>स्वाति शर्मा

संस्करण: 22दिसम्बर-2008

CLICK HERE TO DOWNLOAD HINDI FONT

सेना का आवाहन

एक खतरनाक संकेत

भाजपा के नेता और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गत तीन दिसम्बर को भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में बैठ कर एक बहुत ही खतरनाक बयान दिया है जो हमारी पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती की तरह है।  >वीरेन्द्र जैन


क्या ये सारी गतिविधियां संविधान विरोधी नहीं हैं?

मध्यप्रदेश में चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद कुछ ऐसी घटनायें हुईं जो संविधान सम्मत प्रावधानों के विपरीत होने के साथ - साथ स्थापित गौरवशाली परंपराओं के विपरीत भी हैं। >एल.एस.हरदेनिया


बुश की बेहद शर्मनाक बिदाई

किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की इतनी शर्मनाक बिदाई नहीं हुई, जितनी जॉर्ज डब्ल्यू बुश की हुई। अल बग़दादिया नामक अख़बार के पत्रकार मुंतज़िर अल जैदी ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान बुश पर जूता फेंक कर मारा और कहा कि यही तुम्हारी बिदाई है। >महेश बाग़ी


अब तो हमें चीन को समझना होगा

चीन की कुटिलता किसी से छिपी नहीं है लेकिन मुंबई हमले पर जिस तरह की खामोशी वो अख्तियार किए हुए हैं उसके बाद ड्रैगन से रिश्तों की पुर्नसमीक्षा आवश्यक हो गई है. आज जहां पूरा विश्व पाकिस्तान की मुखालफत में भारत के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है >नीरज नैयर


'लाईव प्रसारण-कितना सार्थक, कितना घातक!'

भारत में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा किसी भी घटना से जुड़े विषय का 'लाईव प्रसारण' (सीधा प्रसारण) किए जाने की सार्थकता और उसके फलस्वरूप होने वाले परिणामों या दुष्परिणामों के बारे में संसदीय समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट पेश की है।संसदीय समिति ने लाईव प्रसारण >राजेन्द्र जोशी


इस हमले से हमने आखिर क्या सीखा?

मुम्बई नहीं यह देश पर हमला है। ऐसा कहने वाले आज हमारे बीच कई लोग हैं। अब तो रोज ही हमारी नाकामियों की खबरें पढ़ने को मिल रही हैं। कोई कहता है 'हाँ हमसे चूक हुई', तो कोई कहता है कि कमांडो भेजने में दो घंटे की देर हमारी अफसरशाही के कारण हुई। >डॉ. महेश परिमल


भारत को फिर बर्ड फ्लू ने झकझोरा

बर्ड फ्लू ने एक बार फिर भारत में दस्तक दे दी है। इस बीमारी ने केंद्र के साथ-साथ कई राज्य सरकारों की नाक में दम कर दिया है। असम और पश्चिम बंगाल के अधिकांश जिले बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं। साथ ही पड़ोसी मेघालय में भी यह बीमारी पहुंच चुकी है। मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, झारखंड, बिहार >एम.के.सिंह


सर्दी में गर्मी का एहसास क्यों ?

शीतऋतु में ठण्ड के बजाय गर्मी हो तो चौंकना और मंथन आवश्यक है। पश्चिमी विशेष अरब सागर से आने वाली हवा का रूख बदलना, निम्न दाब, कश्मीर घाटी में भारी हिमपात से अब प्रबल संभावना के आसार आदि तथ्य, कथन के आधार पर आखिर कब तक हम अपने को झूठी दिलासा देते रहेंगे।>अंजनी कुमार झा


''शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण का औचित्य''

आज पूरी दुनिया में ज्ञान का विस्तार तेजी से हो रहा है। शिक्षा मानव संसाधान के विकास का आधार बन गई है। आज अन्य क्षेत्रों में निजीकरण के बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस प्रयोग से शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता में वृध्दि होगी और उच्च शिक्षा के लिए अन्य देशों की ओर भारतीयों के पलायन पर रोक लगेगी। विशेष का तकनीकी क्रांति के बाद इसकी संभावनाए और बढ़ गई हैं।  >स्वाति शर्मा


भुखमरी का बढ़ता दायरा

दुनिया के नेतृत्वकर्ता और समृध्दशाली लोग जिस तरह से प्रकृति और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करते हुए विकास का ढ़िढोरा पीट रहे हैं उनके हित भूख का दायरा बढ़ते जाने में ही निहित हैं। इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य और कृषि संगठन की ताजा रिपोर्ट का यह दर्शाना कि दुनिया में भूखे लोगों की गिनती में चार करोड़ भुखमरों का इजाफा और हो गया है, हैरानी में डालने वाली बात नहीं>प्रमोद भार्गव


कृषि में महिलाओं पर राष्ट्रीय नीति की दरकार

भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की बहुसंख्यक जनता गांवों में निवास करती है। गांवों में कृषि ही जीवन का आधार है और कृषकों की निरन्तर आत्महत्याएँ उनके जीवन की भयंकर हताशा के परिणाम हैं। अपनी आजीविका के एकमात्र साधन की सफलता हेतु वे अपने परिश्रम के अलावा संसाधनों >डॉ. गीता गुप्त


किसानों के शोषण के कई रास्ते

राष्ट्रीय अपराध आंकड़े ब्यूरो की हाँलिया रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रतिदिन 46 किसान आत्महत्या करते हैं और सन 91 से अब तक लगभग 2 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों से किसानों की आत्महत्या की खबरें हमें मीडिया के जरिए लगातार मिल रही हैं।