संस्करण: 22 अप्रेल-2013

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पद की लालच,

वर्चस्व की जंग

       भाजपा में प्रधानमंत्री पद को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के सबसे बुजुर्ग नेता लालकृष्ण आडवाणी के बीच घमासान अब खुलकर सामने आ चुका है। पार्टी के नेताओं में आपसी खींचतान और पल-पल बदलती निष्ठाएं उजागर रूप में दिखने लगी हैं। वहीं अब तक सहयोगी की भावनाओं का ख्याल रखने की वकालत कर रहे भाजपा नेता अपने 17 साल पुराने सहयोगी जदयू को न केवल आंखें दिखाने लगे हैं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दामन पर लगा गुजरात दंगों का काला दाग भी जदयू के मत्थे मढ़ने लगे हैं।

?   विवेकानंद


बोस्टन मैराथन से बनारस के बम धमाकों तक

समुदायों के दोषारोपण का सिलसिला कब तक जारी रहेगा

       मैराथन की दौड़ आपसी सदभाव के लिए आयोजित होती है। वह दुनिया का एकमात्र ऐसा खेल है जिसमें अगर प्रतियोगी गिरता है तो साथ में दौड़नेवाले लोग उसे उठाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। ऐसा खेल जिसमें सभी के लिए प्रवेश है। गार्डियन अख़बार में लिखे अपने आलेख में रोजर रॉबिन्सन लिखते हैं कि अगर इन्सानियत पर आपका भरोसा टूट रहा है तो मैराथन में जुटी भीड़ को देख सकते हैं,जिसमें हजारों लोग बिल्कुल अजनबियों का उत्साहवर्ध्दन करने के लिए घंटों खड़े रहते हैं।

? के एस चलम


लिज्जत पापड़ मुंबई में शुरू हुआ था और

उसमें मोदी का कोई योगदान नहीं है

       ई दिल्ली में फिक्की लेडीज संगठन के अपने भाषण में नरेन्द्र मोदी ने आज लिज्जत पापड़ पर भी अपनी दावेदारी ठोंक दी और बताया कि गुजरात की आदिवासी महिलायें यह पापड़ बनाती हैं। लेकिन जो लोग लिज्जत पापड़ के आंदोलन को समझते हैं उनको जो मालूम है वह मोदी जी के दावे से बिलकुल अलग है । इस बात में सच्चाई हो सकती है कि गुजरात में भी लिज्जत पापड़ बनता हो क्योंकि अब उसकी शाखाएं पूरे देश में हैं लेकिन उस आंदोलन की शुरुआत गुजरात से तो बिलकुल नहीं हुई थी। मुंबई के गिरगांव इलाके की एक बिल्डिंग में रहने वाली सात महिलाओं ने पापड़ बनाना शुरू किया था ।

? शेष नारायण सिंह


भाजपा का अपमान बोध से

दूर तक सम्बन्ध नहीं

         पिछले दिनों भाजपा कार्यालय में एक और चेहरा बचाने की ओट तैयार की गयी।

              जेडीयू, ने अपने सम्मेलन में यह जोर शोर से यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ऐसी भाजपा के साथ गठबन्धन में सम्मलित नहीं होंगे जिन्हें नरेन्द्र मोदी जैसे बदनाम राजनाथ सिंह के शब्दों में मशहूर, नेता को प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी के रूप में चुनने की मजबूरी हो। उन्होंने साफ साफ शब्दों में कहा कि वे अटल बिहारी वाजपेयी जैसे उदारवादी चेहरे गोबिन्दाचार्य के शब्दों में मुखौटे, के कारण भाजपा जैसे राजनीतिक अछूत, दल के नेतृत्व में एनडीए में सम्मलित हुए थे और वैसी ही दशा में बने रह सकते हैं।

? वीरेन्द्र जैन


महत्त्वाकांक्षा की

फिसलन और आडवाणी

         भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी उम्र के सबसे परिपक्व दौर में हैं। इस उम्र में सार्वजनिक जीवन जी रहे किसी व्यक्ति से वैचारिक स्थिरता की उम्मीद की जाती है, फिसलन की नहीं लेकिन बीते सात-आठ वर्षों में श्री आडवाणी ने कई तरह के परस्पर विरोधी बयान देकर अपनी राजनीतिक स्थिति और भविष्य मजबूत करने की कोशिश की है। ये और बात है कि उनके ऐसे प्रयास उनकी वर्षों से संचित और अर्जित राजनीतिक हैसियत को लगातार छीज रहे हैं।

 ?   सुनील अमर


नीतेश जी ढूंढते रह जाओगे

भाजपा में सेक्यूलर नेता को

                  ए.डी.ए. के प्रमुख घटक जनता दल यूनाईटेड ने प्रधान मंत्री पद के लिये नरेन्दर मोदी का नाम पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेता एवं बिहार के मुख्य मंत्री नीतेश कुमार का कहना हैं कि एन.डी.ए. का ऐसा नेता ही प्रधानमंत्री बन सकता है जिसकी छवि सेक्यूलर है। नरेन्द्र मोदी सेक्यूलर छवि वाले नेता नहीं है। उनके इस मूल्यांकन से असहमत होना मुश्किल है। सेक्यूलर छवि होना तो दूर की बात है नरेन्द्र मोदी की छवि एक घनघोर साम्प्रदायिक नेता की है। 2002 के दंगों में उनने एक भी मुसलमान को दंगाईयों से नहीं बचाया।  

? एल.एस.हरदेनिया


प्रजातंत्र और

भारतीय मुसलमान

      प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैय्यबा के स्व-नियुक्त नेता हाफिज मोहम्मद सईद भले ही यह मानते हों कि बालीवुड के बादशाह शाहरूख खान के रहने के लिए पाकिस्तान सबसे बेहतर इस्लामिक देश है परंतु सच यह है कि आज भारत, दुनिया का सर्वश्रेष्ठ मुस्लिम देश है। भारत के मुसलमानों को पूर्ण राजनैतिक और धार्मिक स्वतत्रंता प्राप्त है और कानून उन्हें कोई भी आर्थिक या शैक्षणिक गतिविधि करने से नहीं रोकता। वहां का इलेक्ट्रानिक मीडिया और सिनेमा जीवन्त है और उदारवादी सहअस्तित्व का समर्थक भी है।

? तुफैल अहमद


विट्ठलभाईजी ! वो कौए बताऐं-

जिसमें, झूठ बोलने वाले डर जाय !

      र्तमान दौर में उन कौओं की अक्सर याद आती रहती है जिनके डर से झूठ बोलने वाले डर जाया करते थे। वैसे कौए भी अब दुनिया में यदा कदा ही दिख जाय तो बड़ी बात है। एक सुंदर पक्षी होता है, होता है क्या ! हुआ करता है जो सालभर में एक ही बार दिख जाय तो मनुष्य धन्य हो जाता है, वह पक्षी है-नीलकंठ! दशहरे के पुनीत पर्व पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ माना जाता है।

? राजेन्द्र जोशी


पीली धातु से होता मोहभंग

        सोने के दाम लगातार गिर रहे हैं। इसका आशय यही है कि अब पीली धातु का स्वर्णयुग समाप्त हो रहा है। जानकार लोगों से यही कह रहे हैं कि वे अब सोने की कीमतों को देखते हुए न तो सोना खरीदें और न ही बेचने में उतावले हों। अब सवाल यह उठता है कि आखिर किया क्या जाए? सोना यदि आवश्यक है, तो हीे खरीदें। सम्पत्ति के नाम पर सोना खरीदने का अब समय नहीं रहा। जिन्होंने निवेश के लिए सोना खरीदा है, वे क्या करें? उन्हें यही सलाह दी जाती है कि वे उतावले न हों। उत्तर कोरिया के दिन फिर जाएं और संभव है सोने में तेजी आ जाए। 

? डॉ. महेश परिमल


संदर्भ:- मई दिवस 1 मई 2013

वैश्वीकरण के दौर में बदतर होती श्रमिकों की सुरक्षा

       देश की राजधानी दिल्ली समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों ने अपने यहाँ प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाते हुए इसे दंडनीय घोषित कर दिया है। कुछ खास तरह के उत्पादों जैसे तम्बाकू व गुटखों आदि की प्लास्टिक पैकिंग पर सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में रोक लगा रखी है। अनुमान है कि देश के अन्य राज्य भी जल्द ही प्लास्टिक थैलियों के उपयोग पर रोक लगायेगें। हमारे दैनिक जीवन में किस तरह से प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग मौजूद है, यह इसी से जाना जा सकता है कि बीते तीन-चार दशक में यह लगभग 400 गुना तक बढ़ गया है।

 

? डॉ. सुनील शर्मा


अमेरिकी शिक्षक होंगे हथियारबंद

        ज विद्यालयों में बढ़ती हिंसा चिन्ता का विषय है। बच्चों की शिक्षा और परवरिश बहुत कठिन हो चले हैं। विद्यालयों के परिसरों का हिंसा के अखाड़ों में तब्दील हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। विद्यालय का अर्थ है-विद्या का आलय, घर या मंदिर। सचमुच, विद्यालय ज्ञान के मंदिर हैं, जहां विद्यार्थी विद्याधययन करने जाते हैं, हिंसा का पाठ पढ़ने नहीं। फिर वे हिंसक क्यों हो चले हैं ? उनमें हिंसा के बीज कहां से आ जाते हैं ?

? डॉ. गीता गुप्त


  22अप्रेल-2013

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