संस्करण: 23मार्च-2009

कब आएगी मेट्रो ट्रेन
 

 

निलय श्रीवास्तव

भी बड़ा शहर बना, फिर महानगर की कतार में खड़ा हुआ भोपाल शहर। अतिक्रमण का दर्द भोगने के बाद अब शहर की सुंदरता राजनेताओं के माथे की लकीर बन गयी है। हमारे राजनेता पहले भोपाल को पेरिस बनाना चाहते थे, अब चाहते हैं कि भोपाल में दिल्ली कलकत्ता की तरह मेट्रो ट्रेन चलाई जाए। हालांकि मेट्रो ट्रेन के लिए शहर का माहौल तैयार नहीं है। अतिक्रमण इसमें सबसे बड़ी बाधा बनेगा। आलम यह है कि मंडीदीप से लेकर बैरागढ़ तक बसाहट ही बसाहट है। कमोवेश यही स्थिति दूसरी दिशाओं में भी है। नगर की सड़के इतनी विकसित नहीं हुयी कि उन पर यातायात त्वरित रूप से हो सके। यही कारण है कि समस्या बढ़ती ही जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में देश के जिन महानगरों की संख्या तेजी से बढ़ी है उनमें भोपाल का अग्रणी स्थान है। वस्तुत: विस्तार के हिसाब से भी भोपाल जितना बड़ा हुआ है, आज भी नगर के एक कोने से दूसरे कोने तक जाना बड़ी समस्या बन गया है।

मेट्रो ट्रेन सही अर्थों में भोपाल के लिए अपरिहार्य हो चुकी है। यह नगर वर्तमान में बैरागढ़ से लेकर आनंद नगर तथा इस्लाम नगर से लेकर कोलार तक इतनी दूर चला गया है कि तेज से तेज वाहन पर सवार होकर जाने से घंटों लग जाते हैं क्योंकि सड़कों पर भीड़ अधिक रहती है। मंडीदीप से शाहपुरा तक मीलों लंबी दूरी तथा उधार छोला रोड़ का निशातपुरा से आगे तक विस्तार समस्या को और भी कठिन बना देता है। इन दूरियों के कारण ही हर तरह के वाहनों की रेलमरेल इसलिए बढ़ती जा रही है क्योंकि बसों आदि से जाने में जितना समय लगता है उसके मुकाबले निजी वाहन कम ही समय लेते हैं। यही कारण है कि मेट्रों ट्रेन भोपाल के लिए सिर्फ सपना ही है, ऐसा सपना जिस पर काम शुरू भी हो जाए लेकिन सफलता की अनिश्चितता बनी ही रहेगी। सराहना की जाना चाहिए कि मधयप्रदेश के नए नगरीय विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने विगत माह प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे भोपाल तथा इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने के बारे में सर्वे प्रारंभ करें एवं रिपोर्ट 90 दिन में प्रस्तुत करें। इसके अलावा बाबूलाल गौर ने गत् दिनों दिल्ली में मेट्रों प्रमुख ई. श्री धारन से मुलाकात करके जो सिलसिला प्रारंभ किया है उसको केवल वहीं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रयास किए जाने चाहिए कि सफलता जल्द दृष्टिगोचर हो। वैसे जहां तक श्रीधारन का सवाल है उनकी गणना न केवल भारत अपितु संसार के ऐसे विशेषज्ञों में है जो चमत्कार कर सकते हैं। याद रहे कि दिल्ली मेट्रो को श्रीधारन ने जिस दक्षता के साथ तेजी से साकार किया है एवं प्रगति कार्य निरंतर बढ़ा रहे है, उससे विश्व भर के विशेषज्ञ चमत्कृत हैं। श्री धारन ने उस पुरानी दिल्ली में मेट्रों को चलाकर दिखा दिया है जिसकी कभी कल्पना नहीं की गयी होगी। पुरानी दिल्ली में भूमिगत निर्माण जिस ढंग से किया गया है वह कल्पनातीत प्रतीत होता है। मेट्रो ट्रेन के मामले में विशेषज्ञ श्री धारन निश्चित रूप से बड़े महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। मधयप्रदेश के नगरीय विकास मंत्री बाबूलाल गौर यदि श्री धारन को भोपाल-इंदौर की मेट्रो से जोड़ सकें तो निश्चित रूप से यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।

विशेषज्ञों ने वर्षों पहले ही कह दिया था कि भोपाल, इंदौर ही नहीं बल्कि मधयप्रदेश के हर नगर के लिए मेट्रो की योजना बना ली जानी चाहिए। वैसे भोपाल तथा इंदौर में अभी तक मेट्रो सेवा प्रारंभ हो जानी चाहिए थी परंतु हमारे यहां समय से कार्य करने की जैसे कोई प्रथा ही नहीं है। कहने के लिए एक से एक दूरदर्शी नेता हमारे यहां सत्तासीन होते हैं, उन्हें बड़े अधिकार भी प्राप्त होते हैं। परंतु वे अपना सारा समय सत्ता की कुर्सी को सुरक्षित करने में ही लगा देते हैं। महानगर का रूप ले रहे बड़े शहरों में इस समय आर्थिक, सामाजिक स्तर पर जिस तरह का परिवर्तन आ रहा है उससे प्रतीत होता है कि जिस तरह दिल्ली और मुंबई में सड़कों पर वाहनों का चलना एक बड़ी समस्या बन गया है यह स्थिति भोपाल तथा इंदौर में तो आ ही चुकी है, राज्य के अन्य नगरों में भी उसे आने में विलंब नहीं लगेगा। अब चूंकि भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सर्वे आरंभ होने वाला है, पूरा काम होने में सात साल का समय लग सकता है। योजना 12 हजार करोड़ रुपए की है। योजना में विभिन्न पहलुओं पर बारिकी से अधययन करना होगा ताकि कहीं भ्रष्टाचार अथवा विलंब की संभावना न रहे। आशा की जाना चाहिए कि मेट्रो ट्रेन भोपाल सहित विदिशा, रायसेन तथा सीहोर जिले के नागरिकों के आवागमन का साधान बनेगी।

 


निलय श्रीवास्तव