संस्करण: 23फरवरी-2009

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सत्ता के लिए हर उसूल को भुलाने का रिवाज

मारे देश में अब यह बात स्पष्ट हो चली है कि राजनैतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए हर उसूल को भुलाने के लिए राजी हैं। इसका सबसे ताज़ा नमूना हमारे सामने उत्तर प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बदलते रिश्तों को लेकर सामने आया है। >भवानी शंकर


पवित्र अपवित्र नगर का विभाजनकारी खेल

ध्यप्रदेश सरकार ने गत 10 फरबरी 2009 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में मैहर, चित्रकूट और सलकनपुर को भी पवित्र क्षेत्र घोषित करने का फैसला ले लिया। इस फैसले के परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में दो तरह के नगर और दो तरह के नागरिक हो गये हैं, एक पवित्र नगर वाले और दूसरे अपवित्र नगर वाले। >वीरेंद्र जैन


नौकरशाही के आगे नतमस्तक सरकार

शिवराज सिंह चौहान की दोबारा ताजपोशी के बाद उम्मीद की जा रही थी कि दूसरी पारी में वे नौकरशाही पर लगाम कसने में कामयाब होंगे, लेकिन वे इस मामले में पूरी तरह नाकारा साबित हुए हैं। हालात इतने बदतर हैं कि निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों में युवा इंजीनियर पदोन्नति की आस लगाए बैठे हैं और सरकार ने अवकाश प्राप्त इंजीनियरों का सेवाकाल बढ़ा दिया है।

>महेश बाग़ी


मुख्यमंत्री का कथन और मालवा की प्यास

ज्जैन में म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उज्जैन सहित मालवा की प्यास बुझाने के लिए नर्मदा को लाएगें इस योजना पर 'दस हजार करोड़' रुपए खर्च होंगे। पानी की व्यवस्था की जाये तो यह तो अच्छा है। लेकिन जो स्त्रोत सूख गये हैं या तथाकथित विकास के नाम पर नष्ट कर दिये गये है उनका क्या ? >जीवनसिंह ठाकुर


ट्रेन से भी तेज़ दौड़ता है लालूजी का ब्रेन

लालू प्रसाद यादवजी ने जिस दिन से राजनीति में कदम रखा है, उसी दिन से उनके व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली से लोग हरदम चमत्कृत होते आये हैं। प्रादेशिक स्तर की राजनीति में अपने राजनैतिक जीवन के अनेक प्लस और माइनस कार्यों से वे समाज के प्राय: सभी वर्ग के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनते आ रहे हैं। >राजेंद्र जोशी


रैगिंग : किसी को मजा, किसी की मौत

भाजानलेवा साबित हो रहे रैगिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब तकनीकी शिक्षा संस्थानों के प्रशासन को सतर्क हो जाना चाहिए। पीड़ित छात्र या छात्रा के साथ अब न्याय की उम्मीद ज्यादा बंधा गई है। साथ ही दंड के कठोर विधाान के कारण अब उम्मीद की जा रही है कि ऐसे अमानुषिक व्यवहार शायद न किये जायें। >अंजनी कुमार झा


फसलें उजाड़ते आनुवंषिक बीज

नुवंषिक बीज फसलें फल और सब्जी की पारंपरिक खेती को उजाड़ने का काम कर रहे हैं। आनुवंषिकी अभियांत्रिकी (जेनिटिक इंजीनियरिंग) के बहाने जिस धाान को खेतों में बोया, वह बासमती चावल की पट्टी को बरबाद कर देने वाली जहरीली धाान साबित हुई। परावधिर्त बीजों से फल और सब्जियों की उम्दा किस्में भी नश्ट हो रही हैं।   >प्रमोद भार्गव


विज्ञान दिवस:28फरवरी2009
कैसे होगें विज्ञान में नए अनुसंधान?

भी हाल ही में दिसम्बर 2009में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान कंाग्रेस के अधिवेशन में युवाओं की घटती भागीदारी पर काफी चिंता व्यक्त की गई थी,तथा इसे देशभर में छात्रों की विज्ञान विषयों के प्रति बढ़ती अरूचि का परिणाम माना गया।विज्ञान के प्रति छात्रों की घटती रूचि के होने दुष्परिणामों पर भी अधिवेशन में मनन किया गया। >डॉ. सुनील शर्मा


भारत में मातृ-मृत्यु दर वृध्दि चिंताजनक

क्कीसवी सदी में भी भारतीय महिलाएँ इतनी जागरूक नहीं हो सकी हैं कि मातृ-मृत्यु दर को बढ़ने से रोका जा सके। देश में प्रति वर्ष 78 हज़ार महिलाओं की प्रसव काल में मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण हैं सर्वाधिक बुरी दशा उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, मधय-प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और असम की है जहाँ 42: महिलाएं प्रसव के दौरान मौत का शिकार हो जाती हैं। >डॉ. गीता गुप्त


''बिजली संकट-बचत ही एकमात्र हल''

राबिजली हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जैसे-जैसे हमारे देश ने औद्योगिक व तकनीकी दृष्टि से विकास किया है, वैसे-वैसे हमारी बिजली पर निर्भरता भी बढ़ती गई है। आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र जैसे कृषि, उद्योग, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा, संचार यहाँ तक कि रसोई में भी बिजली के बिना काम करना असंभव सा लगता है। >स्वाति शर्मा


राष्ट्रीय एकता मजबूत करने के
लिए गांधीवादियों का शंखनाद

नेक गांधीवादी संगठनों और गांधीवादियों की संयुक्त पहल पर बंगलौर में 13 से 15 फरवरी 2009 तक राष्ट्रीय एकता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न स्थानों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में राष्ट्रीय एकता को चुनौतियां और उनसे मुकाबला करने की रणनीति पर विचार किया गया।  >एल.एस.हरदेनिया


आत्महत्या समाधान नहीं, जीवन का अंत है
ब से वैश्विक मंदी ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू किया है, तब से केवल देश ही नहीं, बल्कि महानगरों, शहरों एवं कस्बों में आत्महत्या का सिलसिला शुरू हो गया है। हर रोज अखबारों में हम पढ़ते हैं कि फलां शहर में एक व्यक्ति ने घर के सभी सदस्यों को मारकर स्वयं आत्महत्या कर ली।

>डॉ.महेश परिमल


23फरवरी2009

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