त होने से एवं लालकृष्ण अडवानी के अप्रासंगिक हो जाने से भाजपा लगभग नेतृत्व विहीन हो गयी थी। इस वजह से भाजपा को अब नये नेतृत्व की तलाश थी। काफी सोच-विचार के बाद भाजपा की पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यह उत्तरदायित्व नितिन गडकरी को सौंपा था।

 ? एल.एस.हरदेनिया


अजय सिंह ने दी कांग्रेस को धार

           रिवर्तन प्रकृति का हिस्सा है और इस वक्त प्रदेश कांग्रेस इस दौर से गुजर रही है। बीते कुछ वक्त में कंाग्रेस में कई बदलाव देखने को मिले हैं। कांग्रेस पहले से ज्यादा आक्रामक है और कांग्रेसी संगठित। बीते दिनों प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने जिस तरह से आदिवासी इलाकों से दौरे किए वो इस बात का सबूत है कि कांग्रेस इस बार सत्ता संघर्ष में भाजपा को कड़ी चुनौती देने वाली है।

? नीरज नैयर


सुनाई देने लगी आम चुनाव की आहट

राजनीति के मौसम में आई गरमाहट

       राजनीति में गरमाहट महसूस की जाने लगी है। नेताओं के तेवरों में बदलाव आने लगी है। आरोप-प्रत्यारोपों में बौखलाहटें आने लगी है। मतलब साफ है, अगले वर्ष पहले कुछ राज्यों में और फिर कुछ माह बाद ही लोकसभा के निर्वाचनों की आहट आने लगी है। वैसे तो राजनीति का मौसम सदैव ही अनप्रिडेक्टिव बना रहता है किंतु भारत की इस राजनैतिक भूमि पर प्रत्येक पांचवें साल में ऐसी गरमाहट आने लगती है कि सभी चुनाव क्षेत्र तपने लग जाते हैं। चारों तरफ आंधी और तूफान जैसा वातावरण हो जाता है। सांय-सांय गरम-गरम लपटें महसूस की जाने लगती है और संपूर्ण वायुमंडल धूल धूसरित हो उठता है।

? राजेन्द्र जोशी


''मीडिया पुलिस'' को दसवंद

नहीं तो धंधा बंद

      कुछ दिनों पहले तक एक बाबा जी की छवि को पूरे 36 चैनल एक साथ निर्मल बनाने में तल्लीन थे।अचानक एक निजी चैनल ने बाबाकी नित निर्मल हो रही छवि पर कीचड़ उछालने का कार्यक्रम प्रारंभ कर दिया उक्त चैनल का दावा है कि उसके पोल खोल कार्यक्रम से बाबा का धंधा काफी मंदा हो गया है, उनके कलेक्शन में लगभग 66 प्रतिशत की गिरावट आई है।  बाबा के जिस आईसीआईसीआई बैंक एकाउंट में प्रति दिन एक करोड़ रुपये जमा होते थे, उसमें अब केवल 34 लाख रुपये जमा हो रहे हैं। पहले 4500 लोग रोज पैसे जमा कराते थे अब केवल 1800 लोग ही पैसे जमा करा रहे हैं। जब तक 36 चैनल बाबा की छवि के देश भर में 36 मजबूत गढ़ बनाने का कार्यक्रम चला रहे थे, बाबा के समागम में भीड़ बढ़ती जा रही थी, उसी हिसाब से धन धान्य  वर्षा भी हो रही थी किंतु जैसे ही एक चैनल ने ............

? मोकर्रम खान


क्यों बढ़ रही है खुद को

प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति ?

        नीता, कालेज में जानेवाली लड़की है, महानगरों के अपने हमउम्र लड़कियों की तरह उसके भी सपने हैं। पिछले दिनों उसकी मां ने इस बात पर गौर किया कि उसके हाथ पर कटे के निशान हैं। कारण पूछे जाने पर उसने कुछ गोलमोल जवाब दिया। कहीं नौकरीशुदा मां ने अपने एक मनोवैज्ञानिक मित्र से सम्पर्क किया, तब उसने मां को समझाया कि सम्भव है कि नीता ने खुद ही अपने हाथ कटवा लिए हों। माता पिता के तो गोया होश ही उड़ गए। इन दिनों नीता की नियमित कौन्सलिंग चल रही है और वह अपने आप को बेहतर महसूस कर रही है।

? अंजलि सिन्हा


टीवी चैनलों पर एकाधिकार

    टीवी चैनलों पर जो कुछ हम देखते सुनते हैं और उसके आधार पर अपनी एक समझ बनाते हैं वो कितना सही है? टीवी की खबरों पर विश्वास न भी करें तो वहां होने वाली बहसों से हमारे विचार जरूरत प्रभावित होते हैं। लेकिन उन बहसों को जो लोग दिशा देते हैं वो कौन लोग हैं? क्या हम लोग कभी इस बात पर सोच पाते हैं? दरअसल शहरी मध्यवर्ग का बड़ा हिस्सा टीवी देखता है। भारत में इस समय करीब 825 टीवी चैनल चल रहे हैं। करीब दस करोड़ परिवार पे चैनल देखते हैं। मीडिया और मंनोरंजन उद्योग का मूल्यांकन करने वाली संस्था केपीएमजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 तक यह उद्योग बढ़कर 1,27,500 करोड़ रुपये का हो जाएगा।

 

? विजय प्रताप


फलक-आफरीन की मौत से

खत्म हुआ देश का गौरव

     दो मासूमों की एक ही कहानी। दोनों का अपराधा यही था कि वे नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती थीं। दोनों ही सामाजिक विषमताओं का अत्याचार का शिकार हुई। मामला हत्या का नहीं, बल्कि उससे भी बड़ा है। देश में लचीले कानून के तहत सब कुछ ऐसा हो रहा है,जिससे अपराधियों को कानून का भय नहीं है। कानून से खेलना उनकी आदत में शुमार है। जेल में जितने अपराधी हैं,उससे अधिक खतरनाक अपराधी समाज में खुले आम घूम रहे हैं। मासूम फलक और आफरीन की मौत समाज के लिए कलंक है। अपनी मौत से वे ये बता गई कि समाज में ऐसे हत्यारे भी मौजूद हैं, जो जननी को मौत के घात उतारने में देर नहीं करते।

? डॉ. महेश परिमल


वित्तीय जागरूकता से

हम क्यों अंजान रहें?

    हॉ बात एजेंट विनोद की नहीं बल्कि एजेंट पैनी की होगी ! ये एजेंट पैनी कौन है? एजेंट पैनी और बिल पावर इन आपरेशन फायनेंश या एजेंट पैनी टू कोई जासूसी चरित्र या फिल्म नहीं है बल्कि चीन में  8 वर्ष से लेकर 12 वर्ष की उम्र के स्कुली बच्चों के बीच चलाया जा रहा वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम है।कामिक बुक की शैली में तैयार इस कार्यक्रम में सिटी फाउण्डेशन चाइना के कलाकार नाटक की शैली में बच्चों के बीच वित्तीय सुरक्षा बजट,बचत के लाभ औरवित्तीय फर्जीवाड़े को समझातें हैं।सिटी फाउण्डेशन चाइना का यह कार्यक्रम बीजिंग,संघाई,शेनजेन और गुआंगजू आदि शहरों के स्कूलों में बच्चों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है।

? डॉ. सुनील शर्मा


मध्यप्रदेश में फिर सुनिये जलसंकट का राग

     प्रदेश में  पेयजल की संघर्षमय यात्रा अप्रैल प्रांरभ होने के साथ एक बार फिर नई-नई समस्याओं और विसंगतियों के साथ प्रारंभ हो गई है। एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार केवल रीवा संभाग को छोड़कर प्रदेश के अधिसंख्य संभाग पानी की गंभीर समस्या के चलते नगरीय और ग्रामीण स्तर पर संकट में फंसते नजर आ रहे हैं, संभावना यह है कि जल परिवहन के लिए विशाल राशि का प्रबंध किया जाना होगा ताकि किसी तरह नागरिक अपना जीवन और गर्मी का मौसम काट सकें। अभी गर्मी के बाकायदा शुरू होने से पहले ही हाल यह है कि प्रदेश के 365 शहरी निकायों में से 62 निकायों में तीन दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

? शब्बीर कादरी


सबके लिए अनिवार्य होगा : विवाह का पंजीकरण

    हाल ही में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण कानून में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। अब इसमें विवाह के पंजीयन का प्रावधान सम्मिलित किया जाएगा। यद्यपि वर्ष 2006 में ही सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि सभी धर्मों के लिए एक विवाह पंजीकरण कानून बनाया जाए और देश का प्रत्येक नागरिक जिस राज्य में विवाह करें, उसी राज्य में विवाह का पंजीयन किया जाए चाहे वे जिस भी धर्म के अनुयायी हों। मगर अब जाकर वर्ष 2012 में जन्म एवं मृत्यु अधिनियम 1969 में संशोधन का प्रस्ताव आया तो केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इसी में सभी धर्मों के लिए अनिवार्य विवाह पंजीयन को जोड़ने का निर्णय लिया।

? डॉ. गीता गुप्त


  23 अप्रेल2012

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