संस्करण: 22सितम्बर-2008

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नकली जिहादी, असली अपराधी !

विवादों को पैदा कर सस्ती शोहरत हासिल करने में महारत हासिल किए विश्व हिन्दू परिषद के नेता रामबिलास बेदान्ती पिछले दिनों एक ऐसे विवाद में फंस गए, जिससे निकलना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है और सबसे  >सुभाष गाताड़े


'न कुछ' पर राजनीतिक खींचतान के खेल
क्या अमिताभ बच्चन की अस्पष्ट सी क्षमायाचना के बाद मुम्बई में रहने वालों की भाषा की समस्या हल हो गयी है ? आज पूरे देश के लोगों के सामने यह सवाल मुँह बाये खड़ा है कि देश की आर्थिक राजधानी जो व्यक्तियों पर लगने वाले कुल >वीरेन्द्र जैन


मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत

''चारों तरफ विकास की गंगा बह रही है। प्रदेश के सभी नागरिक संतुष्ट हैं।'' यह दावा बार-बार भारतीय जनता पार्टी की ओर से किया जा रहा है।अभी हाल में बंगलोर में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक को अपनी जीत के प्रति आश्वस  >एल.एस.हरदेनिया


  

घोषणाएँ नहीं, हिसाब चाहिए

शिव ने जिस भस्मासुर को पैदा किया था, वहीं भस्मासुर जब उन्हीं की जान के पीछे पड़ गया, तब विष्णु को कामिनी रूप धारण कर भस्मासुर का अंत करना पड़ा था। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कई भस्मासुर पैदा किए हैं, जो अब उन्हीं का पटिया उलटाने को बेताब हैं।  >महेश बाग़ी


कहीं अतिवर्षा, कहीं अल्पवर्षा-दोनों स्थिति बनी अभिशाप

 

प्रकृति का संतुलन बिगड़ते ही मौसम बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। सभी मौसमों के कैलेंडर गड़बड़ा जाते हैं। संसार की भौगोलिक स्थिति एक समान नहीं है। इसी स्थिति पर मौसमों के कैलेंडरों का भी निर्धारण है। भारत वर्ष नदी, पहाड़ी,  >राजेन्द्र जोशी


ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट :

छदम् वैज्ञानिकता का आडम्बर या सार्थक कवायद ?

देश के अग्रणी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान नेशनल इन्स्टिटयूट आफ मेण्टल हेल्थ एण्ड न्यूरो साईंसेस (NIMHANS) के निदेशक की अगुआई में बनी विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की छह सदस्यीय कमेटी ने ब्रेन मैपिंग  >सुभाष गाताड़े


गूगल क्रोम बनाम क्लाउड कम्प्यूटिंग :

विंडोज जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम की अब किसे परवाह है

आज की कम्प्यूटिंग दुनिया इंटरनेट के आसपास ही सिमट रही है। नेट पर आज आपको हर तरह के ऑनलाइन औजार मिलेंगे। संपूर्ण ऑफ़िस सूट।  जिसमें वर्ड, एक्सेल, प्रजेंटेशन इत्यादि आवश्यक सॉफ्टवेयर होते हैं, से लेकर फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर तक,  >रविशंकर श्रीवास्तव


मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारियां गौंड़

मीडिया से जादू की छड़ी जैसे चमत्कार की अपेक्षा करना, गोबर में घी सुखाने के बराबर है, क्योंकि मीडिया ने कोसी नदी की तरह अपनी धार बदल दी है, जिससे निर्माण नहीं सिर्फ विनाश ही हो सकता है। खासकर इलेक्ट्रानिक मीडिया  >एम.के.सिंह


उद्योगों ने खड़े किये पर्यावरणीय संकट

औद्योगिक क्रांति जिस तरह से औद्यौगिक हवस के रूप में सामने आ रही है, उसके चलते पूरी दुनियां में जो पर्यावरणीय संकट बढ़ा है, उसके ऐवज में प्रतिवर्ष एक करोड़ तीस लाख लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं। वायु मंडल में प्रमुख ग्रीन  >प्रमोद भार्गव


पर्यावरण तथा स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डालते कृषि रसायन

बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यानों की आपूर्ति हेतु फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए आज कृषि रसायनों का अंधाधुंध उपयोग किया जा रहा है, जिनसे पर्यावरण प्रदूषित हो गया है और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा > स्वाति शर्मा


उच्च शिक्षा की अवांछित ऊँचाई

मानव जीवन का संतुलन व्यवस्थाओं के अपेक्षित प्रदर्शन पर आधारित होता है। कोई व्यवस्था किस स्तर तक संतुलित प्रदर्शन कर रही है, इसके माप के अनेक  तकनीक है, परन्तु एक आधार यह भी है कि व्यवस्था विशेष्ज्ञ से सम्बध्द समाजों में स्वास्थ्य व शिक्षा सम्बन्धी आवश्यक अवसरों को कितनी अधिक सुलभता   >पुनीत कुमार


हीमोफीलिया-अनुवांशिक बीमारी पर सरकार को ध्यान देना आवश्यक

इक्कीसवीं सदी में यदि आम जनता का एक बड़ा हिस्सा किसी एक बीमारी में दवा और विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में मरने को विवश है तो इससे बड़ी त्रासदी और सरकार की अक्षमता और नहीं हो सकती। पिछले कुछ वर्षों में  >डॉ. राजश्री रावत ''राज''


 
22सितम्बर2008

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