संस्करण: 22 जुलाई -2013

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क्या मैं हिंदू विरोधी हूँ?

       सोशल मीडिया पर मुझे संघी और मोदी द्वारा भाड़े पर लिये गये लोगों के माध्यम से सर्वाधिक अपमानित व्यक्ति होने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त है जो अहमदाबाद के निकट मणिपुर साणंद के संस्कार धाम से काम कर रहे है।

               यह गैंग जिसकी उम्र मेरे नाती-पोतों से भी कम है वे मुझे कभी डोगविजय सिंह कह रहे है तो कभी पिगविजय सिंह। कभी मेरे बारे में कहा जाता है कि मैने इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया और कभी कहा जाता है कि ईसाई धर्म। 

? दिग्विजय सिंह

(महासचिव, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी)


नरेन्द्र मोदी का सरदार पटेल के प्रति प्रेम  

झूॅठ और दुष्प्रचार में हिटलर के साथी गोएबल्स को भी मात दे रहे है मोदी

       गुजरात के मुख्यमंत्री और हिंदुत्व आइकन नरेंद्र मोदी ने 11 जून, 2013 को गांधीनगर में पशुधन और दुग्ध विकास पर आयोजित एक अखिल भारतीय सम्मेलन का उद्धाटन करते हुए किसानों से लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को इकट्ठा करने के राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की जिन्हे इकट्ठा करने के बाद उनसे सरदार पटेल की स्मृति में ''एकता की प्रतिमा'' बनाई जायेगी जो नेहरू के मंत्रिमंडल में स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री थे।

? शमसुल इस्लाम

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती महाविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के व्याख्याता तथा एक सक्रिय रंगमंचकमी जिन्होने राष्ट्रवाद तथा द्वि-राष्ट्र के सिध्दान्त पर गहन शोधकार्य किया है)


बोध गया में आतंकी हमला

जांच एजेंसियों के निष्पक्षता की जरूरत

      ठ दिन का वक्त गुजर गया, जब महात्मा बुध्द की जीवनयात्रा में अहम समझे जाने वाली बोध गया में नौ बम विस्फोट हुए थे। जांचकर्ता अभी भी किसी नतीजे तक पहुंचे नहीं है,खुद गृहमंत्री ने कहा है कि इस मामले में भले ही विलम्ब हो मगर जल्दबाजी में किसी गलत नतीजे तक पहुंचना नहीं चाहते हैं। उनके मुताबिक जिन तीन कोणों से जांच हो रही है वह है 'स्थानीय साम्प्रदायिक मुद्दे',अन्तरराष्ट्रीय घुसपैठ और माओवाद। राज्य में सत्तासीन जद यू के नेताओं ने भी इसके पीछे के षडयंत्र के पहलू पर जोर दिया है।

 ? सुभाष गाताड़े


दागी के परिवारियों का पार्टीप्रवेश, 

मुलायम सिंह की भाजपाई हरकत

      पुरानी कथा कहानियों में ऐसा जिक्र आता है जिसमें निरवंशिया राजा के निधन पश्चात नगरवासी ऐसा भी तय कर लेते हैं कि किसी तय तिथि पर नगर की सीमा में सबसे पहले प्रवेश करने वाले व्यक्ति को ही राजा बना दिया जाये। सामंती अवशेषों के प्रभाव वाले लोकतंत्र में भी कुछ विचित्र संयोगों से उभरे व्यक्तियों को सरकारें चलाने के अवसर मिल जाते हैं। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह ऐसे ही नेता हैं, जो वैसे तो अच्छे प्रशासक नहीं हैं पर आगामी अवसरों की कल्पना कर एच. डी. देवगौड़ा की तरह देश के प्रधानमंत्री बनने तक के सपने देखने लगे हैं।

? वीरेन्द्र जैन


तेरी रहबरी का सवाल है

         किसी सरकार या संगठन के लिए इससे दुखद क्या हो सकता है कि उसकी सबसे कमजोर कड़ी ही उसके गले की फाँस बन जाए। जाहिर तौर पर लोकतान्त्रिक व्यवस्था में किसी सरकार का विरोध राजनीतिक रूप से औचित्यहीन तो कतई नहीं हो सकता लेकिन सरकार का विरोध सिर्फ इसलिए हो रहा हो कि उसकी सांप्रदायिक कारस्तानियों के कारण किसी व्यक्ति और समाज के लोकतान्त्रिक अधिकार या फिर सामाजिक ढांचे को खतरा पहुँचे तो इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।  

 

 ?   अनुज शुक्ला


गंभीर हैं इशरत मामले में सीबीआई के खुलासे

           मुंबई की एक मेधावी छात्रा इशरतजहां के खिलाफ देश की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था के अन्याय की यह कहानी लगभग नौ साल पुरानी है। देश के खुफिया अधिकारियों द्वारा राजनैतिक संरक्षण में इशरत के प्रति किये गये इस जघन्यतम अपराध की कहानी के सामने आ जाने के बाद, जहां एक ओर उसके परिवार को आतंकवादी होने की सामाजिक जलालत से नौ साल बाद लगभग मुक्ति मिल,गयी वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज ने अपनी एक ऐसी होनहार बेटी को असमय खो दिया जिसका जुल्म और अपराध की दुनिया से दूर दूर तक कोई वास्ता ही नही था।  

? हरेराम मिश्र


मोदी जब भी बोलते हैं वे देश को बांटने और भड़काने वाली भाषा में ही बोलते हैं

      रेन्द्र मोदी जब भी बोलते हैं देश को बांटने वाली बातें कहते हैं। पिछले कुछ दिनों के दौरान उनने अनेक आपत्तिजनक बातें कहीं हैं। मोदी ने अभी हाल में तीन आपत्तिजनक बातें कहीं हैं। पहली आपत्तिजनक बात यह है कि उनने 2002के प्रायोजित हत्याकांड में मारे गये लोगों की तुलना कुत्ते के पिल्ले से की है। दूसरी आपत्तिजनक बात उनने यह कही है कि वे हिन्दू राष्ट्रभक्त हैं। तीसरी आपत्तिजनक बात यह कही कि कांग्रेस अपनी असफलताओं को छिपाने के लिये बुर्का ओड़ लेती है। 

? एल.एस.हरदेनिया


काटने लगे नेतागण राजनीति की फसल

भाषण की शैली में करने लगे अटल की नकल

      र्ष 2013 के अंत तक कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा के निर्वाचनों और 2014 के आरंभ में होने वाले लोकसभा के निर्वाचन की घड़ी जैसे जैसे नजदीक आती जा रही है,राजनैतिक दलों के नेताओं के भाषणों,वक्तव्यों और आचरणों में अतिरेक बढ़ता जा रहा है। राजनैतिक दलों के ऐसे कतिपय नेता जिन्हें भ्रम में जीने की आदत पड़ गई है और जो शेख चिल्ली की तरह स्वप्न में ही डूबे रहते हैं,उनकी हरकतों में व्यापक रूप से बदलाव देखा जाने लगा है।

? राजेन्द्र जोशी


गरीब की रोटी पर राजनीति क्यों

        हालांकि मध्यप्रदेश सरकार दावे करती है कि उसने प्रदेश को स्वर्णिम प्रदेश बना दिया लेकिन यह दावा कितना खोखला है,इसकी हकीकत हाल ही में पन्ना जिले की एक ग्राम पंचायत में सामने आ गई। पन्ना जिले की देवेन्द्रनगर तहसील की ग्राम पंचायत राजापुर में लोग दो जून की रोटी के लिए अपने कलेजे के टुकड़ों को हर साल गिरवी रखते हैं,अन्यथा परिवार भूखों मर जाएगा। शर्मनाक तो यह है कि सूचना देने के बाद भी एसडीएम एसएल प्रजापति कहते हैं,यह नहीं हो सकता। गांव की शुक्कनबाई ने अपने 13वर्षीय पुत्र रामकुमार गौड को 6 बोरा अनाज की खातिर एक साल के लिये गिरवी रखा है।

? विवेकानंद


मप्र में बचपन सुरक्षित, न बेटिया

       लाडली लक्ष्मी, बेटी बचाओ, महिला सशक्तिकरण, अटल बाल मिशन जैसी कई लोक-लुभावन योजनाओं की सपलता का दंभ भरने वाली शिवराज सरकार वास्तव में इन मामलों कितनी गंभीर है इसका खुलासा समय-समय पर होता रहता है। पिछले दिनों राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में भी सरकार के मुंह पर तमाचा जड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार मप्र ने बच्चों से दुष्कर्म की घटनाओं में भारी वृध्दि हुई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से 2011 के बीच ऐसे मामले 335 फीसदी बढे हैं। जिन बच्चों के खाने-खेलने और लिखने-पढ़ने के दिन हैं वे दरिंदगी के शिकार हो रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि ऐसे मामलों में लगातार इजाफा होते रहने के बावजूद शासन-प्रशासन तंत्र की नींद नहीं खुली तथा उसने इस दिशा में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया,जिनसे बचपन को संरक्षण मिलता।    

 

? महेश बाग़ी


खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर किन्तु परन्तु की जरूरत नहीं

        राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कानून द्वारा रोजगार गारण्टी,शिक्षा का अधिकार अधिनियम द्वारा बच्चों को शिक्षा  की गारण्टी तथा आधार के जरिए सुपात्र को सब्सिडी भुगतान की गारण्टी  के बाद अब केन्द्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के जरिए देश के 67 फीसदी यानि लगभग 90 करोड़ नागरिकों को भोजन का अधिकार देने का काम किया है। इसके तहत 3 रूपये किलोग्राम की दर से चावल, 2 रूप्ये किलोग्राम की दर से गेहूॅ और 1 रूपये किलो ग्राम की दर से मोटा अनाज  मुहैया कराएॅ जाएॅगें।

? डॉ. सुनील शर्मा

मीडिया और माफिया की मिटती दूरी

      भारतीय संवैधनिक व्यवस्था में मीडिया को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मीडिया को लोकतंत्र का प्रखर प्रहरी और चतुर्थ स्तम्भ माना जाता है। न्यायपालिका,कार्यपालिका और विधायिका भारतीय संविधान के तीन प्रमुख अगं है तो मीडिया को चौथे अंग के रूप में मान्यता दी गई है। भारत को आजादी दिलाने से लेकर आज तक भी मीडिया की सक्रियता लगतार बढ रही है। मीडिया का बढता प्रभाव सबके लिए आकर्षण का विषय भी रहा है। इस दौर में जबकि मीडिया के विविध रूप नई नर्इ्र तकनीक के साथ सामने आ रहे हैं तो आमजन की अपेक्षा मीडिया से अधिक बढ गई है।

? अमिताभ पाण्डेय


निष्प्राण कर गए प्राण

        प्राण चले गए, 93 साल की उम्र लेकर। इस दौरान उन्हों ने हमें खूब डराया, खूब रुलाया और कभी-कभी तो हँसाया भी। अंत तक प्राणवान बने रहे प्राण,आज हमारे बीच नहीं है। अब खामोश हो गई उनकी आवाज। आज भी जब हमसे कुछ गलत हो जाएगा, तो वे कहेंगे-बरखुरदार,ये क्या। कर रहे हो? जानते नहीं बुरे काम का हश्र भी बुरा होता है। हमें ही देख लो, इतनी गालियाँ खाई कि जिंदगी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। हर बार मौत जिंदगी से हार जाती। पर इस बार मौत ने जिंदगी को मात दे दी। सचमुच प्राण जब तक थे,प्राणवान थे,अब नहीं हैं,तो पूरी मायानगरी ही निष्प्राण हो गई।

? डॉ. महेश परिमल


तो नहीं पड़ती गोंड आदिवासियों को खाद्य सुरक्षा कानून की जरूरत

बेजोड़ थी गोंड

आदिवासियों की खाद्य सुरक्षा

       रकार ने देश से भुखमरी की समस्या से निपटने  के लिए सरकार ने आखिरकार खाद्य सुरक्षा बिल पास कर दिया। सरकार इसे बहुत बड़ा कदम मान रही है और इस अध्यादेश को पारित करे के लिए अपनी पीठ थपथपा रही है। हालांकि क्या यह सोचने योग्य विषय नहीं है कि गरीब और आदिवासी दाने-दाने को मोहताज कैसे हुए, जबकि आज से करीब 50-60 साल पहले तक वे खान-पान के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर थे। संसाधन, सुविधाओं और सरकार के बिना ही आदिवासी प्रकृति की मदद से न सिर्फ अपना पेट भरने का इंतजाम कर लेते थे, बल्कि हष्टपुष्ट भी रहते थे।   

 

? रीतेश पुरोहित


  22 जुलाई -2013

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