संस्करण: 22सितम्बर-2008

नकली जिहादी, असली अपराधी !

सुभाष गाताड़े

विवादों को पैदा कर सस्ती शोहरत हासिल करने में महारत हासिल किए विश्व हिन्दू परिषद के नेता रामबिलास बेदान्ती पिछले दिनों एक ऐसे विवाद में फंस गए, जिससे निकलना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है और सबसे बढ़ कर उनकी इस हरकत के लिए अयोध्या के साधुओं ने ही उनके खिलाफ कमर कस ली है।

ख़बर है कि अयोध्या के चर्चित शरयू कुंज मन्दिर के महंथ युगल किशोर शास्त्री की अगुआई में पिछले दिनों लगभग पांच सौ साधुओं एवम महंथों की एक बैठक हुई, जिसमें विश्व हिन्दू परिषद के नेता, पूर्व सांसद रामबिलास वेदान्ती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गयी। (इण्डियन एक्स्प्रेस, 15 सितम्बर 2008) मालूम हो कि वेदान्ती ने पिछले दिनों पुलिस में यह शिकायत की थी कि उन्हें सिमी एवम अल कायदा से जान से मारने की धमकी मिल रही है।

दरअसल 30 अगस्त को वेदान्ती ने फैजाबाद पुलिस में यह लिखित शिकायत की। फैजाबाद पुलिस तत्काल हरकत में आयी और उसने बेदान्ती को मिलने वाली सुरक्षा में और इजाफा किया तथा बेदान्ती के मोबाइल फोन की भी इलैक्ट्रानिक निगरानी शुरू कर दी ताकि यह जाना जा सके कि धमकाने वाला कौन है और पुलिस को इसमें कामयाबी भी मिल गयी जब उसने दो लोगों को धर दबोचा जो खुद किसी सिमी-अल कायदा के कार्यकर्ता नहीं बल्कि बजरंग दल एवम हिन्दू युवा वाहिनी के स्थानीय नेता थे। बजरंग दल के शहर अध्यक्ष रमेश तिवारी और हिन्दू युवा वाहिनी के स्थानीय संयोजक को गोण्डा जिले के कटरा इलाके से पकड़ा गया। कड़ी पूछताछ के बाद इन दोनों ने कबूला कि चूंकि उनके गुरूजी को विश्व हिन्दू परिषद के अन्य नेताओं अशोक सिंगल, प्रवीण तोगड़िया की तरह सुरक्षा नहीं मिल रही थी इसलिए उन्होंने यह कदम गुरूजी की सहमति से उठाया।

सम्वाददाता से बात करते हुए महंत युगल किशोर शास्त्री ने बताया कि सौ से अधिक साधुओं द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा गया है जिसमें अयोध्या एवम आसपास के इलाके में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने के लिए वेदान्ती को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग की गयी है। बताया जाता है कि वेदान्ती खुद गोण्डा से प्रत्याशी बनने की फिराक में हैं और उनका यही आकलन था कि ऐसी धामकी की चर्चा से साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण तेज होगा जिसका उन्हें लाभ मिलेगा।

वैसे अगर पीछे मुड़ कर देखें तो वेदान्ती द्वारा पुलिस में दर्ज की शिकायत में कोई नयापन नहीं है। वह रामजन्मभूमि आन्दोलन के ही अपने एक अन्य साथी नृत्यगोपाल दास की नकल उतार रहे थे। 'कथादेश' पत्रिका में अपने मासिक कालम के अन्तर्गत 'मीडिया और अपराध' शीर्षक लेख में चर्चित पत्रकार एवम मीडिया आलोचक अनिल चमड़िया ने इस प्रसंग पर रौशनी डाली थी और इसी बहाने मीडिया के रूख की भी चर्चा की थी।

दरअसल महंत नृत्यगोपाल दास जो रामजन्मभूमि न्यास से सम्बध्द हैं कुछ अरसा पहले पुलिस में यह शिकायत दर्ज की गयी थी कि उन्हें अल कायदा से जान से मारने की धमकी मिल रही है। अख़बारों ने भी इस मामले को जम कर उठाया और कहा कि यह सरकार की नाकामयाबी का प्रमाण है कि हिन्दू नेताओं को जान की धमकी मिल रही है। इस कथित अकर्मण्यता की ख़बर के साथ कुछ अख़बारों ने बॉक्स बना कर इस बात के भी विवरण पेश किए कि विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं - अशोक सिंघल और प्रवीण तोगड़िया - आदि ने नृत्यगोपाल शास्त्री को मिली इस 'धमकी' पर चिन्ता प्रगट की। विश्व हिन्दू परिषद के अन्य नेता पुरूषोत्ताम नारायण ने यहां तक दावा किया कि महंत को मिली यह धमकी अल कायदा द्वारा समूचे हिन्दू समाज के सामने पेश की गयी चुनौती है जिसके लिए 'हर स्तर पर हिन्दुओं को एकजुट होना होगा।' घटना के अगले ही दिन मामले की सच्चाई सामने आयी जब पुलिस ने महंत के शिष्य सन्तोष को हरिद्वार से गिरफ्तार किया जिसने बताया कि उसी ने यह पत्र लिखा था क्योंकि उसके गुरूजी (अर्थात नृत्यगोपाल दास) को विश्व हिन्दू परिषद के अन्य नेताओं अशोक सिंगल और प्रवीण तोगड़िया की तरह झेड् प्लस सुरक्षा नहीं मिल रही थी।

इस प्रसंग के बारे में बात करते हुए श्री अनिल चमड़िया ने लिखा था कि ''कोई पूछनेवाला है कि महंथ दास को अलकायदा से धमकी की खबर कैसे छपी ? ताकतवर जहां चाहता है वहां आतंकवाद की मौजूदगी दिखा सकता है। राष्ट्र और धर्म पर खतरे दिखा कर अपनी हर करतूत के लिए सुरक्षा हासिल कर सकता है। यह ताकतवर हर क्षेत्रा में मौजूद है। मीडिया ताकतवरों के इशारे पर नाचने वाला पात्र बन गया है।'

रामबिलास बेदान्ती हों या नृत्यगोपाल दास हों - दोनों प्रसंग इसी बात को उजागर करते हैं कि हिन्दुत्व ब्रिगेड से नजदीकी रखने वाले लोग अपने सीमित स्वार्थ के लिए पूरे इलाके का अमन-चैन छीनने के लिए तैयार रहते है और उसके लिए दूसरे समुदाय को दोषारोपण करने से बाज नहीं आते। और इस काम के लिए किसी भी सीमा तक जाने से उन्हें गुरेज नहीं होता, फिर भले ही नकली जिहादी ही क्यो न बनना पड़े !

महज दो साल पहले की बात है जब महाराष्ट्र के नांदेड में लक्ष्मण राजकोण्डवार नामक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के घर में हुए बम विस्फोट में लक्ष्मण राजकोण्डवार का अपना बेटा तथा उसका साथी हिमांशु पानसे की ठौर मौत हुई थी। (6 अप्रैल 2008) बाद में पता चला कि मारे गए दोनों लोग बजरंग दल से सम्बध्द थे। मृतकों के घरों पर छापे में पुलिस को न केवल नकली दाढ़ी और इलाके के अल्पसंख्यक प्रार्थनास्थलों के नक्शे मिले थे, साथ ही साथ ऐसे कपड़े भी मिले थे जो अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अक्सर पहनते हैं। इन सभी सूत्रों को एक साथ जोड़ कर देखने के बाद पुलिस को उस साजिश का पता चला था जो बजरंग दल के कारिन्दों ने रची थी, जिसके तहत वह अल्पसंख्यक समुदाय का कपड़ा पहन कर स्थानीय मस्जिदों में बम फेंकने वाले थे।

इस बम विस्फोट में बच निकले बजरंग दल के अन्य लोगों ने पुलिस को यह भी बताया था कि इसके पहले महाराष्ट्र में हुए कई आतंकी हमलों के पीछे भी उनका ही हाथ रहा है। समूचा मुल्क इन दिनों आतंकवाद के कहर पर बहस में मुब्तिला है। उस वक्त क्या उसे आतंकवाद के इस नए संस्करण पर भी गौर करना नहीं चाहिए ?

 

सुभाष गाताड़े