संस्करण: 22 अगस्त- 2011

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अन्ना हजारे के नाम खुला खत

            दरणीय हजारेजी सादर प्रणाम

           दरअसल यह खत आपकी टीम के नाम है जिनकी सलाह से आपके वक्तव्य सामने आते हैं,किंतु किसी भी संस्था को जब कोई पत्र दिया जाता है तो वह संस्था के प्रमुख को सम्बोधित किया जाता है जैसे कि ठेकों के टेंडर तक सम्बन्धित बाबू को नहीं अपितु राष्ट्रपति भारत सरकार को सम्बोधित होते हैं। 

  ? वीरेन्द्र जैन


सिविल सोसाइटी के आन्दोलन का समय

     लोकसभा में विपक्ष के नेता पद पर आरूढ भाजपा की सुषमा स्वराज अपनी पार्टी की कुटिल राजनीति में अपने पूर्ववर्तियों की भांति परिपक्व नहीं हैं क्योंकि अब तक वे किसी फिल्म कलाकार की तरह दूसरों द्वारा लिखे संवाद बोलती रही हैं। यही कारण है कि उन्होंने अपनी सहजता में इस सत्य को शब्दों में भी व्यक्त कर दिया कि भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में प्रात:ही तय हो जाता है कि आज संसद को चलने देना है या नहीं।

? जैन वी.के.


मध्यप्रदेश में आतंक की आहट

      भारत सरकार द्वारा पारित सूचना का अधिकार अधिनियम जहां भ्रष्ट लोगों के चेहरों पर पड़ा नक़ाब उतार रहा है, वहीं भ्रष्ट तत्व इस अधिनियम का लाभ उठाने वालों को निशाना बना रहे हैं। बीते साल 20 अक्टूबर को इसकी शुरुआत हुई थी,जब अहमदाबाद हाईकोर्ट परिसर में सरेआम आरटीआई एक्टिविस्ट अमित जेठवा की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 31 मई को महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले में दत्ता पाटील को शिकार बनाया गया।

? महेश बागी


संदर्भ : माखनलाल राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में गैर कानूनी नियुक्तियां

सरकारों के साम्प्रदायिक एजंडे का विरोध हो

    मारे मुल्क के किसी भी हिस्से में जब भी बीजेपी या उसके गठबंधन की सरकारें सत्ता में आती हैं, तो उनका सबसे पहला कदम आरएसएस के एजंडे को आहिस्ता-आहिस्ता लागू करना होता है। और अपने इस एजंडे को अमल में लाने के लिए वे किसी भी हद तक गुजर जाती हैं। नरेन्द्र मोदी का गुजरात इसकी एक छोटी सी मिसाल है। गुजरात में मोदी सरकार ने संघ के साम्प्रदायिक एजंडे को अपने यहां हमेशा खुलकर लागू किया है। कमोबेश इसी राह पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं।

? जाहिद खान


किसी का कटा हुआ है हाथ, किसी का पांव

क्या मंझधार में ही डूब जायेगी नाव !

    मुद्र में तूफान आया हुआ हो और लहरें उठ रही हो, ऐसे में नैया खेने वाले नाविकों के हाथ कटे हों, किसी के पांव कट गये हों, किसी की मुंडी कटी हो और जुबानें कट गई हों तो क्या ऐसी नाव बीच मझधार में डावांडोल होकर लड़खड़ाकर डूब नहीं जायेगी ?क्या कुछ इस तरह के सवालों से वर्तमान में डगमगा गया है प्रदेश की सत्ता का राजनैतिम माहौल। कोई खिवैया कहता है कप्तान ने हाथ काट दिए हैं,कोई कहता है मैं विकलांग हो गया हूं, ............

? राजेन्द्र जोशी


नज़रों से ओझल

दृष्टिहीनों के सवाल

   दृष्टिहीनों के लिए इम्तिहान के वक्त उपलब्ध किए जाते 'स्क्राइब' अर्थात लेखक का सवाल नए सिरेसे विचारणीय हो उठा है। यह बात पूछी जा रही है कि बीसवीं सदी के मध्य में जिस समझदारी के तहत इसके बारे में नियम तय किए गए थे,वे विज्ञान-टेकनोलोजी की प्रगति,नेत्रहीनों तथा अन्य विशिष्ट चुनौतिवाले लोगों के बारे में इन्सानियत का बदला रूख,अलग देशों द्वारा इस दिशा में उठाए गए कदमों के परिणाम आदि के सन्दर्भ में आखिर किस हद तक प्रासंगिक रह गए हैं।

? सुभाष गाताड़े


सामंती प्रवृत्ति है

उत्तर पुस्तिका देखने पर रोक

       जादी की 64वीं सालगिरह पर देश के छात्रों के लिए इससे अच्छा उपहार दूसरा नहीं हो सकता था जो बीते 9अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले द्वारा दिया। न्यायालय ने कहा कि हर छात्र को अपनी उत्तर पुस्तिका को देखने का अधिकार है कि उसके दिए जबाब को परीक्षक ने किस तरह जॉचा है। सही मायने में यह छात्रों को मिली आजादी है जो उन्हें देश की लगभग भ्रष्ट और अप्रासंगिक हो चुकी परीक्षा प्रणाली की तानाशाही से मुक्ति दिलाती है।

? सुनील अमर


अंगों के व्यापार पर

अंकुश का कानून

    मानव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त और इसके लिए गरीबों के अमानवीय दोहन के मामलों में भारी जुर्माने तथा कड़ी सजा देने के प्रावधान से जुडे मानव अंग प्रत्यारोपण (संशोधन) विधयक 2009 को लोकसभा में पारित हो गया है। इस विधेयक का मूल उद्देश्य मानव अंग निकाले जाने से लेकर उसके प्रत्यारोपण को नियमित एवं सुगन बनाने के साथ-साथ अंगों के नाजायज कारोबार पर रोक लगाना है।

? प्रमोद भार्गव


किचन की ओर वापसी

क्यों घर लौट रही हैं नौकरीशुदा महिलायें!

     दुनियाभर में मन्दी के खतरे की गूंज सुनाई दे रही है। अमेरिका इसकी चपेट में आ चुका है। जाहिर है कि सभी जगह आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ नुकसान के आकलन तथा समाधान के माथापच्ची में जुटे होंगे। कही मन्दी के कारण कामगारों की छंटनी होती है तो अधिकतर क्षेत्रों में मालिकों तथा एम्प्लायर को मन्दी एक ऐसा अच्छा बहाना भी मिल जाता है जिसके चलते वह अपने पुराने कर्मचारियों को हटाकर उससे कम वेतन तथा सुविधाओं के नए कर्मचारियों की नियुक्ति कर लेता है।

? अंजलि सिन्हा


कुपोषण से लड़ाई के लिए

दूध उत्पादन में वृध्दि जरूरी है

    बेलगाम मॅहगाई ने देश करोड़ो मध्यमवर्गीय परिवारों  का बजट बिगाड़ दिया  है और गरीबों को रोटी का जुगाड़ कर पाना भी दूभर हो रहा है। ऐसी स्थिति में भूख के साथ साथ कुपोषण तेजी से पांव पसार है। क्योंकि भीषण मॅहगाई के इस दौर में 2400 कैलोरी का आहार जूटा पाना सहज नहीं रह गया है। जो भर पेट रोटी का जुगाड़ कर पा रहे है वो भी कुपोषितों की कतार में आने वाले वाले हैं। 

? डॉ. सुनील शर्मा



जन्मांध फिजियोथेरेपिस्ट ने

मासूम को दी नई जिंदगी

     हते हैं जहाँ चाह, वहाँ राह। मुजिलें तब आसान हो जाती हैं, जब मिल जाता है कोई अपना सा। थोड़ा-सा बल, थोड़ी-सी हिम्मत, थोड़ा-सा अपनापन और थोड़ा-सा प्यार, बस हो जाती हैं मंजिलें पार। सोचो, कोई चौथी मंजिल से गिरे, खून का एक कतरा तक न निकले, फिर भी गरदन से नीचे का पूरा भाग लकवाग्रस्त हो जाए, तो कैसी हो जाएगी जिंदगी। जिंदगी,उस मासूम की, जिसने अभी केवल चार वसंत भी नहीं देखे हैं।

? डॉ. महेश परिमल



  22 अगस्त-2011

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